चित्तौड़गढ़ बीजेपी में 16 दिन में उलटफेर, नगर अध्यक्ष बदला:सुदर्शन रामपुरिया की जगह गौरव त्यागी की एंट्री, समर्थकों में जश्न का माहौल




चित्तौड़गढ़ में भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में महज 16 दिनों के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नगर मंडल अध्यक्ष को बदलने के फैसले ने एक बार फिर पार्टी के भीतर चल रही विधायक आक्या टीम और सांसद सीपी जोशी टीम के बीच मतभेदों की चर्चाओं को हवा दे दी है। लंबे इंतजार के बाद 18 जनवरी को चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र के छह मंडल अध्यक्षों की घोषणा की गई थी। उस समय नगर मंडल अध्यक्ष के रूप में सुदर्शन रामपुरिया को जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन अब अचानक उन्हें हटाकर गौरव त्यागी को नगर मंडल अध्यक्ष बना दिया गया है। इस फैसले के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 18 जनवरी को घोषित हुए थे छह मंडल अध्यक्ष 18 जनवरी को घोषित सूची में चित्तौड़गढ़ मंडल अध्यक्ष सुदर्शन रामपुरिया, बस्सी मंडल अध्यक्ष भंवर सिंह, घोसुंडा मंडल अध्यक्ष लालचंद गुर्जर, चंदेरिया मंडल अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़, सावा मंडल अध्यक्ष अनिल सुखवाल और भदेसर मंडल अध्यक्ष हीरालाल रायका को बनाया गया था। इन नामों को लेकर पार्टी के भीतर यह चर्चा आम रही कि इनमें से अधिकांश आक्या टीम से जुड़े हुए हैं। इसी कारण सांसद सीपी जोशी गुट में नाराजगी देखने को मिली। खासतौर पर नगर मंडल अध्यक्ष के नाम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। नगर अध्यक्ष पद को लेकर पहले से थी अनिश्चितता हालांकि सूची जारी होने के बाद भी नगर मंडल अध्यक्ष के पद को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। पिछले दिनों प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और चित्तौड़गढ़ भाजपा जिला अध्यक्ष रतन गाडरी ने नगर अध्यक्ष के पद को होल्ड पर बताया था। इससे यह संकेत मिल गया था कि इस पद पर बदलाव संभव है। आखिरकार मंगलवार देर रात अचानक फैसला लिया गया और नगर मंडल अध्यक्ष को बदलकर नया नाम घोषित कर दिया गया। सुदर्शन रामपुरिया की जगह गौरव त्यागी को जिम्मेदारी आक्या टीम से जुड़े सुदर्शन रामपुरिया को हटाकर सांसद सीपी जोशी टीम के माने जाने वाले गौरव त्यागी को नगर मंडल अध्यक्ष बनाया गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार इस फैसले के पीछे दोनों गुटों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश रही है। बताया जा रहा है कि दबाव की स्थिति को देखते हुए जिला अध्यक्ष रतन गाडरी को यह फैसला लेना पड़ा। हालांकि यह भी सामने आया है कि विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने भी गौरव त्यागी के नाम पर सहमति जता दी थी, जिसके बाद ही यह बदलाव संभव हो पाया। संगठन में मिलीजुली प्रतिक्रिया नगर मंडल अध्यक्ष के रूप में नए चेहरे की नियुक्ति के बाद से ही संगठन के भीतर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही थी। कई कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी दिखी। उनका कहना था कि सालों से जो संगठन के लिए लगातार और निस्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं, लेकिन जब पद देने की बात आती है तो नए चेहरे को मौका मिल जाता है। अब जब दुबारा फैसले के बाद गौरव त्यागी को पद मिला तो कार्यकर्ताओं का कहना है कि गौरव त्यागी की युवाओं के बीच अच्छी पकड़ है और संगठन को मजबूत करने के लिए वे एक बेहतर विकल्प हैं। गौरव त्यागी की राजनीतिक पृष्ठभूमि गौरव त्यागी का जन्म 21 दिसंबर 1980 को हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली और कॉलेज की शिक्षा चित्तौड़गढ़ में ही पूरी की। बीए और एमए की पढ़ाई के बाद उन्होंने मंदसौर से एलएलबी किया। छात्र राजनीति के समय से ही वे सक्रिय रहे हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में उन्होंने नगर मंत्री, जिला विद्यालय प्रमुख और जिला सह प्रमुख जैसे जरूरी पदों पर काम किया। इसके बाद वे भारतीय जनता युवा मोर्चा में जिला महामंत्री, नगर अध्यक्ष और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भी रहे। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने विधानसभा संयोजक की जिम्मेदारी भी निभाई थी। मतभेद भुलाकर साथ काम करने पर जोर वहीं बताया जा रहा है कि जिला अध्यक्ष रतन गाडरी ने दोनों गुटों को साथ लाने के लिए यह फैसला किया है। उनका मानना है कि राजनीति में काम करते समय कभी-कभार मतभेद हो जाते हैं, लेकिन संगठन के हित में सभी मतभेद भुलाकर आगे बढ़ना पड़ता है। अपने व्यक्तिगत हित से ऊपर संगठन को रखना जरूरी होता है और इसी सोच के तहत कभी-कभी फैसले बदलने पड़ते हैं। जैन समाज को साधने की कोशिश, रामपुरिया को नई जिम्मेदारी पार्टी यह भी समझती है कि सुदर्शन रामपुरिया को अचानक हटाने से जैन समाज में नाराजगी पैदा हो सकती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें जिला कार्यकारिणी में जिला उपाध्यक्ष का पद दिया गया है। यह एक तरह से डेमेज कंट्रोल माना जा रहा हैं। आने वाले नगर निगम और पंचायती राज चुनावों में किस नेता की भूमिका कितनी प्रभावी रहती है, यह आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल आगामी चुनाव से पहले बीजेपी संगठन अपने किसी नेता को नाराज नहीं कर सकती। नगर निगम और पंचायती राज चुनाव में मंडल अध्यक्षों का खास रोल रहता है। ऐसे में कार्यकर्ताओं में जिसकी भूमिका सबसे ज्यादा रहे, उन्हें ही पद दिया जाना सही है। गौरव त्यागी के समर्थन में जश्न का माहौल नगर मंडल अध्यक्ष बनने के बाद गौरव त्यागी के समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। देर रात उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, आतिशबाजी की गई और मिठाइयां बांटी गईं। सोशल मीडिया पर भी लगातार उन्हें बधाइयां दी जा रही हैं। गौरव त्यागी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता पूरे संगठन को साथ लेकर चलने की रहेगी। उन्होंने साफ कहा कि आगामी चुनावों में भाजपा किसी भी गुट में बंटी हुई नजर नहीं आएगी। उनका पहला लक्ष्य नगर परिषद में कांग्रेस के बोर्ड को हटाकर भाजपा का बोर्ड बनाना है।



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