श्रीगंगानगर में जलधारा तपस्या का समापन:41 दिनों तक बाबा दीवालीनाथ ने 121 ठंडे पानी के मटकों में नहाकर की साधना




श्रीगंगानगर की पुरानी आबादी में स्थित प्राचीन बाबा बालकनाथ के टीले पर योगी बाबा दीवालीनाथ द्वारा की गई 41 दिवसीय जलधारा तपस्या का समापन सोमवार को हुआ। यह तपस्या सर्दियों की भयंकर ठंड में भी अटूट रही, जहां दीवालीनाथ ने प्रतिदिन सुबह जलधारा के माध्यम से साधना की। टीले में सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब लगा रहा, जो शाम तक जारी रहा। इस अवसर पर 18 की जमात के महंत समंदरनाथ सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा पहुंचे। समापन के बाद पूजा-अर्चना के साथ भव्य भंडारा लगाया गया। भंडारे की शुरुआत संतों-महात्माओं द्वारा प्रसाद ग्रहण करने से हुई। उसके बाद आम श्रद्धालुओं को लंगर बरताया गया। सेवादारों ने अलग-अलग ड्यूटियां लगाकर व्यवस्था संभाली, ताकि किसी को कोई असुविधा न हो। बता दें कि बाबा दीवालीनाथ पिछले कई वर्षों से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना से हर साल सर्दियों में जलधारा तपस्या करते हैं। गर्मियों में वे धुनी (अग्नि) तपस्या भी करते हैं। इस बार यह 41 दिवसीय जलधारा तपस्या 23 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 1 फरवरी तक चली। जिसमें प्रतिदिन सुबह 5 बजे से ठंडे पानी की जलधारा (कई बार 121 मटकों से) के साथ खड़े होकर साधना की गई।



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