सिंगल ऑर्डर से निरस्त हो रहे ट्रांसफर:सत्ता से जुड़े शिक्षक राहत के इंतजार में, व्याख्याता की संशोधन सूची एसआईआर-चुनाव में उलझी




9 और 10 जनवरी को आई लेक्चरर ट्रांसफर सूची के बाद अब सिंगल ऑर्डर से ट्रांसफर निरस्त हो रहे हैं। भाजपा और संघ के तमाम नेताओं की डिजायर ट्रांसफर में काम नहीं आई। यही वजह है कि लेक्चरर सूची के लिए जयपुर शिक्षा मंत्रालय में डिजायरों का ढेर लग गया है मगर संशोधन सूची आएगी या नहीं, इस पर अभी भी सवाल बना हुआ है। सबसे ज्यादा तकलीफ उन संघ के लोगों को हो रही जो इस सरकार में राहत की उम्मीद लगाए थे मगर सबसे ज्यादा परेशानी भी इसी विचारधारा के शिक्षकों को रही है। दरअसल 10 जनवरी को लेक्चरर की जो लंबी सूची आई तो 11 जनवरी से ही सिंगल ऑर्डर से लेक्चरर के ट्रांसफर ऑर्डर निरस्त करने का खेल शुरू हो गया। पूर्वी राजस्थान के ही एक शिक्षक के ट्रांसफर ऑर्डर निरस्त कर शुरुआत हुई। उसके बाद गुप-चुप तरीके से कई और ट्रांसफर हुए शिक्षकों को राहत दी गई। इसमें ये भी नहीं कहा जा सकता कि एसआईआर में ड्यूटी थी क्योंकि एसआईआर ड्यूटी वाले शिक्षक कोई एक, दो या 10-20 नहीं बल्कि सवा सौ से ज्यादा हैं। उनके लिए एक कॉमन ऑर्डर शिक्षा विभाग ने ही निकाला था कि जिस शिक्षक की ड्यूटी एसआईआर में है और उसका अगर स्थानांतरण हो गया तो वह न तो रिलीव होगा और अगर रिलीव हो गया तो वापस उसी जगह काम करेगा जहां पहले था। इसके लिए शिक्षा विभाग ने अलग-अलग ऑर्डर निकालने का रास्ता बंद कर दिया था। संघ पृष्ठभूमि वाले जिन शिक्षकों का संशोधन सूची का इंतजार है उनके सामने समस्या है कि अगर ज्वाइन नहीं किया तो छुट्टियां खराब होंगी और ज्वाइन कर लिया तो वापस ट्रांसफर होना मुश्किल होगा। संघ से पैरवी होने के बाद भी प्रदेश के 40 से ज्यादा शिक्षकों को उनकी शिक्षा के विपरीत ट्रांसफर किया गया। कुछ को मर्जी के खिलाफ यथावत रखा गया। वो भी संघ की मौजूदा टीम की महत्वपूर्ण कड़ी भी हैं। संशोधन सूची पर असमंजस इसलिए प्रिंसिपल के ट्रांसफर हुए और उसके बाद दो बार संशोधन सूची आई। लेक्चरर के ट्रांसफर हुए तो अब संशोधन सूची पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक लेक्चरर के ट्रांसफर चुनाव आयोग की इच्छा के विपरीत हुए। ट्रांसफर होने पर आयोग ने सख्त लहजा अपनाया था इसलिए मंत्रालय ने हाथ समेट लिए। दूसरी ओर वर्तमान में विधानसभा चल रही इसलिए सूची की संभावना कम है। इसके बाद पंचायत और निकाय चुनाव होंगे। हालांकि 14 फरवरी से चुनाव की आचार संहिता लागू होने तक सरकार के पास संशोधन सूची का समय होगा। सूत्र बताते हैं कि मंत्रालय पर दबाव ज्यादा है इसलिए एक छोटी सूची के आने की संभावना है मगर चुनाव तक सूची नहीं आई तो मई तक फिर सूची की संभावना नहीं होगी। सीएमओ से मंजूरी तभी सूची संभव इस साल बार शिक्षा मंत्रालय को ट्रांसफर के मामले में खुली छूट नहीं मिली। इससे पूर्व शिक्षा मंत्री अपने हिसाब से ट्रांसफर पोस्टिंग करते थे मगर इस सरकार में सूची पहले सीएमओ जाएगी। वहां उसका परीक्षण होगा। उसके बाद ही सूची जारी होती है। इसी वजह से लेक्चरर सूची दो महीने से सीएमओ में पेंडिंग रही। इसलिए संशोधन सूची पर सस्पेंस बरकरार है। ज्यादातर परेशान भी शिक्षक भाजपा और संघ से जुड़े हैं। निकाय-पंचायत चुनाव के बाद सेकंड ग्रेड पर होगा काम शिक्षा विभाग के अब ट्रांसफर मामले में सेकंड ग्रेड और थर्ड ग्रेड के ट्रांसफर का दबाव है। थर्ड ग्रेड के ट्रांसफर पॉलिसी में अटके हैं मगर सेकंड ग्रेड के ट्रांसफर होना तय है। निकाय और पंचायत चुनाव के बाद भारी-भरकम सूची आने की संभावना है। बीते दिसंबर में इस सूची पर प्राइमरी काम हो चुका है। एक बार और टीम को जयपुर बुलाया जाएगा। इस सूची में वो लोग मंत्रालय के निशाने पर होंगे जिन्होंने कांग्रेस कार्यकाल में जानबूझकर संघ पृष्ठभूमि के शिक्षकों के ट्रांसफर उनको सजा के तौर पर किए थे। “मेरे ध्यान में नहीं है पर हां, कुछ चुनाव के कारण निरस्त किए गए हैं। संशोधन सूची पर अभी कुछ नहीं कह सकता। सीएम से सहमति होने पर आएगी सूची।” -मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री इधर…मंत्री की धमकी बेअसर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बीकानेर में शिक्षा निदेशालय (प्रारंभिक एवं माध्यमिक) में 5 साल से अधिक समय से जमे स्टाफ को तत्काल हटाने के निर्देश कई महीने पहले दिए थे मगर शिक्षा निदेशालय में बने कॉकस के आगे मंत्री के आदेश भी हवा हो रहे हैं। निदेशालय में 80 प्रतिशत स्टाफ 5 साल से ऊपर का है। कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने पूरी नौकरी ही निदेशालय में कर ली। कुछ 10 से 20 साल से यहीं जमे हैं। ज्यादातर स्टाफ कांग्रेस पृष्ठभूमि या कांग्रेस नेताओं की सिफारिश पर यहां आए थे। रिटायर हो गए बावजूद इसके अभी भी यहां वे संविदा के तौर पर काम कर रहे। शिक्षा सचिव और शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों की शह भी है। विभाग की बड़ी खरीदारी में भी उनकी महती भूमिका रखी जा रही है।



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