बद्रीनाथ में माइनस 15° में साधुओं की तपस्या:दो से तीन फीट बर्फ; लोक कल्याण और मोक्ष के लिए 15 साधक योग और ध्यान में लीन




उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में ऐसी बर्फीली हवाएं चल रही हैं, जो आम इंसान का हौसला तोड़ दें। शाम ढलते ही तापमान माइनस 15° सेल्सियस तक पहुंच जाता है और चारों ओर दो से तीन फीट मोटी बर्फ की चादर के बीच सन्नाटा पसरा रहता है। ऐसे कठोर हालात में 15 साधु लोक कल्याण और मोक्ष प्राप्ति के लिए योग साधना में लीन हैं। करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित बद्रीनाथ धाम इस समय पूरी तरह बर्फ से ढका हुआ है। शीतकाल के दौरान धाम में आम जनजीवन ठप रहता है और आवाजाही लगभग असंभव हो जाती है। इसके बावजूद 15 साधु-संत अपनी कुटियाओं, गुफाओं और आश्रमों में रहकर निरंतर तप कर रहे हैं। बर्फ, सन्नाटा और भयंकर ठंड भी इन साधकों के संकल्प को डिगा नहीं पाई है। 4 वर्षों से निरंतर तप कर रहे स्वामी अरसानंद
इन साधकों में स्वामी अरसानंद जी महाराज पिछले चार साल से लगातार 12 महीने बद्रीनाथ धाम में निवास कर भगवान बद्री विशाल के ध्यान में रमे हुए हैं। भीषण सर्दी और कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों के बीच भी उनकी साधना बिना रुकावट के जारी है। प्रशासन की अनुमति से ही हो रही योग साधना
ज्योतिर्मठ के उप जिलाधिकारी चन्द्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि नियमों के तहत प्रशासन की अनुमति के बाद ही शीतकाल में बद्रीनाथ धाम में रुकने की इजाजत दी जाती है। वर्तमान में 15 साधक प्रशासन की अनुमति से यहां योग और ध्यान साधना कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि साधकों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की ओर से सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। उन्हें समय पर जरूरी दवाइयां और राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। साधु-संतों का होता है विशेष मेडिकल परीक्षण
डॉ. गौतम भारद्वाज ने बताया कि शीतकाल में तपस्या करने वाले साधु-संतों का विशेष मेडिकल परीक्षण किया जाता है। इसमें ऑक्सीजन लेवल, ब्लड प्रेशर, हड्डियों की स्थिति और अन्य आवश्यक जांच शामिल होती हैं।
उन्होंने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में रहने के लिए हृदय और छाती की जांच बेहद जरूरी होती है। सभी मेडिकल जांच पूरी होने के बाद ही साधु-संतों को मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। साधु-संतों का होता है विशेष मेडिकल परीक्षण डॉ. गौतम भारद्वाज ने जानकारी देते हुए बताया कि बद्रीनाथ धाम में शीतकाल के दौरान तपस्या करने वाले साधु-संतों का विशेष मेडिकल परीक्षण किया जाता है। इस जांच में ऑक्सीजन लेवल, हड्डियों की स्थिति, ब्लड प्रेशर (बीपी) आदि की गहन जांच शामिल होती है।
उन्होंने आगे बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्र (हाई एल्टीट्यूड) में रहने के लिए मुख्य रूप से हृदय (दिल) और छाती (चेस्ट) की जांच अत्यंत आवश्यक होती है। सभी आवश्यक मेडिकल जांच पूर्ण होने के बाद साधु-संतों को मेडिकल सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है। मेडिकल सर्टिफिकेट प्राप्त करने के पश्चात ही साधु-संत शीतकालीन तपस्या के लिए अपना आवेदन प्रस्तुत करते हैं। जांच के बाद ही दी जाती है शीतकाल में रहने की अनुमति
शीतकाल में बद्रीनाथ धाम की आवाजाही पूरी तरह बाधित रहती है। ऐसे में साधु-संतों के लिए राशन और जरूरी दवाइयां पहले ही उपलब्ध करा दी जाती हैं।
बद्रीनाथ धाम में शीतकाल में ठहरने के लिए ज्योतिर्मठ तहसील प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य है। कागजातों और मेडिकल जांच के बाद ही रहने की स्वीकृति दी जाती है। सुरक्षा के लिहाज से इस दौरान सुरक्षाकर्मी भी धाम में तैनात रहते हैं। चारों युगों में स्थिर रही बद्रीनाथ की तपोभूमि
बद्रीनाथ धाम की महिमा पर प्रकाश डालते हुए पूर्व धर्माधिकारी आचार्य भुवन उनियाल ने बताया कि बद्रीनाथ एक प्राचीन तपोभूमि है, जिसका अस्तित्व चारों युगों में रहा है। शास्त्रीय प्रमाणों के अनुसार सतयुग में इसे ‘मुक्ति प्रदा’ और त्रेता युग में ‘योग सिद्धिदा’ कहा गया।
उन्होंने बताया कि द्वापर और कलियुग में भी बद्रीनाथ की महिमा बनी रही है। यह धाम आज भी योग, तप और भक्ति की प्राचीन परंपराओं को जीवित रखे हुए है। कलियुग में हरि नाम और ध्यान ही साधना का आधार भगवान बदरी विशाल की सेवा में पीढ़ियों से समर्पित पंडित राकेश डिमरी राकुड़ी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार कलियुग में भगवान की प्राप्ति का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग हरि नाम संकीर्तन और ध्यान है। उन्होंने कहा कि कलियुग में इन बर्फीली वादियों में साधु-संत केवल नाम जप और ध्यान के बल पर मोक्ष के इस द्वार पर अडिग खड़े हैं। बद्रीनाथ को कलियुग में ‘बद्रिकाश्रम’ भी कहा गया है। —————— ये खबर भी पढ़ें … हरिद्वार पहुंचीं अजित पवार की अस्थियां: VIP घाट पर तैयारियां शुरू; महाराष्ट्र में लैंडिंग के दौरान प्लेन क्रैश में हुआ था निधन महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार की अस्थियां उत्तराखंड पहुंच गई हैं। हरिद्वार स्थित वीआईपी घाट पर अभी फिलहाल विसर्जन से पहले की तैयारियां और पूजा की जा रही है। इस दौरान एनसीपी के कई नेता यहां पर मौजूद हैं, हालांकि परिवार से कोई सदस्य हैं या नहीं इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। (पढ़ें पूरी खबर)



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