CV ananda bose Bomb blast threat email Bengal Governor CM mamata TMC BJP | बंगाल गर्वनर को बम ब्लास्ट की धमकी का ई-मेल भेजा: अधिकारी बोले- आरोपी ने अपना मोबाइल नंबर की लिखा; गृह मंत्रालय को जानकारी भेजी गई
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कोलकाताकुछ ही क्षण पहले
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सीवी आनंद बोस 23 दिसंबर 2022 से पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हैं। File
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस को गुरुवार देर रात ई-मेल के जरिए जान से मारने की धमकी दी गई। लोक भवन के सीनियर अफसर धमकी की पुष्टि की है।
अधिकारी के मुताबिक ई-मेल में राज्यपाल को बम से उड़ा देने की धमकी दी गई है। धमकी भेजने वाले ने ई-मेल में अपना मोबाइल नंबर भी लिखा है।
अधिकारी ने PTI से कहा- हमने डीजीपी को जानकारी दी है। आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए हैं। सीएम ममता और गृह मंत्रालय को भी घटना की जानकारी दी गई है।
राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के 60-70 जवान राज्यपाल बोस की सुरक्षा में तैनात हैं। राज्यपाल को Z+ सुरक्षा प्राप्त है।
राज्यपाल बोस को धमकी की घटना उस वक्त हुई है जब राज्य में सियासी तूफान उठा हुआ है। 8 जनवरी को ED ने TMC के सोशल मीडिया हेड के ठिकानों पर रेड मारी है। CM ममता ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया हैं।
इस पर राज्यपाल ने कहा है कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वह संविधान में सहयोग करे। किसी लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकना दंडनीय अपराध है।

अब जानिए CM ममता और राज्यपाल बोस कब-कब सामने-सामने आए
2023: विश्वविद्यालयों में VC नियुक्ति विवाद
राज्यपाल बोस ने राज्य के कई विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर (VC) नियुक्त किए, जिस पर राज्य सरकार ने आपत्ति जताई। सरकार का आरोप था कि नियुक्तियां राज्य की सलाह के बिना हुईं। राज्यपाल ने कहा कि कानून के तहत यह उनका अधिकार है। मामला अदालत तक पहुंचा और उच्च शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई।
2023-2024: राज्य विधेयकों को मंजूरी न देने का आरोप
राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि राज्यपाल कई विधेयकों पर मंजूरी में देरी कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने इसे ‘लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा’ बताया था। राज्यपाल का पक्ष था कि विधेयकों की संवैधानिक जांच जरूरी है। इससे सरकार-राज्यपाल संबंध और तनावपूर्ण हुए।
2023: मनरेगा और केंद्रीय फंड पर टिप्पणी राज्यपाल ने मनरेगा सहित केंद्रीय योजनाओं में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए। राज्य सरकार ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया। दोनों पक्षों के बयानों से केंद्र-राज्य संबंधों पर भी असर पड़ा।
2023-24: राज्यपाल की जिलों की यात्राएं
राज्यपाल के जिलों के दौरे और जनता से सीधे संवाद पर सरकार ने आपत्ति जताई। सरकार ने कहा कि यह समानांतर प्रशासन जैसा है। राज्यपाल ने इसे जनता से जुड़ने का संवैधानिक दायित्व बताया था।
2024: महिला कर्मचारियों की सेक्शुअल हैरेसमेंट की शिकायतें
पश्चिम बंगाल लोक भवन से जुड़े सेक्शुअल हैरेसमेंट के आरोप सामने आए, जिस पर राज्य सरकार ने जांच और कार्रवाई की मांग की। राज्यपाल ने आरोपों को सिरे से खारिज किया और राजनीतिक दुर्भावना बताया। मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहा, लेकिन तनाव बढ़ता रहा।

