चर्चित मामला:3 महीने कानूनी लड़ाई के बाद बाद डॉ. शर्मा की बड़गांव अस्पताल में वापसी, क्षेत्रवासी बोले- यह सच की जीत




बड़गांव के लोगों के लिए सोमवार का दिन उत्सव से कम नहीं रहा। वजह थी हाईकोर्ट के आदेश पर वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक शर्मा की वापसी। तीन महीने की कानूनी लड़ाई के बाद उनकी बहाली को क्षेत्रवासियों ने सत्य की जीत बताया। जैसे ही डॉ. शर्मा बड़गांव पहुंचे, लोगों ने फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया। अपने आराध्य की तस्वीर हाथ में लिए वे जब सड़क पर निकले तो लोग उनके आगे-पीछे नाचते-गाते अस्पताल तक पहुंचे। अस्पताल परिसर में ढोल-नगाड़ों के बीचपूर्व सरपंच जमनालाल शर्मा ने उन्हें पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। ग्रामीणों ने मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। कार्यभार संभालते ही डॉ. शर्मा ने अस्पताल की बिगड़ी स्थिति पर चिंता जताई। बताया कि ओपीडी में पहले रोज करीब 500 मरीज आ रहे थे। अब घटकर 150 रह गए हैं। आईपीडी यानी भर्ती भी 30-50 के मुकाबले 2-3 रह गई है। तीन महीनों से चार्ज नहीं होने के कारण स्टाफ को वेतन तक नहीं मिल पाया। अब मैंपहले की तरह पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता से सेवा करता रहूंगा।



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Online donations are on the rise, with temples receiving 32.50 lakh rupees in 8 years, 27.48 lakh of which were donated with just one click.



प्रदेश में श्रद्धा का तरीका बदल रहा है। मंदिर वही हैं, आस्था भी वही है, लेकिन भक्ति अब डिजिटल हो चुकी है। देवस्थान विभाग मंदिरों में ऑनलाइन दान की सुविधा को लगातार विस्तार दे रहा है। नतीजे भी साफ नजर आने लगे हैं। नकद और दान पेटियों के मुकाबले ऑनलाइन

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विभाग ने साल 2019 में ऑनलाइन दान की शुरुआत उदयपुर जिले के ऋषभदेव (केसरियाजी) और गोगाजी (गोगामेड़ी) मंदिर से की थी। अब इस व्यवस्था को और व्यापक बनाते हुए 24 प्रमुख मंदिर व 18 देवी मंदिरों को भी ऑनलाइन दान प्रणाली से जोड़ा गया है।

ये है वजह : पारदर्शिता और तत्काल रसीद, इसलिए बढ़ा भरोसा

विभाग के अनुसार 2019 से अब तक 32.50 लाख का दान मिला है। इसमें से 27.48 लाख ऑनलाइन आए हैं। आंकड़ा बता रहा है कि श्रद्धालु अब मोबाइल और यूपीआई के जरिए दान देना ज्यादा आसान मानने लगे हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि इस वर्ष अब तक 65 हजार का दान पूरी तरह ऑनलाइन रहा है। ये भेंट सालासर हनुमानजी, खाटूश्यामजी, सांवलियाजी, रामदेवरा, ब्रजनिधि, पद्मनाथ सूर्य, गायत्री मंदिर आदि को मिली है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पारदर्शिता, सुविधा और तत्काल रसीद जैसी वजहों से ऑनलाइन दान पर भरोसा बढ़ा है। अधिकारियों के अनुसार यह दान राशि किसी ट्रस्ट को न देकर इसका उपयोग सीधे राजकीय स्तर पर मंदिरों और तीर्थ स्थलों की जनसुविधाओं के विकास पर किया जा रहा है। यानी श्रद्धालुओं का दान उनकी सुविधा पर ही खर्च हो रहा है।



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निवेशकों के लिए डिफाइनेज मोमेंटम फ्रेमवर्क पेश



जयपुर | डिफाइनेज सिक्योरिटीज ने निवेशकों के लिए नया नॉइजलेस मोमेंटम फ्रेमवर्क शुरू किया है। इस मौके पर 100 से अधिक ट्रेडर्स और निवेशक मौजूद रहे। इसको सक्रिय ट्रेडर्स के लिए बनाया गया है। यह बाजार की अफवाहों से दूर रहकर ट्रेडिंग में मदद करेगा। डिफाइनेज के सीईओ प्रशांत शाह ने कहा कि यह भारत का पहला ऐसा रिटेल ट्रेडिंग ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म है, जिसे निवेशक जरूरत के अनुसार कस्टमाइज कर सकेंगे।



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₹100 करोड़ बजट न खर्चने पर 20 अफसर चार्जशीट:हरियाणा में स्वच्छ भारत मिशन के लिए आया पैसा, CM को जवाब नहीं दे पाए अधिकारी




हरियाणा की नायब सरकार ने एक बड़ा एक्शन लिया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र से आए 100 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च न करने पर 20 अधिकारियों को चार्जशीट करने के आदेश जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई 5 फरवरी को चंडीगढ़ में हुई शहरी निकाय विभाग (ULB) की बजट मीटिंग में की गई, जिसका खुलासा अब हुआ। सूत्रों के अनुसार, इस मीटिंग में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े अधिकारियों से नाराज हो गए, जिसके बाद शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने HCS अधिकारी समेत 20 अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट करने के आदेश दिए गए। इस मामले में दैनिक भास्कर एप की टीम ने निकाय मंत्री विपुल गोयल से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कॉल नहीं उठाई। तत्कालीन डायरेक्टर जयदीप कुमार का भी नाम जिन अधिकारियों को चार्जशीट करने के आदेश दिए गए हैं, उनमें स्वच्छता मिशन के तत्कालीन स्टेट मिशन डायरेक्टर HCS अफसर जयदीप कुमार का नाम भी शामिल है। सरकार के सूत्रों के अनुसार, शहरी निकाय विभाग की बजट मीटिंग में विभागीय अधिकारी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के समक्ष बजट खर्च न कर पाने का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए थे। CM के सवाल पर सभी अधिकारी चुप रहे सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने जब अधिकारियों से पूछा कि स्वच्छता मिशन के तहत अभी तक करोड़ों रुपए क्यों बचे हुए हैं और इस बजट को खर्च करने के लिए अब तक योजना क्यों नहीं तैयार की गई, तो मीटिंग में स्वच्छ भारत मिशन के डायरेक्टर और निकाय विभाग के जॉइंट डायरेक्टर कंवर सिंह सहित अन्य अधिकारी कोई जवाब नहीं दे पाए। अब कार्रवाई के आदेश होते ही योजनाएं बनाने में तेजी आ गई है। 342 करोड़ का बजट मिला था 2025 में हरियाणा राज्य को स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता और सौंदर्यीकरण परियोजनाओं के लिए कुल ₹342 करोड़ का बजट आवंटित किया गया था। यह बजट केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा अप्रूव्ड एनुअल इम्प्लीमेंटेशन प्लांस (AIP) और स्पेसिफिक प्रोजेक्ट्स पर आधारित था। अधिकारी चुप, मंत्री ने जवाब नहीं दिया CM की नाराजगी और मंत्री के एक्शन के बाद से सभी विभाग के सभी अधिकारी चुप हैं। कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। इस मामले में मंत्री विपुल गोयल के मोबाइल नंबर 98110***** पर कॉल की, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। इसके बाद उन्हें मैसेज छोड़ा गया, लेकिन उन्होंने इसका भी जवाब नहीं दिया। अब जानिए क्या है स्वच्छ भारत मिशन…. 2 अक्टूबर 2014 को शुरुआत हुई स्वच्छ भारत मिशन भारत सरकार की एक प्रमुख राष्ट्रीय योजना है, जिसकी शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर की थी। इस अभियान का उद्देश्य देश को स्वच्छ बनाना, खुले में शौच की प्रथा को खत्म करना और लोगों में स्वच्छता को लेकर व्यवहार में बदलाव लाना था। हर घर में शौचालय बनाने का लक्ष्य इस मिशन के तहत गांवों और शहरों में बड़े पैमाने पर शौचालयों का निर्माण किया गया और सफाई को जनआंदोलन का रूप देने की कोशिश की गई। स्वच्छ भारत मिशन का मुख्य लक्ष्य हर घर में शौचालय उपलब्ध कराना और उनका नियमित उपयोग सुनिश्चित करना रहा। इसके अलावा, कचरे को ठीक से संभालने, गीले और सूखे कचरे को अलग करने, और कचरे को वैज्ञानिक तरीके से ठिकाने लगाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।



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गुरुग्राम में शगुन डेथ मिस्ट्री में लव एंगल:मां को कहा था-पसंद की लड़की से शादी करूंगा; अरावली से मिला कंकाल




गुरुग्राम में सोहना-तावड़ू रोड पर अरावली की पहाड़ियों में मृत मिले शगुन कुमार की मौत के मामले में परिवार की ओर से एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। परिजनों ने पुलिस को बताया कि कुछ समय से शगुन अपनी मां और रिश्तेदारों से कहा करता था, “मैं अपनी पसंद की लड़की से लव मैरिज करूंगा।” 14 जनवरी को जब वह घर नहीं लौटा तो परिवारवालों ने उसके मोबाइल पर कॉल किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। बार-बार कॉल करने पर भी कोई जवाब नहीं मिलने पर परिवार ने यही सोचा कि वह किसी लड़की के साथ चला गया है। इसी वजह से परिवार ने न तो उसकी तलाश की और न ही पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। परिवार यही सोचता रहा कि हो सकता है कि वह शादी के बाद लौट आए। 8 फरवरी को उसका शव बरामद हुआ। हालांकि, परिवार को यह नहीं पता कि शगुन के किस लड़की से प्रेम संबंध थे। जानिए जंगल में किस हालात में मिला कंकाल, पुलिस को क्या लग रहा 24 दिन बाद जंगल से कंकाल मिला शगुन मूल रूप से राजस्थान के अलवर जिले के जटीयाणा शाहपुर गांव का रहने वाला था। वह कई साल से सोहना की नहर कॉलोनी में अपनी मां के साथ किराए के मकान में रह रहा था। शगुन के चाचा मुकेश ने बताया कि परिवार ने सोचा था कि शगुन अपनी पसंद की लड़की के साथ कहीं चला गया है। परेशानी का कारण नहीं बताया था चाचा ने कहा कि गुन पिछले कुछ समय से परेशान रहता था, लेकिन कारण किसी को नहीं पता। शव कई दिनों तक जंगल में पड़ा रहा, जिसे जंगली जानवरों ने नोच-खा लिया। केवल सिर और हड्डियों का ढांचा बचा मिला। पुलिस ने शव को समेटकर पोस्टमॉर्टम के लिए मोर्चरी भिजवाया। जहां डॉक्टरों ने विसरा और अन्य जरूरी सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए। सुसाइड-मर्डर दोनों एंगल पर जांच जांच अधिकारी सतबीर ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत का सटीक कारण और समय पता चलेगा। पुलिस स्थानीय निवासियों, सहकर्मियों से पूछताछ और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। आत्महत्या और हत्या दोनों की संभावनाओं पर जांच की जा रही है।
3 सवाल…लापता होने से पहले बाइक बेची, पैसा एडवांस क्यों लिया

मौत से पहले बाइक बेची: शगुन ने अपनी मौत से कई दिन पहले ही अपनी बाइक बेच दी थी। परिवारवालों ने वजह भी पूछी, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं दिया। परिवार को इसका पता था, लेकिन फिर भी उन्होंने इसे लव अफेयर से जोड़कर चुप्पी साध ली। मालिक से 10 हजार रुपए लिए: शगुन सोहना के एक केले के गोदाम में नौकरी करता था। लापता होने से पहले उसने मालिक से 10 हजार रुपए लिए थे, जबकि उससे पहले बाइक भी बेची थी। उसको रुपयों की जरूरत कहां पड़ी, इसका जवाब परिवार के पास नहीं है। मोबाइल और सुसाइड नोट गीला: पुलिस को उसकी जेब से एक मोबाइल और चार पेज का सुसाइड नोट मिला है। दोनों ही गीले पाए गए हैं। मोबाइल ऑन नहीं हो रहा है। पुलिस इसे ऑन करवाएगी। मोबाइल और सुसाइड नोट को डीकोड के लिए फोरेंसिक लैब में भेजा गया है। 3 पॉइंट में उलझी शगुन की डेथ मिस्ट्री जानवरों ने नष्ट किए सबूत: पुलिस का अनुमान है कि शव लगभग 24 दिन जंगल में पड़ा रहा। इस दौरान जंगली जानवरों ने उसे घसीटा और मांस खाया। शरीर में हड्डियां दिख रही थीं और मांस के टुकड़े बिखरे हुए थे। इससे फोरेंसिक जांच में हत्या की वजह का पता लगाना मुश्किल हो गया है। यदि हत्या हुई थी, तो संघर्ष के निशान, गला दबाने या मारपीट के सबूत जानवरों ने नष्ट कर दिए होंगे। सुसाइड नोट पर संदेह: लाश के पास से मिला सुसाइड नोट फटा और गीला मिला है। जिसकी स्याही बह गई है। इसे पढ़ना मुश्किल है। फोरेंसिक एक्सपर्ट इसे डीकोड करेंगे। अगर नोट फर्जी या प्लांटेड निकला तो मजबूत एंगल बन सकता है। परिवार और परिस्थितियां संदिग्ध: 24 दिन तक कोई गुमशुदगी रिपोर्ट नहीं करवाई गई। शगुन ने पैसे निकाले, बाइक भी बेची, लेकिन परिवार चुप रहा। इस मामले में अन्य किसी के भी शामिल होने की संभावना है। शव भी संदिग्ध हालत में पड़ा मिला है।



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Haryana Faridabad Jail Terrorist Abdul Rehman Murder Case| Ram Mandir Dispute| Abdul Rehman Killed


हरियाणा के फरीदाबाद की नीमका जेल में अयोध्या राम मंदिर पर हमले की साजिश रचने के आरोपी अब्दुल रहमान की हत्या के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जेल सूत्रों के मुताबिक राम मंदिर को लेकर हुए विवाद के चलते बैरक में बंद दूसरे कैदी अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट ने

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नुकीला पत्थर लगने वह चिल्लाया तो सिक्योरिटी बैरक में बंद तीसरे कैदी शोएब रियाज की भी आंख खुल गई। तब अरूण, अब्दुल रहमान पर लगातार वार पर वार किए जा रहा था। उसके सिर से खून की धारा फूट रही थी। डर के मारे रियाज ने शोर मचा दिया। इसके बाद बाहर तैनात जेल स्टाफ और फिर अधिकारी मौके पर पहुंचे। बैरक खोलकर घायल रहमान को जेल के अस्पताल में लेकर जाया गया, जहां डाक्टर ने उसको मृत घोषित कर दिया।

जेल सूत्रों की माने तो 15 दिन पहले ही तीनों कैदियों को एक साथ सिक्योरिटी बैरक में रखा गया था। पिछले कुछ दिनों से दोनों के बीच अपने-अपने धर्म को लेकर कहासुनी हो रही थी। फिलहाल, पुलिस ने इस मामले में अरुण के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही अब्दुल रहमान के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, ताकि पता लग सके कि कितने वार उस पर किए गए थे।

इसके अलावा हत्यारोपी अरुण चौधरी के बारे में भी चौंकाने वाली बात बताई। पता चला चला कि वह जम्मू जिले के सांबा में 2023 में हुई युवक अक्षय शर्मा की सनसनीखेज हत्याकांड में शामिल था। गैंगवार में हुई इस हत्या में चार आरोपी शामिल थे, जिनमें अरुण चौधरी भी मुख्य आरोपी था। हत्या के बाद ये चारों अक्षय शर्मा का हाथ काटकर ले गए थे।

कैसे की गई अब्दुल रहमान की हत्या, कैसे तैयार किया गया मर्डर में प्रयुक्त् हथियार, हत्या के बाद सिक्योरिटी बैरक का क्या है हाल और अब आगे क्या होगी कार्रवाई? ऐसे ही सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट….

यूपी के मिल्कीपुर में अब्दुल रहमान का घर है। घर की छत पर एक कमरा बना है।

यूपी के मिल्कीपुर में अब्दुल रहमान का घर है। घर की छत पर एक कमरा बना है।

पहले जानिए कौन है अब्दुल रहमान और कैसे पकड़ा गया…

यूपी का रहने वाला, रिक्शा चलाता था, महंगे मोबाइल का शौकीन अब्दुल रहमान यूपी के मिल्कीपुर का रहने वाला था। अयोध्या-रायबरेली हाईवे से लिंक रोड पर 5Km अंदर चलकर चमनगंज रोड उसका 650 स्क्वायर फीट का घर है। घर के बाहर चिकन शॉप की दुकान है, जिसे पिता अबू बकर चलाते हैं। गरीबी के चलते सरकार की तरफ से उन्हें अंत्योदय कार्ड मिला है।

मां आश्मीन और उनकी तीन बेटियां हैं, जो अब्दुल रहमान से छोटी हैं। जांच में यह भी सामने आया था कि चार साल से अब्दुल कुचेरा बाजार से किन्हूपुर के बीच ई-रिक्शा चलाता था। उसके पास महंगे मोबाइल थे। वह केवल दसवीं तक पढ़ा था।

सोशल मीडिया पर राम मंदिर के वीडियो डालने पर नजर में आया सुरक्षा एजेंसी डार्क वेब पर भेजे जाने वाले कंटेंट को मॉनिटर करती है। भारत से पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश समेत पड़ोसी देशों में छिपे आतंकियों को डार्क वेब के जरिए ही सूचनाएं भेजी जाती हैं, ताकि लोकेशन ट्रेस न हो। जनवरी, 2024 में अयोध्या के राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी।

इसके बाद से ही राम मंदिर के कई वीडियो एक खास लोकेशन पर शेयर किए गए। जब सुरक्षा एजेंसियों ने भेजने वाले का IP एड्रेस को सर्च किया, तो जिस लोकेशन पर यह कंटेंट भेजा गया था, वह तो पता नहीं चला। मगर भेजने वाले की लोकेशन हरियाणा के फरीदाबाद की मिली।

फरीदाबाद के पाली इलाके के खंडहर में हैंडग्रेनेड छुपाकर रखे गए थे।

फरीदाबाद के पाली इलाके के खंडहर में हैंडग्रेनेड छुपाकर रखे गए थे।

2 मार्च 2025 को पकड़ा था, दो जिंदा ग्रेनेड, राम मंदिर के वीडियो मिले फरीदाबाद में लोकेशन मिलने पर हरियाणा एसटीएफ की मदद से गुजरात ATS और केंद्रीय एजेंसी IB यहां पहुंची। पाली गांव में दबिश दी तो 19 साल के अब्दुल रहमान निवासी मिल्कीपुर, यूपी को पकड़ लिया। उसके पास से दो जिंदा हैंड ग्रेनेड मिले थे, जिनको बम निरोधक दस्ते ने निष्क्रिय किया।

उसके पास कुछ विडियो भी मिले थे, जिनमें राम मंदिर से जुड़ी कुछ डिटेल थी। जांच में पता चला था कि करीब डेढ़ साल से अब्दुल रहमान सोशल मीडिया अकाउंट पर भड़काऊ वीडियो अपलोड करता था। सबसे पहले अब्दुल ने टिकटॉक पर अपना अकाउंट बनाकर भड़काऊ वीडियो डालना शुरू किया। टिकटॉक पर बैन लगा तो अब्दुल इंस्टाग्राम पर एक्टिव हो गया।

आतंकी अबू सूफियान ने ब्रेनवॉश किया, मंदिर पर हमले से पहले पकड़ा जांच एजेंसियों ने जब उससे पूछताछ की तो मालूम किया कि वह लकायदा इन इंडियन सब-कांटिनेंट (AQIS) के आतंकी अबू सूफियान के संपर्क में था। सूफियान ने ही उसका ब्रेनवॉश किया और आतंक की ऑनलाइन ट्रेनिंग दिलवाई। सूफियान ने अपने हैंडलर के जरिए फरीदाबाद में 2 हैंड ग्रेनेड और डेटोनेटर एक गड्ढे में छिपा दिए थे। इन्हें ही लेने अब्दुल रहमान फरीदाबाद आया था।

यहां से उसे हैंड ग्रेनेड और डेटोनेटर लेकर 4 अप्रैल को अयोध्या जाना और हमले की वारदात को अंजाम देना था। मगर, इससे पहले ही गुजरात एटीएस और हरियाणा एसटीएफ के हत्थे चढ़ गया। इसके बाद फरीदाबाद ही रिपोर्ट दर्ज हुई और 10 दिन के रिमांड के बाद उसे नीमका जेल में भेज दिया गया। तब से वह यहीं बंद था। वीडियो क्रांफेसिंग से उसकी पेशी होती थी।

2 मार्च को अब्दुल रहमान को फरीदाबाद के पाली इलाके से गिरफ्तार किया था।

2 मार्च को अब्दुल रहमान को फरीदाबाद के पाली इलाके से गिरफ्तार किया था।

अब जानिए कैसे हुई अब्दुल रहमान की हत्या…

सिक्योरिटी बैरक में थी तीन कैदी, एक यूपी, दो जम्मू कश्मीर से तिंगाव ACP अशोक वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि सिक्योरिटी बैरक में केवल तीन ही बंदी थे, एक यूपी का अब्दुल रहमान, दो जम्मू कश्मीर के अरूण चौधरी और शोएब रियाज। रूण चौधरी और शोएब रियाज को एक साथ ही जम्मू कश्मीर से सुरक्षा कारणो के चलते नीमका जेल में शिफ्ट किया गया था। पहले तीनों कैदी अलग-अलग बैरक में थे। मगर, 15 दिन पहले ही तीनों को एक साथ इस सिक्योरिटी बैरक में रखा गया था।

राम मंदिर बनने से नाराज था, अरूण से होता था झगड़ा जेल सूत्रों के मुताबिक अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट और अब्दुल रहमान के बीच में राम मंदिर को लेकर 10 दिन से विवाद चल रहा था। राम मंदिर बन जाने से वह अक्सर नाराज रहता था। वह अपने धर्म को ही सबसे ऊपर बताता था। दूसरी तरफ अरुण चौधरी को पता चल गया था कि अब्दुल रहमान ने अलकायदा इन इंडियन सब-कांटिनेंट (AQIS) के कुख्यात आतंकी अबू सूफियान के संपर्क में आकर अयोध्या में राम मंदिर उड़ाने की साजिश रची थी। इसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा होता था।

सोते समय मुंह दबाया, सिर पर नुकीले पत्थर से कई वार किए जेल सूत्रों के मुताबिक सोमवार की सुबह 2 से 3 के बीच का समय हो रहा था। उस समय अब्दुल रहमान और शोएब रियाज दोनों सो रहे थे, लेकिन अरुण चौधरी जगा हुआ था। उसने चुपके से अब्दुल रहमान का मुंह दबाया और उसरे सिर के पीछे के हिस्से पर नुकीले पत्थर से कई वार किए। इसी दौरान आवाज सुनकर शोएब रियाज जाग गया और उसने शोर मचाकर बैरक के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मीयों को बुला लिया। 10 मिनट बाद ही जेल अधिकारी भी पहुंच गए। घायल अब्दुल रहमान को जेल अस्पताल में लेकर जाया गया, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी।

हत्या के बाद शांत बैठा रहा, पहले ही तैयार कर लिया था हथियार जेल सूत्रों की माने तो हत्या के बाद अरुण शांत बैठा रहा, जबकि शोएब रियाज काफी डर गया था। डर के कारण उसने अरुण को रोकने की कोशिश तक नहीं की। सूत्रों की माने तो राम मंदिर को लेकर रोज-रोज हो रहे विवाद से अरुण काफी खफा हो गया था। इसलिए उसने दिन में ही एक पत्थर को नुकीला बनाकर हथियार बना लिया था। यह पत्थर वह जेल परिसर से ही उठाकर लाया था। उसने इसी नुकीले पत्थर से अब्दुल रहमान पर एक के बाद एक कई वार किए।

यह फोटो उस वक्त की है, जब जम्मू में हुए अक्षय शर्मा हत्याकांड के बाद पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अरुण चौधरी लाल घेरे में।

यह फोटो उस वक्त की है, जब जम्मू में हुए अक्षय शर्मा हत्याकांड के बाद पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अरुण चौधरी लाल घेरे में।

अब्दुल रहमान की हत्या करने वाले अरुण से जुड़ी 3 अहम बातें…

सांबा में अक्षय शर्मा हत्याकांड से चर्चा में आया अरुण चौधरी जम्मू जिले के आरएस पुरा सेक्टर के गांव खौर देओनियन का रहने वाला है। उसका नाम जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के गुड़वाल रामगढ़ में 25 दिसंबर को हुई अक्षय शर्मा हत्याकांड के बाद चर्चा में आया था। यह हत्या गैंगवार के चलते अंजाम दी गई थी। इसमें चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें अतुल चौधरी (ट्रिंडियन रामगढ़), अरुण चौधरी उर्फ अबू जट (आरएस पुरा, जम्मू), साहिल शर्मा उर्फ गिल्का (विजयपुर), राजेश कुमार उर्फ छोटू उर्फ माही धिल्लों (विजयपुर) शामिल थे।

हाथ काटकर ले गए थे, इंस्टाग्राम पर लाइव किया था पुलिस के मुताबिक, यह हत्या निर्ममता से की गई थी। अक्षय शर्मा की हत्या के बाद आरोपी उसका हाथ काटकर ले गए थे, जो बाद में श्मशान पड़ा मिला था। हत्या के बाद आरोपियों ने घटना को इंस्टाग्राम पर लाइव स्ट्रीम किया था, जिससे मामला बहुत सुर्खियों में आ गया था। इसके बाद एक माह बाद ही सांबा पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर लिया था। इनमें से दो को पंजाब के दो आरोपियों अतुल और अरुण को अमृतसर के एक होटल से पकड़ा गया था। दोनों ने पुलिस पर फायरिंग की थी, जिसमें एक कांस्टेबल भी घायल हो गया था।

रिश्वत के आरोप लगा तो फरीदाबाद शिफ्ट किया गया गिरफ्तारी के बाद चारों को कठुआ जेल में भेज दिया गया था। साल 2024 में जेल से ही इंस्टाग्राम पर लाइव आकर अरुण ने कठुआ जेल प्रशासन पर फोन और सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए दो लाख लेने के आरोप लगाए थे। इसके बाद उसे अक्टूबर 2024 में कठुआ जेल से फरीदाबाद की नीमका जेल में शिफ्ट किया गया था। यहीं अब उसने राम मंदिर पर हमले की साजिश रचने के आरोपी अब्दुल रहमान की हत्या कर दी।

फरीदाबाद की नीमका जेल में हत्या के बाद जांच करने पहुंचे पुलिस कर्मी।

फरीदाबाद की नीमका जेल में हत्या के बाद जांच करने पहुंचे पुलिस कर्मी।

पुलिस रिमांड पर लेकर अरुण से करेगी पूछताछ अब्दुल रहमान की हत्या के मामले में तिंगाव ACP अशोक वर्मा ने बताया कि इस वारदात के बाद अब अरुण चौधरी और शोएब रियाज को अलग-अलग गया है। पुलिस अब्दुल रहमान के पोस्टमार्टम के बाद अरूण चौधरी को वारंट पर लेकर पूछताछ करेगी। इसके बाद मामले की आगे की कार्रवाही की जाएगी।

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फरीदाबाद जेल में अब्दुल रहमान की हत्या:राम मंदिर उड़ाने की साजिश रची थी; हमलावर और अब्दुल एक ही बैरक में थे

हरियाणा की फरीदाबाद जेल में बंद अब्दुल रहमान की हत्या कर दी गई है। रविवार देर रात जेल में मर्डर केस में बंद अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट नाम के कैदी ने उस पर नुकीली चीज से हमला किया। दोनों को हाई सिक्योरिटी वाली बैरक में एक साथ बंद किया गया था। (पूरी खबर पढ़ें)



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धरना प्रदर्शन:बंद के दौरान रैली निकाली, प्रदर्शन किया, पुलिस ने खदेड़ा, दो घायल, नौ हिरासत में




तीन दिन पहले बरड़िया क्षेत्र में गोवंश के अवशेष मिलने के मामले में नाराज गोसेवकों ने सोमवार को बारां बंद का आह्वान किया। बंद के दौरान गोसेवक और अन्य संगठनों के लोग प्रताप चौक स्थित पुलिस चौकी के सामने धरना दे रहे थे। इस दौरान पुलिस ने धरना दे रहे गोसेवकों को लाठी भांजकर खदेड़ा और आंसू गैस के गोले दागे। इस दौरान एक किशोर सहित दो जने घायल हो गए। इधर, पुलिस ने इस मामले में 9 लोगों को हिरासत में लिया है। कलेक्टर व एसपी भी मौके पर पहुंचे। कलेक्टर ने लाठीचार्ज से इंकार किया है। कलेक्टर ने जिले में धारा 163 लागू कर दी है। कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर का कहना है कि घटना को लेकर 6 फरवरी को रिपोर्ट दर्ज कर ली गई थी, जिसकी जांच चल रही है। उनका कहना है कि इस मामले को लेकर कुछ लोग उत्तेजित हो गए थे, इस पर उन्हें वहां से हटाया गया, लेकिन लाठीचार्ज नहीं किया गया। गोसेवकों व हिंदू संगठनों ने सोमवार को बारां बंद का आह्वान किया था। इसके तहत गोसेवकों समेत अन्य संगठनों के लोग सुबह से ही प्रताप चौक पर एकत्रित होने लगे। वे यहां पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इसके चलते अधिकांश दुकानें सुबह से ही बंद थीं। इसी दौरान गोसेवकों और बारां डीएसपी के बीच बहस भी हो गई। गोसेवकों ने शहर के बाजारों से होकर रैली निकाली और दोपहर 12 बजे फिर से प्रताप चौक पहुंचे और यहां पुलिस चौकी के सामने धरने पर बैठ गए। वे ज्ञापन देने के लिए कलेक्टर को बुलाने की मांग पर अड़े रहे। तीन घंटे बाद भी कलेक्टर मौके पर नहीं पहुंचे। इसी दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर और लाठी भांजकर भीड़ को खदेड़ना शुरू कर दिया। इस दौरान एक 12 वर्षीय बालक समेत दो जने घायल हो गए। पुलिस ने 9 गोसेवकों को हिरासत में लिया है।



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IMD Weather Update Today MP UP Rajasthan cold Wave snowfall Uttarakhand himachal jammu Kashmir


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शिमला/भोपाल/जयपुर/श्रीनगर/देहरादून4 मिनट पहले

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देशभर में मिला-जुला मौसम देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड के 7 शहरों में न्यूनतम तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। मुनस्यारी में न्यूनतम तापमान माइनस 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। जम्म-कश्मीर-लद्दाख में पारा 0°C से कम रहा।

हिमाचल प्रदेश में वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव हो रहा है। इससे अगले 24 घंटे के दौरान अधिक ऊंचे पहाड़ों पर बर्फबारी और निचले व मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में अच्छी बारिश होगी। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है।

उत्तर प्रदेश में आज से तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होने की संभावना है। राज्य में बिजनौर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में कोहरे का असर लगभग खत्म होने वाला है।

मध्य प्रदेश में मंगलवार और बुधवार को तेज सर्दी रहेगी। इस दौरान ग्वालियर-चंबल के साथ रीवा और शहडोल संभाग के शहरों में रात का पारा 10 डिग्री से नीचे रहेगा। इससे पहले बीती रात प्रदेश के 13 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से कम रहा।

राजस्थान के कुछ इलाकों में सर्दी अब भी कम नहीं हो रही। सोमवार की सुबह अलवर में फसलों पर ओस की बूंदे जम गईं। सुबह-सुबह हल्का कोहरा रहा और बादल छाए। यहां का न्यूनतम तापमान 9 डिग्री और अधिकतम तापमान 25 डिग्री दर्ज किया गया।

बिहार के 5 जिलों समस्तीपुर, गोपालगंज, सुपौल, बगहा, मधुबनी और मुजफ्फरपुर में सोमवार को घना कोहरा रहा। यहां जीरो विजिबिलिटी है। लोगों को गाड़ी की लाइट चालू कर के चलना पड़ रहा है। वहीं दरभंगा के NH-527 B पर लो विजिबिलिटी के कारण ट्रक और ई-रिक्शा में टक्कर हो गई, जिसमें 2 लोग घायल हो गए।

मौसम की तस्वीरें…

बिहार के दरभंगा में कोहरे के कारण ट्रक ने ई-रिक्शा को टक्कर मारी, जिसमें 2 लोग घायल हुए हैं।

बिहार के दरभंगा में कोहरे के कारण ट्रक ने ई-रिक्शा को टक्कर मारी, जिसमें 2 लोग घायल हुए हैं।

अगले दो दिन का मौसम…

11 फरवरी: हिमाचल प्रदेश में 11 फरवरी से अगले तीन दिन तक मौसम पूरी तरह साफ रहेगा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में सुबह मध्यम कोहरा रहेगा।

12 फरवरी: हिमाचल प्रदेश में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का प्रभाव कमजोर पड़ना शुरू होगा। ऊपरी इलाकों में अभी भी हल्की बर्फबारी या बारिश संभव है, मैदानी इलाकों में कोहरा और कम रहेगा।

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उपभोक्ता सेवाओं में सुधार के लिए नई पॉलिसी बनेगी:हर जिले में पेयजल सप्लाई सेंट्रलाइज्ड होगी; अब बड़ी कंपनियां संभालेंगी काम




प्रदेश में पेयजल सप्लाई के ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (ओएंडएम) का काम अब बड़ी कंपनियों को सौंपने की तैयारी है, ताकि चीफ इंजीनियर और अधीक्षण अभियंता स्तर पर मॉनिटरिंग संभव हो सके। पूरे जिले की जिम्मेदारी एक ही कंपनी को देने से कॉल सेंटर और शिकायत निस्तारण की व्यवस्था सेंट्रलाइज्ड होगी। अब तक पंप हाउस और टंकियों के अनुसार अलग-अलग ठेकेदारों और कंपनियों को काम दिया जाता था, जिससे एईएन और एक्सईएन स्तर पर निगरानी होती थी। नई व्यवस्था में एक जिले की पूरी पेयजल सप्लाई एक ही कंपनी के जिम्मे होगी। इसके लिए विभाग लगातार बैठकें कर पॉलिसी को अंतिम रूप दे रहा है। नई पॉलिसी में अदाणी वाटर लिमिटेड, एलएंडटी प्रा. लि. और जीवीपीआर जैसी कंपनियों ने रुचि दिखाई है। विभाग का फोकस गर्मियों में शिकायतों का समय पर समाधान है। हर घर तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की होगी। नए सिस्टम से यह होगा फायदा विभाग का दावा है कि नई व्यवस्था पेयजल सप्लाई को केवल तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिक सेवा के रूप में मजबूत करेगी। सप्लाई की निरंतरता, गुणवत्ता और विश्वसनीयता तय होगी। एक ही एजेंसी को पूरी जिम्मेदारी मिलने से जवाबदेही तय होगी और लापरवाही की गुंजाइश कम होगी। पॉलिसी में परफॉर्मेंस आधारित भुगतान और दंड का प्रावधान रहेगा, जिससे उपभोक्ताओं को समय पर और मानक गुणवत्ता का पानी मिल सकेगा। ओएंडएम पॉलिसी पर जिला स्तर पर मंथन
सोमवार को ओएंडएम पॉलिसी को लेकर प्री-टेंडर स्टेकहोल्डर कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें चीफ इंजीनियर मनीष बेनीवाल, केडी गुप्ता, नीरज माथुर, राज सिंह चौधरी, आरके मीणा, देवराज सोलंकी सहित अन्य इंजीनियर मौजूद रहे। कॉन्फ्रेंस में अदाणी वाटर लि., एलएंडटी प्रा. लि., जीवीपीआर सहित राज्यभर के बड़े और छोटे स्टेकहोल्डर्स, फर्म्स, कंसल्टेंट्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट शामिल हुए। प्रस्तावित ओएंडएम पॉलिसी फ्रेमवर्क पर सुझाव और अनुभव साझा किए गए। छोटे ठेकेदारों का विरोध नई व्यवस्था के प्रस्ताव के साथ ही छोटी स्कीमों का ओएंडएम ठेका संभालने वाले ठेकेदारों का एक गुट विरोध में उतर आया है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से बड़ी कंपनियों को ही काम मिलेगा, जिससे छोटे ठेकेदार बेरोजगार हो जाएंगे।



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फर्जीवाड़े के लिए टेंडर दो बार रद्द:आरएनटी ने बिना टेंडर 10 करोड़ के स्टेंट व पेसमेकर खरीदे, असल कीमत 5 करोड़ ही




आरएनटी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में खरीदारी में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। यह मामला साल 2022 से 2025 के बीच हृदय रोगियों के लिए खरीदे गए पेसमेकर और स्टेंट से जुड़ा है। आरोप है कि इस तीन वर्ष की अवधि में इन जीवनरक्षक उपकरणों की खरीद बिना नियमित निविदा प्रक्रिया अपनाए की गई। इसके लिए 10 करोड़ खर्च किए, जबकि, उपकरणों की कीमत 5 करोड़ ही थी। जानकारी के अनुसार, हॉस्पिटल प्रशासन ने पेसमेकर की खरीद के लिए दो बार औपचारिक रूप से टेंडर प्रक्रिया तो शुरू की, लेकिन हर बार तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए निविदाएं निरस्त कर दी गईं। पहले 28 फरवरी 2024 को टेंडर संख्या-37 जारी किया गया। इसमें पांच फर्मों ने आवेदन किया, पर इसे निरस्त कर दिया गया। इसके बाद 16 नवंबर 2024 को टेंडर संख्या-57 निकाला गया। इसमें चार फर्मों ने भाग लिया। लेकिन, इसे भी तकनीकी कमियों के आधार पर रद्द कर दिया गया। आखिरी में 5 मई 25 को टेंडर संख्या-6 जारी कर बोस्टन साइंटिफिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को स्वीकृत कर दिया। 2022 से दिसंबर 2025 के बीच 3600 स्टेंट बिना टेंडर के खरीदे गए। इन पर 8 करोड़ 50 लाख खर्च हुए। हर स्टेंट की कीमत 23 हजार 625 रुपए रही। यदि इन्हें निविदा से खरीदते तो आधी कीमत यानी साढ़े चार करोड़ में यह खरीद संभव थी। 180 पेसमेकर व 3600 स्टेंट की खरीद में गड़बड़ी इस बीच, 2022 से 2025 तक करीब 180 पेसमेकर बिना टेंडर के खरीदे गए। इनपर 2 करोड़ 17 लाख 80 हजार खर्च किए। प्रति पेसमेकर की कीमत 1 लाख 21 हजार चुकाई गई। यदि समय रहते निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली जाती तो यही पेसमेकर 1 लाख 6 हजार रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदे जा सकते थे। इससे सरकार को करीब 27 लाख रुपए की बचत हो सकती थी। खरीद के लिए स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस की प्रक्रिया को बनाया आधार: स्टेंट की बिना टेंडर के खरीद के लिए राजस्थान स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस एजेंसी की प्रक्रिया को आधार बनाया गया। ताकि, खरीद की प्रक्रिया पर सवाल न उठे। यह खरीद मैसर्स एसके सोल से की गई। इसके बाद तीन सदस्यीय समिति गठित कर एस इंडिया कार्डियोपैथी और राधे नामक फर्म से भी स्टेंट खरीदे गए। “आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. विपिन माथुर का कहना है कि शिकायत के आधार पर डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन द्वारा पूरे मामले की जांच की जा चुकी है। इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता नहीं पाई गई।”



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