अलवर में दिखेंगे अफ्रीकी जिराफ और गिर के शेर:वन मंत्री बोले- NCR का सबसे बड़ा बायोलॉजिकल पार्क जल्द होगा तैयार, प्रेम रत्नाकर बांध में मिलेंगे पट्टे




दक्षिण अफ्रीका के जिराफ, गिर के बब्बर शेर और सात अलग-अलग नस्लों के टाइगर अब अलवर में देखने को मिलेंगे। अगले एक साल में शहर के नजदीक कटी घाटी क्षेत्र में एनसीआर का सबसे बड़ा बायोलॉजिकल पार्क विकसित किया जाएगा, जिसके लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। अब जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। यह जानकारी शनिवार को राजस्थान सरकार के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने अरावली की पहाड़ियों पर कार्यकर्ताओं के बीच दी। वे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के दो वर्ष पूरे होने पर कटी घाटी स्थित नगर वन पहुंचे थे। मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित बायोलॉजिकल पार्क में देश-विदेश के कई दुर्लभ वन्यजीवों को लाया जाएगा, जिससे अलवर पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान बनाएगा। वन मंत्री ने डोटासरा, जूली पर बोला जमकर हमला वन मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि इस बायोलॉजिकल पार्क में दक्षिण अफ्रीका के जिराफ, गुजरात के गिर क्षेत्र के बब्बर शेर, विभिन्न नस्लों के टाइगर सहित कई अन्य वन्यजीव देखने को मिलेंगे। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी। इसी पहाड़ी पर कुछ दिन पहले कांग्रेस के नेता अरावली बचाने की मांग करते हुए चढ़े थे। उसके बाद अब वन मंत्री भी उसी पहाड़ी पर पहुंचे हैं। अरावली क्षेत्र को लेकर राजनीतिक बयानबाजी पर पलटवार करते हुए वन मंत्री ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये नेता अरावली बचाने की बात तो करते हैं, लेकिन खुद एक भी पौधा नहीं लगाते। हाल ही में कार्यकर्ताओं के साथ पहाड़ी पर चढ़कर सैकड़ों पौधे तोड़ने का आरोप भी लगाया। पांच साल में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य संजय शर्मा ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है। उन्हें पांच साल में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है। पहले वर्ष में 7 करोड़ और दूसरे वर्ष में 11 करोड़ से अधिक पौधे जनसहयोग से लगाए जा चुके हैं, साथ ही उनके संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वन मंत्री ने भरोसा दिलाया कि डबल इंजन सरकार के कार्यकाल में आने वाले वर्षों में अलवर सहित पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव संवर्धन और पर्यटन विकास से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट धरातल पर उतरेंगे। प्रेम रत्नाकर बांध में नियम के अनुसार मिलेंगे पट्टे अलवर शहर में कटी घाटी के बगल में बहुत पुराना प्रेम रत्नाकर बांध है। जिसमें 30 साल से अवैध निर्माण जारी है। यहां सैकड़ों मकान बन चुके हैं। बांध के घने भराव क्षेत्र में निर्माण नहीं हुआ है। प्रेम रत्नाकर बांध में हो रहे अवैध निर्माण पर सवाल किया तो वन मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि यहां कोर्ट के आदेश आए हुए हैं। उसके अनुसार ही पट्टे मिलेंगे। अभी संभवतया पट्टे नहीं मिले हैं। लेकिन हमने जल संरक्षण के लिए आसपास कई बड़े एनिकट बनाए हैं। सरकार लगातार जल संरक्षण पर ध्यान दे रही है। ताकि अलवर शहर के पानी के संकट को दूर किया जा सके। राज माता की तरह लगी नगर वन में टाइगर की प्रतिमा सरिस्का में राजमाता की तरह नगर वन में टाइगर की प्रतिमा लगी है, जो आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जिसे देखने के लिए काफी संख्या में लोग पहुंचे। इस दौरान लोग टाइगर की प्रतिमा के पास खड़े होकर सेल्फी लेते हुए नजर आए। टहला में आवंटित भूमि की होगी जांच वन मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के राज में टहला में जमीनों की बंदरबांट की गई। बाद में धांधली पकड़ी गई तो कलेक्टर को हटा दिया गया था। जिससे कांग्रेस की मंशा का पता चलता है। अब यदि आवंटन खारिज करने के बाद जमीनों पर कब्जे होने लगे हैं तो उसकी जांच कराएंगे।



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