SP MLA from Duddhi Vijay Singh Gond passes away | सपा विधायक विजय सिंह का PGI में निधन: 8 बार के MLA,अपने गुरु को भी हराया; अखिलेश अस्पताल के लिए रवाना – Sonbhadra News
मनोज कुमार वर्मा | सोनभद्रकुछ ही क्षण पहले
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सोनभद्र से सपा विधायक विजय सिंह गोंड का 71 साल की उम्र में निधन हो गया है। लखनऊ के SGPGI में उन्होंने अंतिम सांस ली। विजय सिंह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनकी दोनों किडनियां खराब हो गई थीं, जिसके चलते उन्हें SGPGI में भर्ती कराया गया था।
विजय सिंह दुद्धी विधानसभा सीट से 8 बार विधायक रहे थे। अपने गुरु को भी हराया और मुलायम सरकार में राज्यमंत्री भी रहे। विधायक के निधन की जानकारी मिलते ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव अस्पताल के लिए रवाना हो गए हैं।
सपा नेता अवध नारायण यादव ने बताया- शुक्रवार को विजय सिंह गोंड का दुद्धी के कमहर घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसके पहले इनका पार्थिव शरीर DCF कॉलोनी स्थित गोंडवाना भवन में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।

27 अक्टूबर 2024 की तस्वीर है। जब विजय सिंह गोंड के समर्थन में अखिलेश यादव प्रचार करने पहुंचे थे।
अब तीन सीटों पर होगा उपचुनाव घोसी के बाद ये दूसरी सीट होगी, जिसमें एक ही कार्यकाल में दूसरी बार उपचुनाव होगा। अब प्रदेश में तीन सीटें रिक्त हो चुकी हैं। इसमें दो सपा और एक भाजपा के कब्जे वाली है। मऊ की घोसी सीट से विधायक सुधाकर सिंह 20 नवंबर को निधन हुआ था। 5 दिन पहले बरेली की फरीदपुर सीट से भाजपा विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल का हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।
विजय सिंह गोंड के निधन से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
लाइव अपडेट्स
5 मिनट पहले
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विजय सिंह गोंड की राजनीति से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा पढ़िए…
- विजय सिंह गोंड की राजनीतिक यात्रा में सबसे चर्चित किस्सा 1989 का विधानसभा चुनाव है, जब उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु रामप्यारे पनिका को हराकर दुद्धी सीट जीती। रामप्यारे पनिका उस समय सोनभद्र क्षेत्र के प्रमुख आदिवासी नेता थे और कांग्रेस के दिग्गज माने जाते थे।
- उन्होंने विजय सिंह गोंड को राजनीति में आगे बढ़ाया था। 1980 और 1985 में कांग्रेस टिकट पर विजय सिंह को जीत दिलवाई, लेकिन 1989 में विजय सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और अपने गुरु को ही हराकर नया इतिहास रचा।
- यह जीत आदिवासी राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक बनी और सोनभद्र की राजनीति में काफी चर्चा का विषय रही। इस घटना ने विजय सिंह को स्वतंत्र और मजबूत आदिवासी नेता के रूप में स्थापित किया, जिसके बाद वे विभिन्न दलों (जनता दल, सपा) से जुड़कर आठ बार विधायक बने। यह किस्सा स्थानीय स्तर पर आज भी “शिष्य द्वारा गुरु को हराने” की मिसाल के रूप में याद किया जाता है।
8 मिनट पहले
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अखिलेश अस्पताल के लिए रवाना
विधायक के निधन का पता चलते ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव SGPGI के रवाना हो गए हैं। यहां परिवार से मिलेंगे और ढांढस बधाएंगे।
11 मिनट पहले
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कल होगा विजय सिंह गोंड का अंतिम संस्कार
सपा नेता अवध नारायण यादव ने बताया- शुक्रवार को विजय सिंह गोंड का दुद्धी के कमहर घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसके पहले इनका पार्थिव शरीर DCF कॉलोनी स्थित गोंडवाना भवन में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।
15 मिनट पहले
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कब-कब विधायक बने विजय सिंह

- 1980: कांग्रेस पार्टी से पहली बार दुद्धी से विधायक बने।
- 1985: फिर कांग्रेस से जीत हासिल की।
- 1989: निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीते। इस चुनाव में उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु रामप्यारे पनिका को हराकर आदिवासी राजनीति में नया अध्याय शुरू किया।
- 1991 और 1993: जनता दल के टिकट पर विधायक बने।
- 1996 और 2002: समाजवादी पार्टी (सपा) से जुड़कर जीत दर्ज की।
- 2017 और 2022: सपा से चुनाव लड़े लेकिन भाजपा की लहर में हार गए।
- 2024 उपचुनाव: भाजपा विधायक रामदुलार गोंड की सजा हुई। इसके चलते सीट खाली हो गई। इसके बाद उपचुनाव हुआ। सपा ने फिर विजय सिंह को उम्मीदवार बनाया। उन्होंने भाजपा के श्रवण गोंड को 3,000 वोटों से हराकर 8वीं बार विधायक बने।

