जल जीवन मिशन का हाल बेहाल:प्रदेश के 42% स्कूलों में नल से जल नहीं; जोधपुर में 95% तो जयपुर में 81% वंचित




केंद्र सरकार की ‘जल जीवन मिशन’ और ‘हर घर जल’ योजनाओं के व्यापक दावों के बावजूद राजस्थान के सरकारी स्कूलों में नल से जल आपूर्ति की स्थिति गंभीर बनी हुई है। देशभर के स्कूलों के आंकड़ों की तुलना में राजस्थान न केवल राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है, बल्कि कई राज्यों के मुकाबले बेहद कमजोर स्थिति में खड़ा है। प्रदेश के 42% स्कूलों में नल से जल सप्लाई हो रही है। हालांकि, चूरू एक मात्र जिला है, जहां 100% स्कूलों में नल से जल आपूर्ति होती है। वहीं, जोधपुर जैसे बड़े जिले में यह आंकड़ा सिर्फ 5.19% है। राजधानी जयपुर की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां केवल 18.72% स्कूलों में ही नल का पानी उपलब्ध है। उदयपुर में 5,049 स्कूल हैं, जिनमें से 2,108 में ही टैप नल से जल की सप्लाई है। जिले के 41.75 प्रतिशत स्कूलों में नल से जल की सप्लाई है। इस तरह, अलवर, अजमेर, बाड़मेर, नागौर और करौली जैसे जिलों में आधे से भी कम स्कूलों में टैप वाटर सप्लाई है, जो शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों मोर्चों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। हकीकत : देश में 89% स्कूलों में नल से जल की आपूर्ति​, राजस्थान में मात्र 57% देशभर में कुल 10,30,271 स्कूलों में से 9,23,297 स्कूलों (89.62%) में नल का पानी उपलब्ध है। इसके मुकाबले राजस्थान के 99,737 स्कूलों में से केवल 57,601 स्कूलों में ही टैप वाटर सप्लाई है। यानी राज्य में 42,136 स्कूल (58%) अब भी बिना नल जल आपूर्ति के संचालित हो रहे हैं। राजस्थान का कवरेज 57.75% है, जो राष्ट्रीय औसत से करीब 32% अंक कम है। केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन योजना की शुरुआत 15 अगस्त 2019 को किया। स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को अक्टूबर 2020 में शामिल किया गया। इसका उद्देश्य स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में नल से पेयजल उपलब्ध कराना था। चिंता : बच्चों की सेहत और शिक्षा पर पड़ रहा असर साफ पेयजल की कमी का सीधा असर बच्चों की सेहत, स्वच्छता, मिड-डे मील व्यवस्था और विशेष रूप से बालिकाओं की उपस्थिति पर पड़ता है। बिना पानी के शौचालय, हाथ धोने और स्वच्छता से जुड़ी बुनियादी व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं।



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