जयपुर में सुसाइड-नोट लिखकर सस्पेंड लेक्चरार ट्रेन के आगे कूदा:लिखा- मैं मरा नहीं हूं, पुलिस ने मेरी इरादतन हत्या की है




जयपुर में सस्पेंड चल रहे एक लेक्चरार ने बुधवार शाम ट्रेन के आगे कूदकर सुसाइड कर लिया। मरने से पहले सस्पेंड लेक्चरार ने सुसाइड नोट भी लिखा। जिसमें लिखा- मैं मरा नहीं हूं, पुलिस ने मेरी इरादतन हत्या की है। महेश नगर थाना पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव को SMS हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाया है। पुलिस ने बताया- मृतक मनोहर लाल भादू मूलत: जालोर के सांचौर के रहने वाले थे। लेक्चरार मनोहर लाल सस्पेंड होने के बाद लंबे समय से महेश नगर में किराए से रह​कर दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। बुधवार शाम उन्होंने अर्जुन नगर रेलवे फाटक के पास ट्रेन के आगे छलांग लगाकर सुसाइड कर लिया। सुसाइड की सूचना पर महेश नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव को SMS हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी भिजवाया। हादसे के कुछ देर बाद मनोहर के दोस्तों ने उनके द्वारा भेजे गए सुसाइड नोट को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जिसमें लिखा है कि ‘मैं मरा नही हूं, क्योंकि पुलिस ने मेरी इरादतन हत्या कर डाली। सुसाइड नोट में लिखा एसओजी के जोशीले तेवर ने मुझे में उस भट्टी में डाल दिया, जहां नित-रोज के खुलासे हो रहे थे, लेकिन मैं इन मामलों में इतना शरीक नहीं था। साल-2022 या उससे पहले की कुछ गलतियां थी। अजमेर एसओजी में दर्ज FIR में मेरा कोई नाम नहीं था। उक्त मामले में रमेश अरेस्ट ​हुआ और चालान में भी मेरा कोई जिक्र नहीं था। उस वक्त के जांच अधिकारी मुकेश सोनी ने मेरा 6-7 जनों से मेरे में पूछताछ करता था कि मेरे पास कितने पैसे है, मेरे से रुपए ऐंठने की खूब कोशिश की। कुछ समय बाद उसका ट्रांसफर हो गया और एक साल के लिए मामला बंद हो गया। इसके बाद एक मामले में जैसे ही दिनेश कुमार गिरफ्तार हुआ तो मुझे शामिल कर लिया। उस वक्त जांच अधिकारी एएसपी श्याम सुंदर बिश्नोई था। जिसे पूर्व जांच अधिकारी मुकेश सोनी ने कॉल करके बोला कि इस मामले में मनोहर भादू के अलावा किसी का नाम मत डालना, उसको 4 मामलों में आप घसीट सकते हो, उससे डरा धमकाकर कुछ भी करवा सकते हो। इसके बाद श्याम सुंदर ने 2 और मामलों मे नाम डलवाया। पहली बार मुझे जब मेरी खुद की एग्जाम देते पकड़ा था। तब लेकर तीन चार्जशीट में आरोप बना दिया। मुझे बाहर से उठाकर मुल्जिम बनाया गया।
दोस्तो से कहा…परिवार की मदद करना मनोहर ने सुसाइड नोट में लिखा है कि हाथ कांप रहें है, लेखनी ठहर रही है या कलम की स्याही खत्म हो रही है, वो ईश्वर जानता है। मैं मेरे घर के 20 सदस्यों मे अकेला था, जो सबको लेकर चलता था। मै इतना कमजोर ही नहीं हूं, लेकिन गलत तरीके से लगे आरोप सहन नही हो रहे। बाकी आरोप तो पहले भी थे। लेकिन उनसे मैं नहीं मरा। कोर्ट में तारीखों पर जा रहा था, लेकिन खर्चे बहुत लग रहे थे। 4 साल से दोस्तों से उधार लेकर जीवन यापन कर रहा हूं। बता दें कि मनोहर लाल के तीन बच्चे हैं, जो गांव में पत्नी के साथ रहते हैं। SHO (महेश नगर) सुरेश यादव का कहना है कि शव को SMS अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवा दिया है। मृतक के पास से कुछ नहीं मिला, जांच कर रहे हैं। अभी हमारे पास कोई सुसाइड नोट नहीं आया हैं, वायरल सुसाइड नोट के संबंध में जांच हो रही है।



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