संगीत और प्रार्थना में जीवंत हुए बापू के विचार




भीलवाड़ा| महात्मा गांधी के आदर्श जीवन, सत्य, अहिंसा और सकारात्मक चिंतन को प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में आत्मसात करे, तभी एक सशक्त, संवेदनशील और समरस समाज का निर्माण संभव है। यह विचार विधायक अशोक कोठारी ने टाउन हॉल में रसधारा संस्थान की ओर से आयोजित संगीतमय प्रार्थना सभा में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रार्थना और संगीत मानव मन को शांति, सहनशीलता और करुणा से भरते हैं। प्रार्थना सभा के संयोजक लक्ष्मीनारायण डाड ने कहा कि आज समाज का पारस्परिक व्यवहार संवाद की बजाय विवाद का हो गया है। कार्यक्रम की शुरुआत शारदा सोलंकी की ओर से प्रस्तुत रामधुन से हुई। इसके बाद मीना, दिव्या एवं चारुल भट्ट ने “तेरी पनाह में हमें रखना, सीखे हम नेक राह पर चलना” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। हेमांग सोलंकी ने “हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के” गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। वहीं गौरीशंकर ने “इंसान का इंसान से हो भाईचारा” गीत इस अंदाज में प्रस्तुत किया कि पूरा सभागार झूम उठा। रसधारा संस्थान के अध्यक्ष तिलोक छाबड़ा ने अपनी स्वरचित रचना प्रस्तुत कर उपस्थित जनों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया। चारुल भट्ट, नामिका तिस्या एवं हेमांग सोलंकी ने संयुक्त रूप से सुन ले बापू यह पैगाम, मेरी चिट्ठी तेरे नाम की मनमोहक प्रस्तुति दी। मुरलीधर व्यास ने गीत से सभागार को देशभक्ति से सराबोर कर दिया। गायक पंकज जैन, गौरीशंकर, कैलाश जीनगर एवं हेमांग सोलंकी ने गीत प्रस्तुत किया। रसधारा संस्थान के संस्थापक गोपाल आचार्य एवं आयोजन प्रबंधक बाबूलाल जाजू ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक अशोक कोठारी, पूर्व न्यास अध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी, उप महापौर रामलाल योगी, प्रकाश छाबड़ा, पूर्व सभापति ओम नाराणीवाल, सीए दिलीप गोयल ने किया।



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