Being a palatial house, it became known as Pipli of Palaces; Maharana Mewar had given away 12 villages. | महलनुमा घर होने से महलों की पिपली के नाम से विख्यात हुआ, महाराणा मेवाड़ ने 12 गांव दिए थे – rajsamand (kankroli) News



जिले की राजसमंद पंचायत समिति अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपली आचार्यान अपनी अलग ऐतिहासिक पहचान रखती है। यह गांव आज भी ‘महलों की पिपली’ के नाम से प्रसिद्ध है। इसका कारण यह है कि यहां के वैद्य उदयपुर महाराणा मेवाड़ के राजवैद्य हुआ करते थे। एक समय इस गांव में

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कहा जाता है कि महाराणा मेवाड़ की एक प्रिय हथनी गंभीर बीमारी से ग्रसित होकर मरणासन्न स्थिति में पहुंच गई थी। तब महाराणा को पिपली आचार्यान के प्रसिद्ध वैद्य क्षेमाचार्य के बारे में जानकारी मिली। वैद्य क्षेमाचार्य को उदयपुर बुलाया गया, जिन्होंने हथनी का उपचार किया। कुछ ही दिनों में हथनी पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गई। इससे प्रसन्न होकर महाराणा मेवाड़ ने पिपली आचार्यान गांव को जागीर के रूप में प्रदान किया और वैद्य क्षेमाचार्य को राजदरबार में सम्मान देते हुए ‘ठाकर’ की पदवी भी दी। इसके बाद गांव में महलनुमा आवासों का निर्माण हुआ और यह क्षेत्र महलों की पिपली के नाम से विख्यात हो गया। यहां दाधीच आचार्य परिवारों के सौ से अधिक घर थे। इस गांव से दो दर्जन से अधिक लोग आयुर्वेद की शिक्षा प्राप्त कर वैद्यराज बने। आज भी यह गांव मेवाड़ की राजवैद्य परंपरा और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रमाण है।



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