Railway RAC Berth Refund; Ticket Partial Fare Rule


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नई दिल्ली7 मिनट पहले

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संसदीय समिति ने मंगलवार को कहा RAC कैटेगरी के तहत बुक किए गए टिकटों के लिए यात्री से पूरा किराया लेना सही नहीं है। समिति ने रेल मंत्रालय को सुझाव दिया कि रेल मंत्रालय को ऐसे यात्री को आंशिक किराया वापस करने के लिए नियम बनाना चाहिए।

मौजूदा नियम के तहत, रेलवे RAC कैटेगरी के तहत ट्रेनों में बर्थ बुक करने के लिए यात्री से पूरा किराया लेता है। हालांकि, यात्री RAC कैटेगरी में रह सकता है और बर्थ दूसरे RAC यात्री के साथ साझा कर सकता है। दोनों यात्री रेलवे को पूरा किराया देते हैं।

वहीं, सुपरफास्ट ट्रेनों को कैटेगराइज करने के लिए समिति ने कहा कि इसके लिए 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का बेंचमार्क बेहद कम है। समिति ने कहा कि 2007 से सुपरफास्ट ट्रेनों के कैटेगराइजेशन के नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अभी 55 किमी/घंटे की रफ्तार वाली ट्रेनें सुपरफास्ट मानी जाती हैं।

संसद में रिपोर्ट पेश की गई

पार्लियामेंट्री अकाउंट्स कमिटी (PAC) ने बुधवार को संसद में पेश की गई अपनी रिपोर्ट ‘भारतीय रेलवे में ट्रेन संचालन में समय की पाबंदी और यात्रा का समय’ में कहा कि RAC (कैंसलेशन के बदले आरक्षण) के तहत टिकटों के लिए पूरा किराया लेना सही नहीं है। इसमें चार्ट बनने के बाद भी टिकट धारक को बिना बर्थ की सुविधा के RAC कैटेगरी में रहना पड़ता है।

समिति ने रेलवे से ऐसे यात्रियों को आंशिक किराया वापस करने और इस संबंध में उठाए गए कदमों के बारे में उसे सूचित करने का आग्रह किया।

सुपरफास्ट कैटेगरी के नियमों में बदलाव करने का सुझाव

समिति ने भारतीय रेलवे में सुपरफास्ट ट्रेनों के नियमों की समीक्षा करने की आवश्यकता पर ध्यान देने के लिए कहा। समिति ने कहा कि मई 2007 में रेलवे ने फैसला किया था कि यदि किसी ट्रेन की ऐवरेज स्पीड दोनों अप और डाउन दिशाओं में, ब्रॉड गेज पर न्यूनतम 55 किमी प्रति घंटा और मीटर गेज पर 45 किमी प्रति घंटा है, तो उसे सुपरफास्ट (SF) ट्रेन माना जाएगा।

समिति ने कहा कि ऑडिट में पाया गया कि किसी ट्रेन को सुपरफास्ट के रूप में कैटेगराइज करने के लिए 55 किमी प्रति घंटे का बेंचमार्क ही कम है।

समिति ने कहा, 2007 से SF ट्रेनों के वर्गीकरण के मानदंडों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसके साथ ही 478 सुपरफास्ट ट्रेनों में से 123 सुपरफास्ट ट्रेनों की निर्धारित गति 55 किमी प्रति घंटे से कम है।

मंत्रालय ने कहा- स्टॉपेज देने से स्पीड कम होती है

अपने जवाब में मंत्रालय ने समिति को बताया कि सुपरफास्ट के रूप में कैटेगराइज्ड 123 ट्रेनों की सूची की जांच से पता चला कि मौजूदा आंकड़ों के अनुसार 47 ट्रेनों की गति 55 किमी प्रति घंटे से अधिक है।

जहां तक ​​55 किमी प्रति घंटे से कम स्पीड पर चलने वाली बाकी ट्रेनों की बात है, तो मंत्रालय ने कहा कि रेगुलर ऑपरेशन शुरू होने के बाद अतिरिक्त स्टॉपेज देने से कुछ ट्रेनों की औसत स्पीड पर असर पड़ा है।

समिति ने कहा- ये केवल ज्यादा किराया वसूलने के लिए किया गया

रिपोर्ट में कहा गया है, समिति इस नतीजे पर पहुंचने के लिए मजबूर है कि ट्रेनों को सुपरफास्ट के रूप में अलग करने का मकसद ज्यादा किराया वसूलना था। जब भी ट्रेनों की स्पीड कम हुई, तो भारतीय रेलवे को ट्रेन को सुपरफास्ट कैटेगरी से हटा देना चाहिए था और किराया रिवाइज करना चाहिए था।

समिति ने और क्या कहा…

  • समिति ने कहा कि 55 किमी प्रति घंटे का सुपरफास्ट बेंचमार्क बहुत पुराना और समय से पीछे है।
  • चीन और जापान जैसे देशों में ट्रेनें भारत से कहीं ज्यादा रफ्तार से चलती हैं। सुपरफास्ट ट्रेनों के कैटेगरी नियमों की दोबारा समीक्षा की जाए।
  • इन्हें ग्लोबल स्टैंडर्ड के करीब लाया जाए। सुपरफास्ट ट्रेनों की औसत गति करीब 100 किमी प्रति घंटे तय की जाए।
  • लक्ष्य यह होना चाहिए कि 2030 तक ट्रेन सिर्फ़ आखिरी स्टेशन पर नहीं, बल्कि पूरी यात्रा के दौरान लगातार 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सके।
  • नई ट्रेनों की शुरुआत से कई बार पुरानी एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों को रास्ते में रोकना पड़ता है, जिससे देरी होती है। इसलिए नई ट्रेनें शुरू करने के बजाय मंत्रालय को मौजूदा एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों को समय पर चलाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

ब्रॉड गेज और मीटर गेज क्या होते हैं?

गेज का मतलब होता है रेल की पटरियों के बीच की दूरी। पटरियों के बीच की दूरी अगर 1.676 मीटर हो तो इसे ब्रॉड गेज कहा जाता है। यह भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला गेज है।

लगभग सभी एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत ट्रेनें इसी पर चलती हैं।

वहीं, मीटर गेज में पटरियों के बीच की दूरी 1 मीटर होती है। पहले यह पहाड़ी और छोटे रूट्स पर ज्यादा इस्तेमाल होता था। इस गेज पर ट्रेनें धीमी गति से चलती हैं और वजन क्षमता कम होती है।

PAC कमेटी में 22 सांसद

पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (पीएसी) में कुल 22 सदस्य हैं। इसमें लोकसभा से 15 और राज्यसभा से 7 सांसद शामिल हैं। लोकसभा स्पीकर द्वारा अध्यक्ष चुना जाता है, जो परंपरा से विपक्ष का नेता होता है।​

कमेटी में बीजेपी-एनडीए के 13 सदस्य हैं। यह कमेटी केंद्र सरकार के खर्चों की जांच करती है।

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