India’s call will echo in the sandy dunes of Jaisalmer | जैसलमेर के रेतीले धोरों में गूंजेगी भारत की ललकार: वायु शक्ति-2026 की तैयारियां तेज, राफेल और तेजस दिखाएंगे आसमानी पराक्रम – Jaisalmer News
सरहदी जिले जैसलमेर के पोकरण की तपती रेत एक बार फिर भारतीय शौर्य की साक्षी बनने जा रही है। भारतीय वायुसेना (IAF) ने अपने सबसे बड़े और मारक युद्धाभ्यास ‘वायु शक्ति-2026’ की घोषणा कर सकती है, जो आगामी फरवरी 2026 में आयोजित होने जा रहा है।
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इस महा-अभ्यास की तैयारियां अभी से युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई हैं। यह आयोजन न केवल वायुसेना की युद्धक क्षमता का प्रदर्शन होगा, बल्कि पूरी दुनिया को भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और आत्मनिर्भरता का कड़ा संदेश भी देगा।
प्रधानमंत्री और दिग्गज मंत्रियों की उपस्थिति से बढ़ेगा गौरव
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के शामिल होने की पूरी संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वदेशी रक्षा तकनीकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। पोकरण की यह वही धरती है जहाँ भारत ने परमाणु परीक्षण कर दुनिया को चौंकाया था, और अब इसी मिट्टी से वायुसेना अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवाएगी।

राफेल और तेजस: आसमान के सिकंदर
वायु शक्ति-2026 का मुख्य केंद्र बिंदु राफेल (Rafale) और स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस (LCA Tejas) होंगे।
- राफेल: फ्रांस से आए इन ‘ओमनिरोल’ विमानों की घातक मिसाइल क्षमता और रडार को चकमा देने की ताकत का प्रदर्शन पहली बार इतने बड़े स्तर पर पोकरण की रेंज में देखा जाएगा।
- तेजस: भारत के गौरव और स्वदेशी तकनीक की पहचान ‘तेजस’ अपनी फुर्ती और अचूक मारक क्षमता से यह साबित करेगा कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो चुका है।
इनके अलावा वायुसेना के बेड़े से सुखोई-30 MKI, मिराज-2000, और मिग-29 जैसे विमान भी अपनी गर्जना से आसमान को गुंजायमान करेंगे।
दिन और रात की ‘सटीक स्ट्राइक’ का होगा प्रदर्शन
वायु शक्ति अभ्यास की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘प्रिसीजन स्ट्राइक’ क्षमता है। फरवरी महीने के उस दिन, दर्शक देखेंगे कि कैसे भारतीय वायुसेना के विमान ऊँचाई से गिरते हुए बमों और मिसाइलों के जरिए जमीन पर मौजूद काल्पनिक दुश्मन के ठिकानों, टैंकों और रडार स्टेशनों को पलक झपकते ही नेस्तनाबूद कर देते हैं। अभ्यास केवल दिन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि रात के अंधेरे में भी लेजर-गाइडेड बमों और नाइट विजन तकनीकों के माध्यम से ‘पिंच पॉइंट’ सटीकता के साथ हमले का प्रदर्शन किया जाएगा।

स्वदेशी ‘प्रचंड’ और ‘अपाचे’ का तालमेल
सिर्फ लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि अटैक हेलीकॉप्टरों की जुगलबंदी भी इस बार देखने लायक होगी। भारत का अपना हल्का लड़ाकू हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ (LCH) अपनी ऊँचाई पर उड़ान भरने और हमला करने की ताकत दिखाएगा, जबकि अमेरिका निर्मित अपाचे हेलिकॉप्टर अपनी ‘फायर एंड फॉरगेट’ मिसाइलों का प्रदर्शन करेंगे। साथ ही, चिनूक हेलिकॉप्टर भारी आर्टिलरी और सैन्य साजो-सामान को युद्ध क्षेत्र में तेजी से पहुंचाने का अभ्यास करेंगे।
तैयारियां जारी: पोकरण बना छावनी
अभ्यास को लेकर पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज को एक अभेद्य किले में तब्दील किया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी लगातार जैसलमेर और पोकरण का दौरा कर रहे हैं। रडार इंस्टॉलेशन, टारगेट मैपिंग और सुरक्षा घेरे को पुख्ता किया जा रहा है।

आत्मनिर्भरता का ‘आकाश’ और ‘समर’
इस बार वायु शक्ति में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा निर्मित स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों जैसे ‘आकाश’ और ‘समर’ (SAMAR) का भी जलवा रहेगा। ये प्रणालियां दिखाएंगी कि कैसे भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाले किसी भी दुश्मन विमान या मिसाइल को हवा में ही नष्ट किया जा सकता है।
दुनिया देखेगी ‘नभ: स्पृशं दीप्तम्’
‘वायु शक्ति-2026’ केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के आदर्श वाक्य ‘नभ: स्पृशं दीप्तम्’ (आकाश को गर्व के साथ छूना) का साक्षात रूप होगा। फरवरी 2026 में जब पोकरण की धरती धमाकों से गूंजेगी और आसमान रंग-बिरंगे पैराशूट और लड़ाकू विमानों के धुएं से भर जाएगा, तब पूरी दुनिया भारत की सामरिक शक्ति का लोहा मानेगी। यह आयोजन भारत के उन वीर योद्धाओं के कौशल और तकनीक के अद्भुत संगम का प्रतीक है, जो हर स्थिति में देश की सीमाओं की रक्षा के लिए तत्पर हैं।

स्वदेशी गौरव: तेजस दुर्घटना के बावजूद आगे
इस बहुप्रतीक्षित आयोजन की चर्चाओं के बीच, भारतीय वायुसेना के लिए अपने स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘तेजस’ पर विश्वास को बनाए रखना एक महत्वपूर्ण विषय है। मार्च 2024 में, पोकरण में आयोजित एक अन्य प्रमुख सैन्य अभ्यास ‘भारत शक्ति’ से लौटते समय जैसलमेर के पास एक तेजस विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
यह स्वदेश निर्मित हल्के लड़ाकू विमान के बेड़े में शामिल होने के बाद पहली बड़ी दुर्घटना थी, हालांकि गनीमत रही कि पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकल गया था।
वायुसेना ने दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए तुरंत ‘कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी’ का आदेश दिया था। इस घटना ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन की राह में चुनौतियों को उजागर किया, लेकिन वायुसेना और देश का नेतृत्व तेजस कार्यक्रम के प्रति दृढ़ संकल्पित है। वायु शक्ति-2026 में तेजस की भागीदारी न केवल विमान की क्षमताओं को दर्शाएगी, बल्कि यह भी साबित करेगी कि भारतीय वायुसेना इस स्वदेशी फाइटर जेट पर अपना पूरा भरोसा रखती है और तकनीकी चुनौतियों को दूर करने में सक्षम है।

