Somnath Temple Attack History Facts; Mahmud Ghazni Khalji Aurangzeb | PM Narendra Modi | सोमनाथ मंदिर पर गजनवी के हमले के 1000 साल: मुस्लिम शासकों ने कई बार तोड़ा, आजादी के बाद सरदार पटेल ने बनवाया; ध्वस्त होने से बनने तक की कहानियां


  • Hindi News
  • National
  • Somnath Temple Attack History Facts; Mahmud Ghazni Khalji Aurangzeb | PM Narendra Modi

5 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

2026 गुजरात के सोमनाथ मंदिर के लिए 2 वजहों से अहम है। साल 1026 में महमूद गजनवी ने मंदिर पर हमला कर ध्वस्त कर दिया था, जिसके 1000 साल पूरे हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, 11 मई 1951 को स्वतंत्र भारत में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष हो गए हैं। पीएम मोदी ने ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ नाम दिया है।

मंदिर के ध्वस्त होने से बनने तक की तारीखें

सोमनाथ पर ही हमले क्यों हुए, 5 वजहें

  • मंदिर में अपार खजाना: मंदिर को राजाओं, व्यापारियों, विदेशी यात्रियों से भारी दान मिलता था।
  • समुद्र के करीब था: गुजरात के सौराष्ट्र में समुद्र तट पर था। पश्चिमी भारत का प्रवेश द्वार माना जाता था।
  • राजनीतिक प्रतीक: प्रसिद्ध स्थल पर हमला आक्रमणकारी की सत्ता और भय का संदेश देता था।
  • कमजोर स्थानीय सत्ता: गुजरात में सत्ता कमजोर होने या आंतरिक संघर्ष का फायदा बाहरी उठाते थे।
  • ऐतिहासिक प्रसिद्धि: आक्रमणकारी जानते थे, मंदिर पर हमला इतिहास में दर्ज होगा।

इतिहासकारों का मत…

रोमिला थापर लिखती हैं कि, मंदिर पर हमले धार्मिक नहीं, राजनीतिक प्रतीक थे।

आरसी मजूमदार लिखते हैं, मंदिर पर आक्रमण का सबसे बड़ा कारण इसकी संपत्ति थी।

सतीश चंद्र ने लिखा- सोमनाथ पर कब्जा यानी व्यापार और शक्ति पर नियंत्रण।

आरएस शर्मा लिखते हैं- जब शासक कमजोर होता है मंदिर पहले निशाने बनते हैं।

सोमनाथ मंदिर से जुड़ी 5 मान्यताएं; चंद्रमा से जुड़ा एकमात्र तीर्थ, समंदर नहीं छूता

1. चंद्रदेव से जुड़ा इकलौता शिव तीर्थ

ऐसी मान्यता है कि चंद्रदेव (सोम) ने भगवान ब्रह्मा के पुत्र राजा दक्ष प्रजापति की 27 बेटियों से विवाह किया था, लेकिन वे सिर्फ रोहिणी से प्रेम करते थे। इससे नाराज़ होकर दक्ष ने उन्हें क्षय रोग (टीबी) का श्राप दे दिया। देवता चंद्रदेव को सोमनाथ लाए। यहां उन्होंने शिव की कठोर तपस्या की। भगवान शिव ने उन्हें आंशिक मुक्ति दी। शिव यहां सोमनाथ यानी सोम (चंद्रमा) के नाथ कहलाए। यही वजह है कि यह मंदिर चंद्र से जुड़ा एकमात्र शिव तीर्थ माना जाता है।

2. दक्षिण में 6000 किमी तक कोई जमीन नहीं

सोमनाथ मंदिर 20.89° N अक्षांश, 70.40° E देशांतर पर है। मंदिर का शिखर जिस दिशा में है, उसे कहते हैं “निष्कलंक अक्षांश”। सोमनाथ से दक्षिण दिशा में लगभग 6000 किमी तक कोई भूमि नहीं आती। हालांकि, ईस्ट-वेस्ट में छोटे छोटे द्वीप जरूर हैं।

मंदिर परिसर के बाणस्तंभ पर संस्कृत (आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत अबाधित ज्योतिरमार्ग) और दूसरी तरफ इंग्लिश में एक अभिलेख है। इसमें लिखा है- इस बिंदु से साउथ पोल तक सीधी रेखा में कोई अवरोध नहीं है।

3. समुद्र किनारे, गर्भगृह तक नहीं आती लहरें

सोमनाथ मंदिर अरब सागर के किनारे है, फिर भी सदियों से समुद्र की लहरें गर्भगृह को कभी नहीं छूतीं। मान्यता है कि इसे शिव की कृपा माना जाता है। स्थानीय पंडितों का कहना है कि समुद्र महादेव की मर्यादा में आज भी सीमा नहीं लांघता।

4. हर बार टूटा, हर बार फिर बना

इसके तोड़ने और बनने के दावे अलग-अलग हैं। कुछ इतिहासकार इसे 7 बार तोड़ने की बात कहते हैं तो कुछ 17 बार। लेकिन यह हर बार उसी स्थान पर फिर बनाया गया। इसलिए कहा जाता है- यह इकलौता मंदिर है, जो हर बार राख से उठ खड़ा हुआ।

5. लूटे गए द्वार, इतिहास पर मतभेद

गजनवी सोमनाथ से मंदिर के चंदन द्वार लूटकर गजनी (अफगानिस्तान) ले गया और मस्जिद में लगा दिए। 1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयास से वे द्वार भारत वापस लाए गए और सोमनाथ में स्थापित किए गए। इतिहासकार रोमिला थापर ने लिखा कि द्वारों को वापस लाने का जो मामला सामने आया वह 1842 का ब्रिटिश प्रोपेगैंडा था, न कि 1026 के लूट का वास्तविक प्रमाण।

—————————–

कंटेंट सोर्स: ASI – Guide to the Somnath Temple

R.C. Majumdar- An Advanced History of India

Romila Thapar- Somanatha: The Many Voices of a History

Satish Chandra- Medieval India: From Sultanat to the Mughals Part I & II

Mohammad Nazim- Royal Asiatic Society Article



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *