राजस्थान में ग्वालों को मिलेंगे 10 हजार रुपए महीने:मंत्री दिलावर ने कहा- गांवों में गायों की देखरेख होगी, चारागाह भूमि से हटेंगे अतिक्रमण
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शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा- गांवों में गायों की देखरेख के लिए ग्वाल की व्यवस्था की जाएगी, जिसको 10 हजार रुपए प्रति महीने दिए जाएंगे। साथ ही चारागाह भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराकर गायों के लिए पर्याप्त गोचर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। दिलावर ने सोमवार को बारां जिले के कोयला गांव में इसकी घोषणा की। मंत्री मदन दिलावर ने कोयला गांव में आयोजित ‘नानी बाई रो मायरो’ कथा में शिरकत की। कथा को संबोधित करते हुए मंत्री ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि गांवों में गायों को चराने के लिए ग्वाल रखने पर 10 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाएंगे। मंत्री ने कहा कि चारागाह भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा, ताकि गायों को पर्याप्त गोचर भूमि मिल सके। उन्होंने बताया कि कोयला गांव से उनका 42 साल पुराना रिश्ता है। यहीं से उन्होंने संघ की शाखा प्रारंभ की थी। संघ प्रचारक परमानंद ने उन्हें कोयला गांव में शाखा शुरू करने की जिम्मेदारी दी थी। मंत्री ने कहा कि गांव, गाय और ग्रामीण व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। मंडोला में गाड़िया लुहारों की जनसुनवाई की मंत्री का काफिला बारां से छेलाबेल गांव जाते समय मंडोला गांव की गाड़िया लुहार कॉलोनी में रुका। यहां कॉलोनीवासियों ने मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। ग्रामीणों ने मंत्री को बताया कि सरकार ने उन्हें मकान बनाकर बसाया, लेकिन उसके बाद उनकी सुध नहीं ली गई। कॉलोनी में नालियों का अभाव है, जिससे घरों में गंदगी फैली रहती है। सफाई नहीं होने के कारण मरे हुए मवेशी भी पड़े रहते हैं, जिन्हें उठाने कोई नहीं आता। इस पर मंत्री मदन दिलावर ने तत्काल बीडीओ को फोन कर कॉलोनी में प्रतिदिन सफाई कराने और कचरा उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गंदगी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी दौरान कॉलोनी निवासी गाडूली बाई ने अपनी समस्या बताई। उन्होंने कहा कि वह पंचायत में सफाई का काम करती हैं और बूढ़ी हो चुकी हैं, लेकिन उन्हें मात्र 1500 रुपए मानदेय मिलता है, जो लंबे समय से नहीं मिला है। इस पर मंत्री दिलावर ने सरपंच को फोन कर तुरंत पूरा वेतन भुगतान करने के निर्देश दिए। सड़क पर अचानक रुका काफिला, बकरियां लिए दिखा बचपन का दोस्त
मंत्री दिलावर बारां से छेलाबेल गांव जा रहे थे, तब रास्ते में बकरियां लेकर जा रहे एक व्यक्ति को देखकर उन्होंने अपना काफिला रुकवाया। मंत्री ने उस व्यक्ति को पहचानते ही गले लगाया और कहा-
“यह मेरा बचपन का दोस्त हरीश चंद्र सुमन है।” मंत्री ने भावुक होकर बताया कि दोनों ने बचपन में एक साथ सिर पर टोकरी रखकर गांव-गांव सब्जी बेची है। बातचीत में हरीश ने बताया कि वे दोनों एक ही उम्र के हैं और साथ रहते हुए बैंगन व हरी सब्जियां बेचते थे। मंत्री और उनके दोस्त की यह मुलाकात वहां मौजूद लोगों के लिए भी खास बन गई।
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