129 bird species in Bhopal’s Bishankhedi, Bhoj Wetland
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वंदना श्रोती. भोपाल3 मिनट पहले
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भोपाल के जलाशय अब सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि देशी-विदेशी परिंदों की पसंदीदा ठिकाना भी बनते जा रहे हैं। इसका प्रमाण 40वें एशियन वाटरबर्ड सेंसस का ताजा डेटा देता है। इस गणना के तहत पहली बार पूरे मध्य प्रदेश में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की एक साथ गणना की गई। इसमें प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व, 16 वन वृत्त और 63 वन मंडल शामिल किए गए। सामान्य वन मंडलों में गणना पूरी हो चुकी है।
गणना में पक्षियों की सबसे अधिक प्रजातियां जबलपुर वन मंडल में दर्ज की गईं। वहीं रामसर साइट भोज वेटलैंड, बिशनखेड़ी (भोपाल) प्रजातियों के मामले में प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा। इसके अलावा रातापानी क्षेत्र के दाहोद, कलियासोत और हलाली डेम में भी विभिन्न प्रजातियों के पक्षी पाए गए हैं। टाइगर रिजर्व और अभयारण्यों के जलाशयों में यह गणना प्रक्रिया 11 फरवरी तक जारी रहेगी।
भोज वेटलैंड सिर्फ प्रजातियों की विविधता में ही नहीं, बल्कि जलीय पक्षियों की संख्या में भी आगे रहा। यहां 2430 जलीय पक्षी दर्ज है। इससे यह प्रदेश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया। वहीं कलियासोत डेम चौथे और हलाली बांध पांचवें स्थान पर रहा।
ये देशी-विदेशी परिंदे मिले
गणना के दौरान इंडियन स्पॉट-बिल्ड डक, यूरेशियन मूरहेन, सारस क्रेन, रेड-वॉटल्ड लैपविंग, व्हाइट-थ्रोटेड किंगफिशर, एलेक्जेंड्राइन पैराकीट, एशी प्रिनिया, ब्लैक ड्रोंगो, रेड-वेंटेड बुलबुल जैसी प्रजातियां दर्ज की गईं। गुलाबी मैना, साइबेरियन स्टोनचैट, यूरेशियन रेने, यूरेशियन केस्ट्रेल और कश्मीर से आने वाला टाइगा फ्लायकैचर भी दिखा। पूरी गणना ई-बर्ड ऐप के माध्यम से की गई, जिससे डेटा को डिजिटल रूप से दर्ज और विश्लेषित किया गया।
पक्षियों की प्रजातियों की स्थिति
जलाशय- प्रजातियां मोहारी पॉन्ड, जबलपुर- 139 भोज वेटलैंड बिशनखेड़ी- 129 दाहोद जलाशय- 119 कलियासोत भोपाल- 118 हलाली बांध- 116 रंगाई तालाब- 113 सिरपुर झील इंदौर- 103
पक्षियों की मौजूदगी से सामने आई जलाशयों और वेटलैंड की सेहत की पूरी तस्वीर
यह पहला अवसर है, जब जंगलों और जल स्रोतों की सेहत का आकलन पक्षियों की मौजूदगी के आधार पर किया गया। सर्वे में जिन इलाकों में पक्षियों की प्रजातियां अधिक दर्ज हुईं, वहां वेटलैंड को सुरक्षित रखने की जरूरत स्पष्ट हुई। अध्ययन से यह भी सामने आया कि शहरी क्षेत्रों के जलाशयों में भी उल्लेखनीय जैव विविधता मौजूद है। इससे संकेत मिलता है कि सही संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन से शहरी जल स्रोत भी पर्यावरणीय संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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