Efficiency of Asha-ANM increased, AI chatbot, high-risk pregnancies

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रोमेश साहू. बेंगलुरु6 मिनट पहले

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वॉट्सएप आधारित जेनरेटिव एआई चैटबॉट के साथ दिसंबर 2024 में उत्तर प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ था।   - सिम्बॉलिक इमेज - Dainik Bhaskar

वॉट्सएप आधारित जेनरेटिव एआई चैटबॉट के साथ दिसंबर 2024 में उत्तर प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ था। – सिम्बॉलिक इमेज

भारत में प्रसव के दौरान हर घंटे 2 मौतें होती हैं। गर्भावस्था में संभावित जोखिम (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) के मामले लगभग 20 से 30% होते हैं, लेकिन मातृ मृत्यु-दर के 70 से 80% मामले इन्हीं से जुड़े होते हैं। इन हाई रिस्क प्रेगनेंसी का समय रहते पता लगाकर मातृ मृत्यु-दर को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। वहीं शुरुआती शिशु मृत्यु-दर को भी इससे नियंत्रित किया जा सकता है।

टेक्नोलॉजी इसमें मददगार साबित हो रही है। देश में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए बेंगलुरु स्थित सामाजिक संस्था अरमान ने आईआईएससी बेंगलुरु के आर्टपार्क के साथ मिलकर वॉट्सएप आधारित जेनरेटिव एआई चैटबॉट बनाया है। उत्तरप्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में 12 हजार से ज्यादा स्वास्थ्य कार्यकर्ता इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

यूजर्स का 98% फीडबैक पॉजिटिव

इस चैटबॉट के साथ दिसंबर 2024 में उत्तर प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ था। पहले 3 महीने केवल 100 एएनएम के साथ प्रयोग किया गया। अप्रैल 2025 से इसे उत्तर प्रदेश के पांच जिलों में लागू किया। अब उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में 12 हजार से ज्यादा आशा वर्कर्स और एएनएम इसका इस्तेमाल कर रही हैं। अमृता महाले बताती हैं इस चैटबॉट को इस्तेमाल करने वाली एएनएम में से 97% ने इसे संतोषजनक पाया है। वहीं यूजर्स का भी 98% पॉजिटिव फीडबैक है।

टेस्ट: पहले सवालों के सेट तैयार किए गए, गायनेकोलॉजिस्ट के पैनल ने उनकी जांच की

अमृता महाले बताती हैं कि चैटबॉट को ट्रेनिंग देने के लिए 100-100 सवालों के सेट दिए गए। ये सवाल बुनियादी के साथ-साथ संभावित जोखिम वाले भी थे। जैसे एक गर्भवती महिला को आयरन की टेबलेट खाकर एलर्जी हो जाती है और हीमोग्लोबिन 6.8 है। क्या इससे हाईरिस्क प्रेगनेंसी का खतरा है? चैटबॉट को इस्तेमाल करने से पहले तीन गायनेकोलॉजिस्ट का एक पैनल बनाया, जो सवालों के सेट के जवाबों की जांच करे। तीनों गायनेकोलॉजिस्ट से हर एक जवाब का मूल्यांकन कराया।

रिस्पॉन्स टाइम में कमी आई

अरमान में प्रोडक्ट और इनोवेशन की डायरेक्टर अमृता महाले कहती हैं कि हाई रिस्क प्रेगनेंसी का पता लगाने के लिए एएनएम, आशा कार्यकर्ता डॉक्टर्स से पूछती थीं। अब टेक्स्ट का जवाब 10 सेकंड में और ऑडियो का 30 सेकेंड से कम में मिलने लगा है।

देश की कई भाषाओं में होगा ये वॉट्सएप चैटबॉट

आर्टपार्क ने इस चैटबॉट को तैयार किया है। आर्टपार्क के प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. भास्कर राजकुमार बताते हैं कि इस तरह के बॉट्स को प्रशिक्षित करने के लिए डेटा और भाषा की जरूरत होती है। अभी यह सिर्फ हिंदी-मराठी-तेलुगु में है। जल्द ही कन्नड़ में होगा। आर्टपार्क के प्रोजेक्ट वाणी से कई और भाषाओं की इस चैटबॉट को ट्रेनिंग दी जाएगी।

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