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शीना बोरा हत्याकांड- गायब हडि्डयां CBI ऑफिस स्टोर में मिलीं:जांच एजेंसी ने कहा- अब इन्हें सबूत के तौर पर पेश नहीं करेंगे

शीना बोरा हत्याकांड को लेकर 10 जुलाई को मुंबई की ट्रायल कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान CBI ने कोर्ट में बताया कि अप्रैल में गायब हुईं हडि्डयां CBI के दिल्ली वाले ऑफिस के मालखाने में मिल गई हैं। पिछले महीने इन हडि्डयों के न मिलने से फॉरेंसिक विशेषज्ञ की गवाही को रोक दिया गया था। हालांकि, CBI ने स्पष्ट किया कि इन अवशेषों को मामले में सबूत के तौर पर पेश नहीं किया जाएगा। 2012 में ये हडि्डयां रायगढ़ के पेन गांव के जंगल से जब्त की गईं थीं। पहले CBI ने इन्हें शीना बोरा के अवशेष बताया था। हड्डियों को जांच के लिए मुंबई के जेजे अस्पताल भेजा गया था। शीना बोरा की 2012 में गला घोंटकर हत्या की गई थी। INX मीडिया की पूर्व CEO इंद्राणी मुखर्जी ने अपने पूर्व पति संजीव खन्ना और ड्राइवर श्यामवर राय के साथ मिलकर शीना की हत्या की थी। इसके बाद उन्होंने शव को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के पेन गांव के जंगल ले जाकर जला दिया था। पुलिस ने पेन गांव से कुछ हड्डियां जब्त की थीं। जांच में पता चला था कि ये किसी इंसान की हैं। इस मामले में अब तक 91 गवाहों ने गवाही दी है। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार 12 जुलाई को भी होगी। कोर्ट को मिला ईमेल, इसमें दावा- गवाह को करोड़ों रुपए मिले
CBI की दलील तब आई जब स्पेशल CBI कोर्ट ने कहा कि उन्हें एक व्यक्ति का ईमेल मिला है जो खुद को फोरेंसिक विशेषज्ञ का भाई बता रहा है। ईमेल में आरोप लगाया गया है कि फोरेंसिक विशेषज्ञ को शीना के अवशेष गायब होने के बारे में झूठ बोलने के लिए करोड़ों रुपए मिले थे। डॉक्टर ने हाल ही में दुबई में एक घर और एक क्लीनिक खरीदा है। स्पेशल जज जस्टिस निम्बालकर ने यह मेल इंद्राणी, पीटर और संजीव के वकीलों को भी दिखाया। ये तीनों जमानत पर बाहर हैं। 3 साल बाद हुआ था शीना की हत्या का खुलासा
3 साल तक शीना बोरा हत्याकांड के बारे में किसी को पता नहीं चला था। 2015 में एक दूसरे केस में पुलिस ने इंद्राणी के ड्राइवर राय को गिरफ्तार किया था। इस दौरान उसने शीना बोरा की हत्या का खुलासा किया। पुलिस को मिला शीना का कंकाल दो हिस्सों में था। जो हड्डियां गायब बताई गई थीं, पुलिस ने उनका DNA टेस्ट नहीं कराया था। मंडप सजाने वाले ने सबसे पहले देखा था शीना का कंकाल
शीना बोरा का कंकाल कैसे मिला, इसकी कहानी संजय सिंह ने अपनी किताब में बताई है। वे लिखते हैं, 24 अप्रैल, 2012 को शीना की हत्या की गई। एक महीने बाद 23 मई, 2012 को उसका कंकाल मिला। 34 साल के गणेश धेने ने सबसे पहले कंकाल देखा था। मंडप की सजावट का काम करने वाला गणेश ‘पुलिस पाटिल’, यानी पुलिस मित्र भी था। उसका काम अपने गांव हेटावने और आसपास के इलाकों में होने वाली घटनाओं पर नजर रखना था। गणेश के मुताबिक, 23 मई, 2012 को वो अपने टेम्पो से गांव लौट रहा था। रास्ते में टॉयलेट के लिए गागोदे खुर्द के जंगल में रुका। यहीं आम तोड़ने के लिए जंगल के थोड़ा अंदर चला गया। अचानक उसे बदबू महसूस हुई। वो बदबू वाली जगह की तरफ गया, तो देखा कि एक कंकाल पड़ा है। वहीं बैग के कुछ फटे हिस्से पड़े थे। (बाद में पता चला ये वही बैग था, जिसे शीना की जलती लाश पर फेंका गया था। बैग पूरी तरह जला नहीं था) गणेश ने पुलिस चौकी में फोन किया। वहां से पेण पुलिस स्टेशन को फोन किया गया। पहली रिपोर्ट में पता नहीं चली मौत की वजह
जंगल में मिली हड्डियों का पोस्टमॉर्टम रायगढ़ जिले के प्राइमरी हेल्थ सेंटर में डॉ. संजय ठाकुर ने किया था। उन्होंने बयान दिया था कि मेडिकल टेस्ट के लिए शव के नमूने लेने मैं मौके पर गया था। मैंने ही एडवांस डेथ सर्टिफिकेट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाई थी। उस रिपोर्ट में मौत की वजह के बारे में कुछ नहीं था। डॉ. संजय ठाकुर ने माना कि पुलिस ने मुझसे मौत की वजह नहीं पूछी थी। ये सही है कि डॉक्टर के लिए पोस्टमॉर्टम के जरिए सामने आने वाली किसी भी गड़बड़ी या संदिग्ध परिस्थिति का जिक्र करना अनिवार्य है। मैंने पोस्टमॉर्टम में ऐसी कोई एंट्री नहीं की। दूसरी बार बहुत खोजने के बाद मिला शीना बोरा का कंकाल
28 अगस्त, 2015 में शीना मर्डर केस का खुलासा हुआ। इसके बाद पुलिस जंगल में दफनाए कंकाल को ढूंढने निकली। मुंबई पुलिस की एक टीम गणेश धेने के साथ उसी जगह पहुंच गई। टीम के साथ खुदाई करने वाले मजदूर और कुछ फोरेंसिक एक्सपर्ट भी थे। कंकाल दफनाए तीन साल हो चुके थे, इसलिए उस लोकेशन का पता लगाना आसान नहीं था। कंकाल दफनाया गया तब मई का महीना था। उस वक्त गर्मी पड़ रही थी। दोबारा तलाश के वक्त अगस्त था और बारिश हो रही थी। इस वजह से पूरा इलाका हरियाली से घिरा हुआ था। इंद्राणी का दावा- जिंदा है शीना
इंद्राणी कोर्ट में दावा करती रही हैं कि शीना बोरा जिंदा है। उसे कश्मीर और कोलकाता एयरपोर्ट में देखा भी गया है। वे कंकाल की DNA टेस्टिंग के तरीके पर भी सवाल उठाती हैं। इंद्राणी के कहने पर कोर्ट में एयरपोर्ट की CCTV फुटेज भी जमा करवाई गई है। 6 साल जेल में रहने के बाद 2022 में उन्हें जमानत मिली थी। कंकाल गायब होने पर इंद्राणी मुखर्जी कहती हैं, ‘मैं नहीं मान सकती हूं कि इतने बड़े-बड़े दो बैग, जिसमें अवशेष थे, वे ऐसे ही गायब हो सकते हैं। अब तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे पता लग सके कि शीना की मौत हो गई है।’

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