जांच में अमानक मिले खाद्य पदार्थ, अब प्रकरण बनाया
आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण जयपुर टी शुभ मंगला एवं जिला कलेक्टर बाड़मेर टीना डाबी के निर्देशन में शुद्ध आहार मिलावट पर वार अभियान के तहत कार्यवाही लगातार जारी है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार जांगिड़ की ओर से फर्म मैसर्स जनता जोधपुर स्वीट्स धोरीमन्ना से खाद्य पदार्थ मावा बर्फी मिठाई, फर्म मैसर्स श्री मां भवानी बीकानेर स्वीट होम सेड़वा से खाद्य पदार्थ मिल्क केक मिठाई, फर्म मैसर्स रामदेव भोजनालय और दाल बाटी चूरमा बाड़मेर से खाद्य पदार्थ दही, फर्म मैसर्स कमलेश दूध डेयरी रोहिल्ला धोरीमन्ना से खाद्य पदार्थ गाय का दूध, फर्म मैसर्स सुनील कुमार रामलाल माहेश्वरी बाड़मेर से खाद्य पदार्थ लाल मिर्च पाउडर लूज, फर्म मैसर्स महावीर सेल्स कॉरपोरेशन बाड़मेर से खाद्य पदार्थ घी ब्रांड वास्तु के दो व घी ब्रांड सोनेरी उक्त फर्मों से नमूने वास्ते जांच के लिए गए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विष्णुराम बिश्नोई ने बताया किनमूनों को वास्ते जांच के लिए लैब भेजे गए थे। लैब की जांच रिपोर्ट में उक्त नमूने अमानक स्तर के पाए गए थे। खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार जांगिड़ की ओर से प्रकरणों में अनुसंधान पूर्ण कर न्याय निर्णयन अधिकारी एवं अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट बाड़मेर के समक्ष प्रस्तुत किए गए। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में अमानक पाए गए मावा बर्फी, मिल्क केक, दही, दूध, लाल मिर्च पाउडर एवं घी जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो सकता है। इनमें मिलावट होने पर फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त, पेट दर्द, लिवर और किडनी पर असर पड़ सकता है। सिंथेटिक दूध या खराब गुणवत्ता वाले दुग्ध उत्पादों से आंतों में संक्रमण, एलर्जी, बच्चों में पाचन संबंधी समस्याएं और इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है। मिलावटी घी में ट्रांस फैट या केमिकल तत्व होने से हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना और लंबे समय में कैंसर का खतरा भी रहता है। इसमें रंग या ईंट पाउडर जैसी मिलावट से पेट में जलन, गैस, एसिडिटी, आंखों व त्वचा में एलर्जी की शिकायत हो सकती है।
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