Malayalam Language Bill Controversy– Karnataka vs Kerala CM Siddaramaiah writes to Pinarayi Vijayan | केरल सरकार मलयालम को अनिवार्य बनाने बिल लाएगी: कर्नाटक CM ने पिनराई विजयन से कहा- जबरन भाषा थोपने से पहले बातचीत करें, वरना विरोध होगा


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बेंगलुरु3 मिनट पहले

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कर्नाटक CM सिद्धारमैया और केरल CM पिनाराई विजयन- फोटो AI जनरेटेड। - Dainik Bhaskar

कर्नाटक CM सिद्धारमैया और केरल CM पिनाराई विजयन- फोटो AI जनरेटेड।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को चिट्‌ठी लिखी, जिसमें उन्होंने केरल सरकार के प्रस्तावित मलयालम भाषा बिल पर चिंता जताई।

दरअसल, प्रस्तावित मलयालम विधेयक में कासरगोड जैसे कर्नाटक-केरल की बॉर्डर बसे जिलों के कन्नड़ मीडियम स्कूलों में भी मलयालम को अनिवार्य करने का प्रावधान है।

CM सिद्धारमैया ने लेटर में लिखा कि अगर बिल पास होता है, तो कर्नाटक भाषाई अल्पसंख्यकों और देश की बहुलवादी भावना की रक्षा के लिए मिलने वाले संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करके विरोध करेगा।

CM सिद्धारमैया के लेटर की बड़ी बातें…

  • यह पत्र आपसी सम्मान, सहकारी संघवाद और साझा संवैधानिक जिम्मेदारी की भावना से लिख रहा हूं, जिसने लंबे समय से कर्नाटक और केरल के बीच संबंधों को रास्ता बनाया है। दोनों राज्य न केवल भूगोल से बल्कि गहरे सांस्कृतिक सामाजिक और मानवीय संबंधों से भी बंधे हैं।
  • मेरी चिंता प्रस्तावित मलयालम भाषा विधेयक को लेकर है, जो कन्नड़-माध्यम के स्कूलों में भी खासकर कासरगोड जैसे सीमावर्ती जिलों में मलयालम को अनिवार्य पहली भाषा बनाता है। भारत की सभ्यतागत शक्ति हमेशा बिना किसी डर के बहुलता पर टिकी रही है।
  • कोई भी नीति जो एक ही भाषाई रास्ते पर चलने के लिए मजबूर करती है,वह बच्चों पर अनुचित बोझ डालती है। अल्पसंख्यको के लिए चलाए जा रहे स्कूल-कॉलेजों को कमजोर करती है। साथ ही एजुकेशन ईकोसिस्टम को भी डिस्टर्ब करती है।
  • कासरगोड में आबादी का एक बड़ा हिस्सा, कन्नड़ में शिक्षा पर निर्भर है और उसे ही अपनाता है।यह दशकों के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक मेलजोल के चलते है। इससे मलयालम का सम्मान कम नहीं होता।
  • मैं केरल सरकार से आग्रह करता हूं कि बिल पर फिर से विचार करें और पहले बातचीत करें। यह भारत की एकता को मजबूत करेगी, साथ ही हर भाषा और हर नागरिक की गरिमा को भी बनाए रखेगी।
  • मुझे उम्मीद है कि समझदारी, बातचीत और संवैधानिक मूल्य हमें एक ऐसे समाधान की ओर ले जाएंगे जो हर भाषा को आजादी से फलने-फूलने दे।

नॉलेज फैक्ट

भारत का संविधान भाषाई अल्पसंख्यकों को विशेष सुरक्षा देता है। संविधान का अनुच्छेद 29 और अनुच्छेद 30 तक भाषा को संरक्षित करने, अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों को चलाने का अधिकार देते हैं। अनुच्छेद 350A मातृभाषा में शिक्षा की सुविधा अनिवार्य करता है। जबकि अनुच्छेद 350B राज्य को अल्पसंख्यक भाषाई हितों की रक्षा करने का काम सौंपता है।

जानिए मलयालम से जुड़े फैक्ट

  • मलयालम भारत की एक प्रमुख द्रविड़ भाषा है। यह मुख्य रूप से केरल और लक्षद्वीप में बोली जाती है। मलयालम भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में शामिल है।
  • मलयालम दो शब्दों मलय यानी पहाड़ और आलम यानी क्षेत्र/भूमि से बना है। इसका मतलब है- पहाड़ों की भूमि की भाषा।
  • कहा जाता है मलयालम प्राचीन तमिल से ही निकली भाषा है। 9वीं-10वीं शताब्दी में यह स्वतंत्र भाषा के तौर पर विकसित हुई।
  • एक अनुमान के मुताबिक भारत में लगभग 3.8 से 4 करोड़ लोग मलयालम बोलते हैं। केरल सरकार का पूरा प्रशासनिक काम मलयालम में होता है।
  • भारत सरकार ने मलयालम को 2013 में शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया।
  • मलयालम, एक पैलिंड्रोम शब्द है, यानी आगे से और पीछे से पढ़ने पर भी वही रहता है। दुनिया की बहुत कम भाषाओं में से एक है, जिसका नाम ही पैलिंड्रोम है।

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