MLA-तहसीलदार विवाद की विधानसभा में गूंज:बैरवा बोले- तहसीलदार न कानून मानता है, न जनप्रतिनिधियों का सम्मान करता; खुद को जमीनों का मालिक बताता है
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विधानसभा में दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा ने तहसीलदार पर आरोप लगाते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि दौसा में एक ऐसा तहसीलदार पदस्थ है, जो न कानून मानता है, न जनप्रतिनिधियों का सम्मान करता है और खुद को दौसा की जमीनों का मालिक बताता है। ऐसे अधिकारी को खुला राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है, इसलिए वह निरंकुश होकर कार्य कर रहा है। विधायक ने कहा कि दौसा में एक कार्रवाई के दौरान दो जेसीबी मशीनें मकान तोड़ रही थीं, महिलाएं और बच्चे को रो-रोकर चिल्ला रहे थे। वे मौके पर पहुंचे थे, जहां अधिकारी से जानकारी ली तो तहसीलदार सामने आए और विधायक से अभद्र भाषा में बात करते हुए खुद को दौसा की जमीनों का मालिक बताया। विधायक ने कहा कि यह लोकतंत्र का अपमान है। विधायक ने आरोप लगाया कि तहसीलदार बिना किसी पूर्व सूचना और नोटिस के कार्रवाई कर रहे है। होदायली में पांच गरीबों के मकान तोड़ दिए। आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान दो साल के मासूम 5 ताले में बंद रखा गया। यह पूरी घटना प्रशासन की संवेदनहीनता और तानाशाही रवैये को उजागर करती है। तहसीलदार को तत्काल निलंबित या बर्खास्त किया जाए। साथ ही नेता प्रतिपक्ष ने भी कार्रवाई की मांग की। यूआईटी भी सवालों के घेरे में तहसीलदार के साथ-साथ विधायक ने यूआईटी को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यूआईटी बनी जरूर है, लेकिन उसका काम धरातल पर दिखाई नहीं देता। अधिकारी-कर्मचारी लूट-खसौट में लगे हुए हैं। लोगों को अपने मकान बनाने नहीं दिए जा रहे। यूआईटी की ओर से कोई स्पष्ट आदेश नहीं होने के बावजूद तहसीलदार ने अपनी अलग टीम छोड़ रखी है, जहां से माल आता है, वहीं काम शुरू कर दिया जाता है। विधायक ने तहसीलदार पर भू-माफियाओं से मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों के कारण भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। यह सब सरकार के इशारे पर हो रहा है या सरकार जानबूझकर आंखें मूंदे बैठी है।
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