कोर्ट ने कहा- बच्ची देख गलत-सोच कैसे आ सकती है:आदेश में कहा- सम्मान छीना, बच्चेदानी निकालनी पड़ी; रेप करने वाले को 20 साल जेल
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चित्तौड़गढ़ की पॉक्सो कोर्ट संख्या–2 ने 8 साल पुराने रेप के मामले में दोषी को 20 साल की जेल और 1 लाख 40 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला मंगलवार को पॉक्सो कोर्ट–2 की पीठासीन अधिकारी शहनाज परवीन ने सुनाया। पहले दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन उसने फैसले पर पुर्नविचार के लिए हाईकोर्ट में अपील की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने दोबारा विचार के लिए फिर से मामले को चित्तौड़गढ़ की पॉक्सो कोर्ट में भेज दिया था। कोर्ट ने मामले में कहा- वारदात के बाद बच्ची की बच्चेदानी शरीर से बाहर आ गई थी। उसे ऑपरेशन कर शरीर से अलग करना पड़ा, वरना इन्फेक्शन से उसकी मौत हो जाती। इस तरह का अपराध अमानवीय है और यह एक बालिका के आत्मसम्मान, गरिमा और सुरक्षा के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। अदालतें ऐसे मामलों में नरमी दिखाएंगी, तो अपराधियों के हौसले और बढ़ेंगे। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त सजा जरूरी है। इतनी छोटी बच्ची को देखकर किसी व्यक्ति में गलत सोच कैसे आ सकती है, यह बेहद चिंताजनक है। बच्ची को घर से उठा ले गया था यह मामला साल 2018 का है। पीड़िता चार साल की बालिका थी। बच्ची की मां ने भदेसर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची के पिता 3 मार्च 2018 को ट्रक लेकर गुजरात गए हुए थे। 6 मार्च 2018 की रात बच्ची की मां एक शादी में ढोल बजाने गई थी। कुछ समय बाद बच्ची के घर से लापता होने की जानकारी मिली। अगले दिन सुबह बच्ची गंभीर हालत में मिली, जिसके बाद उसे हॉस्पिटल ले जाया गया। पुलिस ने मामले की जांच कर आरोपी को गिरफ्तार किया और न्यायालय में चालान पेश किया। लहूलुहान पड़ी मिली थी बच्ची सरकारी वकील शिवराज सिंह ने बताया- मामला साल 2018 का है। पीड़िता चार साल की बालिका थी। बच्ची की मां ने भदेसर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची के पिता 3 मार्च 2018 को ट्रक लेकर गुजरात गए हुए थे। 6 मार्च 2018 की रात बच्ची की मां एक शादी में ढोल बजाने गई थी। कुछ समय बाद बच्ची के घर से लापता होने की जानकारी मिली। अगले दिन सुबह बच्ची लहूलुहान हालत में मिली। जिसके बाद उसे हॉस्पिटल ले जाया गया। पुलिस ने मामले की जांच कर आरोपी को गिरफ्तार किया और न्यायालय में चालान पेश किया। उम्रकैद, फिर हाईकोर्ट में अपील इस मामले में आरोपी को पहले 20 फरवरी 2019 को विशिष्ट न्यायालय चित्तौड़गढ़ द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इस सजा को चुनौती देते हुए आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट में आरोपी ने यह दलील दी कि घटना के समय वह खुद नाबालिग था। इस दलील पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने मामले को पुनः विचार के लिए 17 फरवरी 2022 को प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड, चित्तौड़गढ़ को ट्रांसफर कर दिया। किशोर न्याय बोर्ड में मामले की सुनवाई के दौरान किशोर न्याय अधिनियम के तहत आरोपी की मानसिक और शारीरिक क्षमता का आकलन किया गया। इसके लिए मेडिकल बोर्ड से विशेषज्ञ रिपोर्ट भी तैयार करवाई गई। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद यह मामला दोबारा पोक्सो कोर्ट–2, चित्तौड़गढ़ में भेजा गया। यह केस मई 2022 में पोक्सो कोर्ट–2 में दर्ज हुआ, जहां नियमित सुनवाई के बाद अब अंतिम फैसला सुनाया गया। 23 गवाह और 40 डॉक्यूमेंट्स किए पेश मामले की सुनवाई के दौरान लोक अभियोजन अधिकारी शिवराज सिंह ने अदालत के सामने 23 गवाहों के बयान और करीब 40 डॉक्यूमेंट्स पेश किए। अदालत ने आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास के साथ 1 लाख 40 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया। इसके अलावा पीठासीन अधिकारी ने पीड़िता को प्रतिकर के रूप में 5 लाख रुपए देने का आदेश दिया। इस राशि में से 4 लाख 50 हजार रुपए पीड़िता के बालिग होने तक किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा रहेंगे, जबकि 50 हजार रुपए उसकी देखभाल के लिए बचत खाते में जमा किए जाएंगे। अदालत ने कहा कि यह राशि पीड़िता के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है। बच्ची को देख गलत भावना कैसे आ सकती है जज ने अपने फैसले में कहा कि इस अपराध में मासूम बालिका से उसका बचपन और सम्मान छीन लिया गया। ऐसी हालत बना दी गई कि वह किसी पर भरोसा करने की स्थिति में नहीं रही। 4 साल की बच्ची के साथ इस तरह की हिंसा करना साफ तौर पर विकृत मानसिकता को दर्शाता है। न्यायालय ने माना कि इस अपराध ने पीड़िता की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया। उसे न सिर्फ शारीरिक पीड़ा झेलनी पड़ी, बल्कि इसका मानसिक असर भी जीवन भर बना रहेगा।
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