शब्बे बारात के मौके पर खुदा की बारगाह में सज्दा-ए-अकीदत पेश कर गुनाहों से तौबा की



शब्बे-बारात के मुबारक मौके पर शहर की जामा मस्जिद में अकीदत, इबादत और रूहानियत का अनूठा नजारा देखने को मिला। इस पाक रात में हजारों की तादाद में मोमीन भाईयों ने शिरकत कर खुदा की बारगाह में सज्दा-ए-अकीदत पेश किया। मस्जिद परिसर में देर शाम से ही रोजेदारों और नमा​िजयों का आना-जाना शुरू हो गया। मोमीन भाईयों ने शब्बे-बारात की रात को खास अहमियत देते हुए देर रात तक नफील नमाजें अदा की और कुरआन की तिलावत में मशगूल रहे। इस दौरान मुल्क की खुशहाली, अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, समाज में मोहब्बत और इंसानियत के लिए खास दुआएं की गई। पूरी मस्जिद या अल्लाह की सदाओं से गूंज उठी। कार्यक्रम में गुजरात के कांडला पोर्ट के मुख्य मुकर्रर मौलाना सिद्दीक सिद्दीकी ने शब्बे-बारात के फजाइल और महत्व पर विस्तार से रोशनी डालते हुए शब्ब ए बारात को तकदीर बदलने वाली रात बताया। मौलाना सिद्दीकी ने कहा कि शब्बे-बारात रहमत, मगफिरत और निजात की रात है, जिसमें अल्लाह तआला अपने बंदों की दुआएं कुबूल फरमाता है। उन्होंने लोगों से गुनाहों से तौबा कर नेक अमल की राह पर चलने की अपील की। इस अवसर पर जामा मस्जिद के पेश इमाम हाजी लाल मोहम्मद सिद्दीकी ने नात-ए-पाक पेश कर मोमीनों के दिलों को छू लिया और माहौल को और भी खुशनुमा व रूहानी बना दिया। नात के दौरान बड़ी संख्या में लोग झूमते हुए नजर आए। कार्यक्रम में मौलाना मुख्तियार अशफाकी, मौलाना उर्स सिद्दीकी, मौलाना निजामुद्दीन, मौलाना आमीन, दावते इस्लामी के बरकत अली व मोजीन कारी अलीम ने शब्बे-बारात की फजीलत पर अपने बयानात पेश कर इस्लाम में इबादत, सब्र, तकवा और इंसानियत की अहमियत पर जोर दिया। इस दौरान दौरान मुस्लिम इंतजामिया कमेटी के सदर हाजी गुलामनबी तेली, नायब सदर मुख्तियार नियारगर, सचिव अबरार मोहम्मद व खजांची मोहम्मद इलियास तेली ने शब्ब ए बारात की मोमीन भाईयों को मुबारकबाद पेश की। इस दौरान मुस्लिम इंतजामिया कमेटी की ओर से कांडला पोर्ट गुजरात से आए मुख्य मुकर्रर मौलाना सिद्दीकी सहित स्थानीय उलेमाओं का गुलपोशी कर सम्मान बहुमान किया। इस दौरान कमेटी के सदर हाजी गुलामनबी तेली, पूर्व सदर हाजी असलम खान तंवर, नायब सदर मुख्तियार नियारगर, सचिव अबरार मोहम्मद, खजांची मोहम्मद इलियास तेली, पूर्व प्रचार मंत्री शाह मोहम्मद सिपाही, जाकिर हुसैन, हाजी अयूब तेली, हाजी यासीन राठौड़, हाजी अल्फाज लोहार, बच्चू खान कुम्हार, मास्टर बहादुर अली शीपा मौजूद रहे।



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