नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा:FSL रिपोर्ट में पीड़िता द्वारा जन्मे बच्चे का पिता साबित हुआ आरोपी; पॉक्सो कोर्ट का फैसला
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दौसा की पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म में मामले में दोषी 20 साल के कठोर कारावास व 2 लाख रूपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। परिवादी ने जरिए इस्तगासा रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उसका दूर का रिश्तेदार घर आता जाता रहता है। आरोपी ने उसकी पत्नी व बेटी को बहला फुसलाकर अज्ञात जगह ले जाकर वारदात को अंजाम दिया। इस पर पुलिस ने पॉक्सो समेत अलग-अलग धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच करते हुए चालान पेश किया। 16 गवाह एवं 30 दस्तावेज पेश किए अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए विशिष्ठ लोक अभियोजक जितेन्द्र कुमार सैनी द्वारा 16 गवाह एवं 30 दस्तावेज पेश किए गए। इसके साथ ही मामले के महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट्स एफएसएल-डीएनए रिपोर्ट प्रदर्शित करवाए गए। पॉक्सो कोर्ट की न्यायाधीश रेखा राठौड़ ने साक्ष्य व दस्तावेजों के आधार पर आरोपी चरत मीना (40) को दोषी मानते हुए 20 साल का कठोर कारावास एवं 2 लाख रूपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई। कोर्ट ने इन तथ्यों को माना गंभीर विशिष्ठ लोक अभियोजक ने बताया कि कोर्ट ने पीडिता को नाबालिक माना व आरोपी की उम्र 40 वर्ष थी। साथ ही एफएसएल/डीएनए रिपोर्ट के अनुसार आरोपी ही पीडिता द्वारा जन्मे बच्चे का पिता है। जिसके खिलाफ कई थानों में पहले से गंभीर धारा में मुकदमें दर्ज हैं, कोर्ट ने इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए सजा सुनाई।
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