-झुंझुनूं और उदयपुरवाटी के वकील आमने-सामने:जिला मुख्यालय पर तीन दिवसीय कार्य बहिष्कार,कलेक्ट्रेट पर धरने पर बैठे झुंझुनूं के अधिवक्ताठप रहा न्यायिक कार्य
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जिले के राजस्व मामलों के क्षेत्राधिकार को लेकर उदयपुरवाटी और झुंझुनूं के वकीलों के बीच विवाद गहरा गया है। गुढ़ागौड़जी तहसील के राजस्व प्रकरणों को उदयपुरवाटी स्थानांतरित करने की मांग के विरोध में जिला अभिभाषक संस्था झुंझुनूं ने मोर्चा खोल दिया है। संस्था के आह्वान पर जिले के वकीलों ने तीन दिवसीय स्वैच्छिक कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया है, जिससे कलेक्ट्रेट और अदालतों में सन्नाटा पसरा रहा। क्या है मुख्य विवाद वर्तमान में गुढ़ागौड़जी तहसील क्षेत्र की पंचायतों के राजस्व मामले एसीएम (ACM) व एसडीएम (SDM) झुंझुनूं न्यायालयों में विचाराधीन हैं। उदयपुरवाटी अभिभाषक संघ मांग कर रहा है कि इन मामलों को उदयपुरवाटी उपखंड में स्थानांतरित किया जाए। इसी मांग के विरोध में झुंझुनूं के वकील लामबंद हो गए हैं। अध्यक्ष व सचिव का पक्ष: “जनता की सुविधा सर्वोपरि” जिला अभिभाषक संस्था के अध्यक्ष रतन मोरवाल ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था जनता की सुविधा के अनुरूप है। गुढ़ागौड़जी क्षेत्र के मामले पहले से ही झुंझुनूं में सुचारू रूप से चल रहे हैं। झुंझुनूं जिला मुख्यालय होने के कारण यहां आवागमन और प्रशासनिक पहुंच आसान है। संस्था के सचिव ने महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि गुढ़ागौड़जी तहसील की अधिकांश ग्राम पंचायतों के प्रशासकों ने लिखित में जिला अभिभाषक संस्था को अपनी सहमति दी है। उन्होंने आग्रह किया है कि उन्हें झुंझुनूं मुख्यालय के साथ ही रखा जाए। सचिव के अनुसार, उदयपुरवाटी बार की मांग जनता के हितों के पूरी तरह विपरीत है। सूने रहे चेम्बर, परेशान रही जनता कार्य बहिष्कार के चलते झुंझुनूं कलेक्ट्रेट परिसर और न्यायिक अधिकारियों के कक्षों में सन्नाटा छाया रहा। वकीलों के धरने पर बैठने और चेम्बरों के खाली रहने के कारण दूर-दराज से आए पक्षकारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। तारीख लेकर आए ग्रामीणों को बिना किसी कार्यवाही के वापस लौटना पड़ा। आंदोलन तेज करने की चेतावनी अभिभाषक संस्था ने स्पष्ट कर दिया है कि यह तीन दिवसीय बहिष्कार केवल एक शुरुआत है। यदि उदयपुरवाटी बार के दबाव में प्रशासन ने कोई जनविरोधी निर्णय लिया, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
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