गैंगरेप के आरोपी को 20 साल की सजा:20 हजार जुर्माना, 3 लोगों ने किया था 17 साल की नाबालिग से गैंगरेप, घर से बुलाकर किया अपहरण
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भरतपुर में आज एक गैंगरेप के आरोपी को 20 साल की सजा और 20 हजार रुपये से दंडित किया गया है। आरोपी ने बहला फुसला कर नाबालिग को उसके घर से बुला लिया और अपने साथियों के साथ 5 दिन तक गैंगरेप किया। आरोपी के दोनों दोस्तों को 1 साल पहले 20-20 की सजा हो चुकी है। मुख्य आरोपी सजा के डर से फरार हो गया था। नाबालिग को बहला फुसला कर घर बुलाया पब्लिक प्रोसिक्यूटर महाराज सिंह फौजदार ने बताया कि घटना लखनपुर थाने की है। 28 मार्च 2023 की है। 17 साल की नाबालिग को 12वीं क्लास में पढ़ती थी। वह रात में घर पढ़ रही थी। नाबालिग के माता-पिता सो गए। सुबह जब परिवार के लोग उठे तो, नाबालिग घर पर नहीं थी। जिसके बाद परिजनों ने अपनी बेटी को गांव में ढूंढा लेकिन, वह नहीं मिली। रात 11 बजे आरोपी ने फोन कर नाबालिग को बुलाया कुछ देर नाबालिग के पिता ने अपना फोन चेक किया तो, पता लगा कि रात करीब 11 उनके मोबाइल पर एक फोन आया है। नाबालिग के पिता ने उस नंबर पर फोन किया तो, नंबर को किसी ने नहीं उठाया लेकिन, नाबालिग के पिता को यह पता लग गया कि नंबर किसका है। 29 मार्च 2023 को गांव में एक पंचायत का आयोजन किया। उसमें भी कोई निर्णय नहीं निकला। 2 दिन बाद पिता ने FIR दर्ज करवाई जिसके बाद 30 मार्च को नाबालिग के पिता लखनपुर थाने में अपनी बेटी के अपहरण का मुकदमा दर्ज करवाया। साथ ही पुलिस को उस नंबर के बारे में बताया। पुलिस की जांच में सामने आया कि नाबालिग के पिता के फोन पर जिस नंबर से फोन आया वह नंबर विश्वेंद्र निवासी खेड़ली का रहने वाला है। 4 दिन बाद नाबालिग को किया दस्तयाब वह नाबालिग के गांव आता जाता रहता था। उसने नाबालिग को अपनी बातों में बहला फुसला लिया और उसका बहकाकर अपहरण कर लिया। पुलिस नाबालिग की तलाश शुरू की जिसके बाद नाबालिग को 4 दिन बाद एक कमरे से दस्तयाब कर लिया गया। इस दौरान पुलिस के पहुंचने से पहले आरोपी फरार हो गए। 5 दिन तक नाबालिग के साथ किया गैंगरेप पुलिस ने नाबालिग के कोर्ट जाकर बयान करवाए। जिसके बाद पता लगा कि विश्वेन्द्र और उसके दो साथियों राहुल और प्रदीप ने उसके साथ 5 दिन तक गैंगरेप किया है। पुलिस ने करीब 8 महीने एक बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट में मामला चलता रहा। जून 2025 में राहुल और प्रदीप को 20-20 की सजा सुना दी गई। सजा के डर से विश्वेन्द्र फरार हो गया। सितंबर 2024 में विश्वेंद्र को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद आज विश्वेंद्र को सजा सुनाई। 20 साल की सजा और 20 हजार जुर्माना आज पॉस्को संख्या-02 के विशिष्ठ न्यायाधीश सचिन गुप्ता ने आरोपी विश्वेंद्र को 20 साल की सजा और 20 हजार रुपये के दंड से दंडित किया है। इस पूरे मामले में 27 गवाह और 35 डॉक्यूमेंट पेश किये गए।
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