Mauni Amavasya: A festival of self-purification and silence | मौनी अमावस्या: आत्मशुद्धि और मौन का महापर्व: जानें इसका पौराणिक, ज्योतिषीय और मनोवैज्ञानिक महत्व – jhalawar News
माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या का आध्यात्मिक, पौराणिक, ज्योतिषीय और मानसिक-व्यावहारिक दृष्टि से विशेष महत्व है।
माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। सनातन धर्म में इसे पवित्र और आत्मोन्नति का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में यह 18 जनवरी को पड़ेगी, जिसका आध्यात्मिक, पौराणिक, ज्योतिषीय और मानसिक-व्यावहारिक दृष्टि से विशेष महत्व है।
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अंतरराष्ट्रीय वैदिक ज्योतिषी हेमंत कासट के अनुसार, पौराणिक मान्यताओं में उल्लेख है कि इसी दिन मनु महाराज ने मौन धारण कर तपस्या की थी, जिसके कारण इसे मौनी अमावस्या कहा गया। एक अन्य मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय अमृत कलश की बूंदें गंगा सहित पवित्र नदियों में इसी दिन गिरी थीं। इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर पितृलोक के द्वार खुले माने जाते हैं। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
मौनी अमावस्या आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि का दिन है। मौन व्रत मन, वाणी और विचारों को नियंत्रित करता है, जिससे अहंकार, क्रोध और मानसिक अशांति कम होती है। साधना, ध्यान और जप से आत्मिक ऊर्जा का जागरण होता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया जप-तप, ध्यान और दान सौ गुना फलदायी होता है।

अंतरराष्ट्रीय वैदिक ज्योतिषी हेमंत कासट ने बताया मौनी अमावस्या का महत्व।
ज्योतिषीय दृष्टि से माघ अमावस्या पर चंद्रमा पूर्णतः क्षीण अवस्था में होता है, जो मन और अवचेतन का प्रतीक है। यह समय कर्मों के शोधन, राहु-केतु दोष, पितृ दोष, मानसिक भ्रम और भय के शमन के लिए अत्यंत उत्तम माना गया है। इस दिन लिया गया संकल्प दीर्घकालिक फल देता है, विशेषकर उन जातकों के लिए जिनकी कुंडली में चंद्र दोष, कालसर्प दोष या पितृ दोष विद्यमान हों।
आधुनिक मनोविज्ञान भी मौन और आत्मचिंतन के महत्व को स्वीकार करता है। मौन से मानसिक तनाव, अवसाद और चिड़चिड़ापन कम होता है, निर्णय क्षमता बढ़ती है तथा आत्मसंयम और धैर्य का विकास होता है। भागदौड़ भरे वर्तमान जीवन में मौनी अमावस्या डिजिटल डिटॉक्स और मानसिक शुद्धि का श्रेष्ठ अवसर है।
मौनी अमावस्या केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आत्मा से संवाद करने का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन सिखाता है कि मौन सबसे बड़ा ज्ञान है और आत्मसंयम ही सच्ची साधना है।
मौनी अमावस्या के विशेष उपाय
प्रातः गंगा या पवित्र जल से स्नान कर सूर्य को जल अर्पण करें। पितरों के निमित्त तिल-जल से तर्पण करें। “ॐ नमः शिवाय” या गायत्री मंत्र का जप करें।मौन रहकर ध्यान व आत्मचिंतन करें।काले तिल, अन्न, वस्त्र या कंबल का दान करें। इन उपायों से दरिद्रता, रोग, मानसिक क्लेश और पारिवारिक बाधाओं से राहत मिलने की मान्यता है।

