पत्तों से संगीत निकालकर करण सिंह ने बनाई अलग पहचान:हनुमान मंदिर के लिए 35 साल तक रहे नंगे पांव, कलेक्टर ने किया सम्मानित




झालावाड़ के लुहारिया गांव के 65 वर्षीय करण सिंह अपनी अनोखी संगीत कला के लिए जाने जाते हैं। वे मुंह से पेड़ों के पत्तों और प्लास्टिक पेपर के टुकड़ों का उपयोग करके मधुर धुनें निकालते हैं। उनकी यह कला जिले के अधिकारियों और आम लोगों को प्रभावित कर रही है। करण सिंह अपनी उंगलियों और होठों के बीच एक साधारण पत्ता या प्लास्टिक पेपर रखकर संगीत उत्पन्न करते हैं। उनकी यह प्रस्तुति बड़े वाद्य यंत्रों से निकलने वाले संगीत को भी मात दे देती है, जिससे सुनने वाले आश्चर्यचकित रह जाते हैं। करौंदी और पीपल के पत्ते से निकाली धुन करण सिंह ने बताया कि वे करीब 40 साल से इस कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। शुरुआत में उन्होंने करौंदी और पीपल जैसे चुनिंदा पेड़ों के पत्तों का इस्तेमाल किया। हालांकि, पत्तों के जल्दी खराब होने के कारण, अब वे 5 नंबर प्लास्टिक के पेपर का उपयोग करते हैं, जिसे वे आसानी से अपने पास रख सकते हैं।

वे अपनी टीम के साथ भजन संध्या कार्यक्रमों में नियमित रूप से प्रस्तुति देते हैं। उनकी कला का प्रदर्शन राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश में भी हो चुका है। करण सिंह मुख्य रूप से भजन की धुनें निकालते हैं, लेकिन वे देशभक्ति और फिल्मी गानों की धुनें भी बजा सकते हैं। उनकी इस अनूठी कला से जिले के आईपीएस और आईएएस अधिकारी भी प्रभावित हैं। हाल ही में, 26 जनवरी को झालावाड़ में आयोजित एक समारोह में कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने उन्हें सम्मानित किया था। अविवाहित करण सिंह ने तीसरी कक्षा तक पढ़ाई की है और वे खेती का काम करते हैं। अपनी इस विशिष्ट कला के कारण वे अपने क्षेत्र में काफी चर्चित हैं। अब तक महानगर में भी किए भजन करण सिंह ने बताया कि पहले वह अपने गांव में ही अपनी कला का प्रदर्शन करते थे। अब वे झालावाड़ के अलावा वह कोटा, रामगंजमंडी, मध्य प्रदेश के मंदसौर ,राजगढ़, ब्यावरा, नरसिंहगढ़, उज्जैन, इंदौर में भी भजन संध्या के प्रोग्राम में अपनी इस कला को प्रदर्शित कर चुके हैं।
कलेक्टर और एसपी ने की तारीफ 26 जनवरी के अवसर पर झालावाड़ में आयोजित जिला स्तरीय समारोह में सम्मान लेने पहुंचे करण सिंह कि इस कला को देखकर कार्यक्रम के बाद झालावाड़ एसपी आईपीएस अमित बुडानिया ने इस कि कला की प्रशंसा करते हुए सोशल मीडिया पर भी करण सिंह के साथ अपनी फोटो शेयर की। जबकि जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने इस अनूठी कला के लिए उनका सम्मान आयोजित समारोह में किया।
बालाजी का मंदिर बनाने के लिए नंगे पैर करण सिंह करीब 35 सालों का कठिन प्रण बालाजी के लिए त्यागी चरण पादुकाएं त्याग दी है। करण सिंह केवल एक कलाकार ही नहीं, बल्कि एक दृढ़ निश्चयी भक्त भी हैं। उन्होंने अपने गांव लुहारिया में बालाजी का भव्य मंदिर बनवाने का संकल्प लिया था। इस संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने 35 सालों तक नंगे पैर रहने का कठिन प्रण ले रखा है, आखिरकार मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुआ।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *