Along with BLO duties, election duty and census work, teachers have been given another responsibility: they will now also drive away stray dogs from schools. | बीएलओ, चुनाव ड्यूटी व जनगणना कार्य के साथ ही शिक्षकों को एक और जिम्मेदारी मिली, अब स्कूलों से आवारा कुत्ते भी भगाएंगे – Sriganganagar News


भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

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बीएलओ, चुनाव ड्यूटी, जनगणना, स्वास्थ्य अभियान (टीकाकरण), सर्वे, डेटा फीडिंग जैसे कार्यों के साथ ही शिक्षकों को जो एक नई जिम्मेदारी मिली है वह हैरान करने वाली है।

पहले से ही कई गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझे शिक्षकों के कंधों पर अब आवारा कुत्तों को भगाने और उन्हें पकड़वाने का जिम्मा भी दे दिया गया है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों के आसपास घूम रहे आवारा कुत्तों को भगाने और संबंधित विभागों से समन्वय कर उन्हें पकड़वाने की जिम्मेदारी सौंपी है। विभाग के अनुसार यह कदम विद्यार्थियों और स्कूल स्टाफ को आवारा कुत्तों के संभावित हमलों से बचाने के लिए उठाया गया है, ताकि स्कूल परिसर में कोई अप्रिय घटना न हो। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें पकड़ने के आदेश दिए हैं। उसी आदेश की पालना में शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को यह निर्देश जारी किए हैं। आदेशों की अवहेलना पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को निर्देश जारी किए हैं। उसी की पालना में माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने राज्य के सभी संयुक्त निदेशकों को आदेश जारी कर राज्य के समस्त विभागीय अधीनस्थों के लिए इस संबंध में वांछित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मोहर सिंह, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा विभाग ने इस पूरी व्यवस्था पर नजर रखने के लिए एक नया सिस्टम भी खड़ा कर दिया है। आवारा कुत्तों की रोकथाम के इंतजामों की समीक्षा के लिए मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक संदर्भ केंद्र प्रभारी नियमित निरीक्षण करेंगे। कम से कम हर तीन महीने में एक बार स्थिति की जांच की जाएगी। अगर कोई भी लापरवाही पाई गई तो संबंधित प्रभारी और संस्था प्रमुख की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों को पहले से ही गैर शैक्षणिक कार्यों जिनमें बीएलओ, चुनाव ड्यूटी, जनगणना, स्वास्थ्य अभियान (टीकाकरण), सर्वे, डेटा फीडिंग (प्रेरणा पोर्टल, आधार, बैंक खाता), मिड-डे-मील प्रबंधन, छात्रवृत्ति वितरण, स्कूल चलो अभियान, स्वच्छता अभियान, और स्कूल प्रबंधन से जुड़े कई प्रशासनिक आदि कार्य शिक्षकों से करवाए जा रहे है। इससे शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अब एक और नई जिम्मेदारी कुत्तों को भगाने की दे दी गई है। सरकार को शिक्षकों को गैर शैक्षिक कार्यों से मुक्त करना चाहिए।

1. परिसर की घेराबंदी : स्कूल बाउंड्री वॉल और गेट को इस तरह दुरुस्त किया जाएगा कि आवारा कुत्ते कैम्पस में दाखिल न हो सकें। छुट्टी के समय और सुबह गेट पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

2. मिड-डे मील और कचरा प्रबंधन : खाने के लालच में कुत्ते स्कूलों के पास जमा होते हैं। अब मिड-डे मील के बचे हुए खाने और कचरे का निबटारा स्कूल परिसर से दूर बंद डस्टबिन में करना होगा।

3. जागरूकता सत्र : प्रार्थना सभा में बच्चों को कुत्तों के व्यवहार और बचाव के तरीके समझाएंगे।

4. स्थानीय निकायों से तालमेल : स्कूल परिसर या आसपास कुत्तों का जमावड़ा होने पर संस्था प्रधान तुरंत नगर निगम, नगरपालिका या पंचायत को सूचित करेंगे ताकि उन्हें वहां से हटाया जा सके।

5. डॉग बाइट फर्स्ट एड: स्कूल में फर्स्ट एड किट में कुत्ते के काटने पर दी जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा की दवाएं और जानकारी उपलब्ध रखनी होगी।



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