गेहूं–सरसों के साथ अफीम भी बर्बाद:विधानसभा में विधायक कृपलानी ने उठाया किसानों को मुआवजा देने का मुद्दा, बोले – गिरदावरी जल्दी करवाया जाए




चित्तौड़गढ़ जिले की निंबाहेड़ा विधानसभा से विधायक श्रीचंद कृपलानी ने गुरुवार को विधानसभा में चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिलों में हाल ही में हुई अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से किसानों को हुए भारी नुकसान का मुद्दा मजबूती से उठाया। जैसे ही उनका नाम पुकारा गया, सदन में मौजूद विधायकों ने डेस्क बजाकर उनका स्वागत किया। अचानक हुए इस सम्मान से विधायक खुद भी कुछ देर के लिए चौंक गए। उन्हें लगा कि शायद ओलावृष्टि के मुद्दे पर बोलने की वजह से तालियां बजाई जा रही हैं, लेकिन बाद में सदन ने स्पष्ट किया कि यह उनका सम्मान था। इस आत्मीय माहौल के बीच विधायक कृपलानी ने किसानों की पीड़ा को बेहद सरल और भावनात्मक शब्दों में सदन के सामने रखा। अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से रबी और अफीम की फसल चौपट विधायक श्रीचंद कृपलानी ने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों में उनके विधानसभा क्षेत्र सहित चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिलों के कई हिस्सों में भारी बारिश और ओलावृष्टि हुई है। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से रबी की फसलें, खास कर से गेहूं और सरसों, को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही अफीम की खेती करने वाले किसानों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। उन्होंने कहा कि कई जगह अफीम की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। खेतों में खड़ी फसलें बारिश और ओलों की चपेट में आकर बर्बाद हो गईं, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत मिट्टी में मिल गई। अफीम किसानों को पट्टे खाने का खतरा श्रीचंद कृपलानी ने अफीम किसानों की स्थिति को लेकर खास चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के पास अफीम का पट्टा होता है, वे खुद को आर्थिक रूप से सुरक्षित मानते हैं। कई किसानों के लिए यह पट्टा केवल एक साल की खेती नहीं, बल्कि पूरे जीवन की आजीविका का आधार होता है। लेकिन जब अफीम की फसल बोने के बाद और खड़ी होने के बाद प्राकृतिक आपदा में नष्ट हो जाती है, तो किसान को गहरा मानसिक और आर्थिक आघात पहुंचता है। उन्होंने बताया कि अगर तय औसत मात्रा में अफीम की आपूर्ति नहीं हो पाती, तो नारकोटिक्स विभाग द्वारा किसानों का पट्टा कटने का खतरा रहता है, जो उनके लिए जीवनभर का नुकसान साबित हो सकता है। कई गांवों में हुआ नुकसान विधायक ने सदन में अपने क्षेत्र के कई गांवों का जिक्र करते हुए कहा कि निमोदा, सरसी, बांगेड़ा, मेलाना, कनेरा घाटा जैसे अनेक गांवों में ओलावृष्टि से भारी तबाही हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि आसपास के इलाकों, यहां तक कि जहाजपुर क्षेत्र में भी ओलावृष्टि की खबरें सामने आई हैं। कई जगहों पर खेतों में अफीम की फसल आधी से ज्यादा नष्ट हो चुकी है, तो कहीं पूरी तरह खत्म हो गई है। रबी की अन्य फसलें भी इस आपदा से अछूती नहीं रहीं। किसानों के चेहरे पर चिंता और निराशा साफ दिखाई दे रही है। सरकार से तुरंत गिरदावरी और मुआवजे की मांग श्रीचंद कृपलानी ने सरकार से मांग की कि जिन-जिन क्षेत्रों में फसलों का नुकसान हुआ है, वहां तुरंत गिरदावरी करवाई जाए। उन्होंने कहा कि सही और समय पर गिरदावरी होने से ही किसानों को वास्तविक नुकसान का मुआवजा मिल सकता है। गेहूं, सरसों और अफीम जैसी फसलों में हुए नुकसान का आकलन कर किसानों को शीघ्र राहत दी जानी चाहिए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें। विधायक ने जोर देकर कहा कि मुआवजा किसानों का अधिकार है और इसमें किसी भी तरह की देरी उनकी परेशानियों को और बढ़ा देगी। पिछली ओलावृष्टि का अधूरा मुआवजा भी मुद्दा विधायक ने यह भी याद दिलाया कि पिछली बार हुई ओलावृष्टि और फसल नुकसान के बाद कई जगहों पर किसानों को अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिल पाया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पुराने मामलों पर भी ध्यान दिया जाए और जिन किसानों का मुआवजा रह गया है, उन्हें भी जल्द राहत दी जाए। उन्होंने भरोसा जताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार संवेदनशील है और किसानों के दर्द को समझते हुए उचित कदम उठाएगी। नारकोटिक्स विभाग को सूचना देना जरूरी अफीम की खेती से जुड़े विशेष नियमों का जिक्र करते हुए श्रीचंद कृपलानी ने कहा कि यह खेती भारत सरकार के नारकोटिक्स विभाग के अंतर्गत आती है। ऐसे में फसल नुकसान की जानकारी केवल राज्य सरकार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि नारकोटिक्स विभाग तक भी पहुंचनी चाहिए। यदि समय पर सही रिपोर्ट भेजी जाती है, तो किसानों के पट्टे सुरक्षित रहेंगे और उन्हें अतिरिक्त परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों पर समन्वय बनाकर किसानों को राहत दी जाए।



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