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कई शहरों में पुराने कानून में केस दर्ज:कोर्ट में इनके रद्द होने का खतरा; पुलिस उलझन में क्या करें, क्या न करें

देशभर में 1 जुलाई से भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू हो गई है। अब केस पुराने कानून भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज नहीं होंगे। हालांकि पिछले 6 दिन में हरियाणा के पलवल में 20, जोधपुर में 32, तेलंगाना में 36, तमिलनाडु में 5 समेत कई राज्यों में IPC में केस दर्ज होने के मामले सामने आए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या 30 जून की रात 12 बजे के बाद पुराने कानून के तहत दर्ज ये मामले मान्य होंगे? ऐसे मामले अदालत में टिक पाएंगे? इन सभी सवालों के जवाब सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता से जानिए… 16671 थानों को भेजी डिजिटल बुकलेट
नए कानून की जानकारी न होने की समस्या को देखते हुए गृह मंत्रालय ने 36 पेज की डिजिटल बुकलेट तैयार कराई है। इसकी पीडीएफ देश के 16,671 थाना प्रभारियों को ईमेल और वॉट्सएप से भेजी गई है। इसमें नए कानून की धाराओं और जांच प्रक्रिया की जानकारी दी गई है। ये खबर भी पढ़ें… 3 नए आपराधिक कानून लागू- गृह मंत्री शाह बोले- अब दंड की जगह न्याय मिलेगा देश में अंग्रेजों के जमाने से चल रहे कानूनों की जगह 3 नए कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1 जुलाई से लागू हो गए हैं। शाह ने कहा कि आजादी के 77 साल बाद क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम अब पूरी तरह से स्वदेशी हो गया है। शाह बोले- अब दंड की जगह न्याय मिलेगा। मामलों में देरी की जगह स्पीडी ट्रायल होगा। साथ ही सबसे आधुनिक क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम बनेगा। पढ़ें पूरी खबर…

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