'शिक्षा संस्थानों पर आरएसएस से जुड़े लोगों का कब्जा':शांति धारीवाल बोले, स्कूल बैग और यूनिफॉर्म की राशि घटाना छात्रों से अन्याय
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राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कोटा उत्तर विधायक व पूर्व मंत्री शांति धारीवाल ने भजनलाल सरकार पर शिक्षा, कौशल विकास, सड़क, ऊर्जा, किसान, मनरेगा, इतिहास और धार्मिक योजनाओं को लेकर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का दस्तावेज होता है, लेकिन इसमें प्रदेश के विकास का कोई स्पष्ट विजन नजर नहीं आता।
धारीवाल ने कहा कि आज कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी तक शिक्षा संस्थानों पर आरएसएस से जुड़े लोगों का कब्जा है। हालात यह हैं कि पूरा शैक्षणिक सत्र निकल गया, लेकिन कई जगह छात्रों को अब तक प्रवेश नहीं मिला। उन्होंने बताया कि 2025-26 में निजी स्कूलों को आरटीई के तहत 996 करोड़ रूपए का भुगतान दिखाया गया, लेकिन इसमें 740 करोड़ रूपए पिछले साल का बकाया था। यानी इस साल वास्तविक भुगतान सिर्फ 256 करोड़ हुआ, इसी कारण निजी स्कूल आरटीई बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं। उन्होंने स्कूल बैग और यूनिफॉर्म की राशि 1000 रूपए से घटाकर 800 रूपए करने को गरीब छात्रों के साथ अन्याय बताया। धारीवाल ने कहा कि मनरेगा में ग्राम सभा को अपने क्षेत्र के काम तय करने का अधिकार था, जिसे छीनकर केंद्र सरकार ने अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने कहा, नाथूराम गोडसे ने गांधी को शरीर से हटाया, आपने गांधी के नाम हटाने की शुरुआत कर दी। लेकिन नाम हटाने से उस महात्मा का नाम दुनिया के दिलों से नहीं हटेगा।
धारीवाल ने कहा कि मंत्री दीया कुमारी द्वारा बताए गए सड़क निर्माण के आंकड़े PWD की अपनी रिपोर्ट से मेल नहीं खाते। कैपिटल एक्सपेंडिचर को लगातार घटाया गया। ऊर्जा क्षेत्र में 3500 करोड़ खर्च होने थे, लेकिन सिर्फ 817 करोड़ ही खर्च किए गए। कई जीएसएस की घोषणाएं हुईं, लेकिन अधिकांश जमीन पर नहीं उतरीं।सैकड़ों मंदिरों के विकास की घोषणाएं की गईं, लेकिन पर्यटन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, आपने अखबारों में अपनी फोटो और विज्ञापनों पर 100 करोड़ खर्च कर दिए, लेकिन मंदिरों के विकास के नाम पर जीरो। आप तो भगवान को भी धोखा दे रहे हो। उन्होंने आमेर किले में लगे अकबर-स्तुति शिलालेख का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सरकार इतिहास बदलने की कोशिश कर रही है, तो यह हिस्सा क्यों बचा हुआ है? ऐतिहासिक चीजें सही-गलत की श्रेणी में नहीं आतीं। धारीवाल ने कहा कि यह सरकार नाम बदलने को उपलब्धि मान रही है, जबकि गरीब, युवा, किसान और मजदूर की भलाई के लिए कोई ठोस काम नहीं किया गया।
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