धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की मांग:सांसद ने लोकसभा में उठाया मुद्दा, कहा- विरासत बचेगी तो पर्यटन बढ़ेगा
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दौसा सांसद मुरारीलाल मीणा ने लोकसभा में संसदीय क्षेत्र की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हाल ही में वित्त मंत्री की ओर से छोटे शहरों के ऐतिहासिक स्थलों को प्राथमिकता देने की घोषणा की थी। दौसा न केवल राजस्थान बल्कि देश की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में संस्कृति मंत्रालय से मांग की है कि संसदीय क्षेत्र के प्रमुख ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया जाए। सांसद ने वीर शिरोमणि राणा सांगा का ऐतिहासिक चबूतरा, महाभारतकालीन पांडूपोल, नारायणी माता मंदिर, पपलाज माता मंदिर, झांझीरामपुरा गोमुख सहित अन्य स्थलों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एएसआई संरक्षण से इन धरोहरों का संरक्षण, मरम्मत और सौंदर्यीकरण संभव होगा और पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी। सांसद मीणा ने बताया कि उनका लक्ष्य दौसा की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और मजबूत ढांचे को मजबूत करना है। परंपराओं को संरक्षित करना जरूरी वहीं पूर्वी राजस्थान की लोक संस्कृति पर बोलते हुए सांसद ने मीणावाटी क्षेत्र की पारंपरिक लोक विधाओं पद दंगल, कन्हैया दंगल और सुड्डा दंगल को सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को मान्यता देकर संरक्षित करना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री और राहुल गांधी अपने दौरों के दौरान जिले के मीणा हाईकोर्ट में पारंपरिक लोक संस्कृतियों से परिचित हो चुके हैं, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि का प्रमाण है। ऐसे में विरासत बचेगी तो पहचान बढ़ेगी।
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