Entry fee implemented at Deeg Fort, tourist numbers drop | डीग किले में एंट्री फीस लागू, पर्यटक घटे: 1 जनवरी से टिकट व्यवस्था, सुविधाओं के अभाव पर नाराजगी – Deeg News



डीग के ऐतिहासिक किले में 1 जनवरी 2026 से प्रवेश शुल्क लागू होने के बाद पर्यटकों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की ओर से यह शुल्क व्यवस्था लागू की गई है, जिसकी जानकारी किले के मुख्य द्वार पर बैनर लगाकर दी गई है।

.

टिकट खिड़की पर तैनात कनिष्ठ सहायक सोनू सिंह ने बताया कि 1 जनवरी से 7 जनवरी 2026 तक कुल 895 पर्यटक किले का भ्रमण करने पहुंचे। इस अवधि में कोई भी विदेशी पर्यटक शामिल नहीं था। इन 7 दिनों में कुल ₹36,650 की आय हुई।

सोनू सिंह ने 8 और 9 जनवरी के आंकड़े उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन का हिसाब भरतपुर स्थित कार्यालय में जमा कराया जाता है और सोमवार को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा सकेगी। वर्तमान में विभाग का भरतपुर कार्यालय राजन कुमार के प्रभार में है।

किले की सुरक्षा में 5 गार्ड तैनात किले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए कुल 5 सुरक्षा गार्ड तैनात हैं, जिनमें से 3 दिन में और 2 रात में ड्यूटी पर रहते हैं। किला सुबह 10 बजे खुलता है और शाम 5 बजे बंद हो जाता है। टिकट वितरण शाम 4:30 बजे तक किया जाता है।

विभाग द्वारा निर्धारित टिकट दरें इस प्रकार हैं

  • विदेशी पर्यटकों के लिए ₹200 प्रति व्यक्ति, भारतीय पर्यटकों के लिए ₹50 प्रति व्यक्ति।
  • विदेशी छात्रों के लिए ₹100 प्रति छात्र और भारतीय छात्रों के लिए ₹20 प्रति छात्र।

पर्यटकों के लिए कोई बुनियादी सुविधा नहीं प्रवेश शुल्क लागू होने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों में असंतोष देखा जा रहा है। निकटवर्ती गांव पान्होरी निवासी रोहिताश, जो अपने 3 मित्रों के साथ किला देखने पहुंचे थे, ने कहा कि किले के अंदर पर्यटकों के लिए कोई बुनियादी सुविधा नहीं है, ऐसे में टिकट लगाना अनुचित है।

स्थानीय निवासी प्रदीप शर्मा ने भी इस व्यवस्था का विरोध किया। उन्होंने बताया कि डीग का प्रसिद्ध महल मात्र ₹20 में देखा जा सकता है, जबकि किले के लिए ₹50 का शुल्क लिया जा रहा है। शर्मा ने सरकार से टिकट व्यवस्था समाप्त करने या शुल्क कम करने की मांग की है, उनका मानना है कि टिकट लागू होने के बाद से पर्यटकों की संख्या में भारी कमी आई है।

84 कोस परिक्रमा पर पड़ेगा असर डीग किला ब्रज 84 कोस परिक्रमा मार्ग में स्थित है। परिक्रमा करने वाले हजारों श्रद्धालु वर्ष भर किला व जलमहल देखने आते हैं, जिनमें अधिकांश ग्रामीण परिवेश से होते हैं। टिकट लगने से उनके लिए किला देखना कठिन हो सकता है।

सुविधाओं का अभाव, संग्रहालय अभी अधूरा प्राप्त जानकारी के अनुसार किले के अंदर पुराने भवन की मरम्मत कर संग्रहालय बनाया जा रहा है, जो अभी तक चालू नहीं हुआ है। इसके अलावा किले में साफ-सफाई, पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है। किले परिसर में स्थित प्राचीन चामड़ मंदिर और राधा-कृष्ण मंदिर तक भी अब बिना टिकट प्रवेश नहीं मिल सकेगा। इससे स्थानीय लोगों का रोजाना भ्रमण भी बंद हो गया है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *