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लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण के नाम पर करोड़ों वसूल रहे माफिया:भतीजा बोला- प्रभाकरण जिंदा नहीं, उनके नाम पर पैसे न दें

राजीव गांधी की हत्या के मास्टरमाइंड वेलुपिल्लई प्रभाकरण के परिवार ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग लिट्टे के नेता के जिंदा होने के दावा करके तमिलों से करोड़ों रुपए वसूल रहे हैं। प्रभाकरण के बड़े भाई मनोहरण के बेटे कार्तिक मनोहरण ने IANS से बातचीत में बताया कि एक माफिया गैंग प्रभाकरण के नाम को ब्रांड की तरह इस्तेमाल कर रहा है। इसके जरिए यह गैंग विदेश में रहे रहे तमिलों से फंड इकट्ठा कर रहा है। कार्तिक ने कहा कि प्रभाकरण के नाम पर लिया जा रहा पैसा न तो उनके परिजनों और न ही गरीब तमिलों तक पहुंच रहा है। विदेश में मौजूद भारतीयों इस फ्राड से दूर रहें। 1983 में श्रीलंका छोड़ने के बाद से मनोहरण का परिवार सुर्खियों से दूर रहा है। पिछले साल 27 नवंबर को स्विट्जरलैंड में प्रवासी भारतीयों ने प्रभाकरण की बेटी द्वारका प्रभाकरण की AI से बनाई गई वीडियो स्पीच जारी की थी। इसके बाद मनोहरण के परिवार ने अपील की थी कि उनके परिवार से जुड़े झूठे वीडियोज साझा न किए जाएं। भतीजा बोला- प्रभाकरण जिंदा होते तो संपर्क जरूरी करते
कार्तिक मनोहरण ने कहा था कि प्रभाकरण और उनके परिवार की साल 2009 में मौत हो गई थी। अगर वे जिंदा होते तो संपर्क जरूर करते। जब वे श्रीलंका में थे, तब भी हमेशा कॉन्टैक्ट में रहते थे। उनसे आखिरी संपर्क 2008 में ही हुआ था। श्रीलंका में तमिलों के खिलाफ जंग की शुरुआत होते ही 1983 में प्रभाकरण के भाई अपने परिवार और माता-पिता को लेकर वापस लौट आए थे। इस लड़ाई में तमिलों का नेतृत्व लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी LTTE के लड़ाके कर रहे थे। यह वही समय था जब पाकिस्तान, सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका से मिले हथियारों के बूते ताकतवर हुई श्रीलंकाई सेना ने अल्पसंख्यक तमिलों के गढ़ जाफना को घेर लिया था। सिंघली भाषा बोलने वाले बहुसंख्यकों के अत्याचारों से परेशान होकर तमिलों ने हथियार उठा रखे थे। वे अलग देश की मांग कर रहे थे। श्रीलंका से समझौते पर राजीव सरकार से नाराज हुआ लिट्टे
1987 को शांति लाने के नाम पर भारत-श्रीलंका के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत भारतीय सेना को दोनों पक्षों के बीच शांति बनाए रखने और तमिल गुटों से हथियार डलवाने थे, लेकिन LTTE इसके लिए राजी नहीं हुआ। धीरे-धीरे श्रीलंकाई सेना और LTTE के बीच की ये जंग भारतीय सेना और LTTE के बीच की जंग में बदल गई। सैकड़ों भारतीय जवान शहीद हुए और सैकड़ों घायल हो गए। इसके बाद बोफोर्स घोटाले में फंसी कांग्रेस सरकार साल 1989 का चुनाव हार गई। प्रभाकरण ने की थी राजीव गांधी की हत्या की प्लानिंग
1991 के चुनाव में राजीव गांधी की सत्ता में वापसी के डर से लिट्टे के नेता प्रभाकरण ने उन्हें मारने का फैसला किया। राजीव के हत्या को LTTE ने ‘ऑपरेशन वेडिंग’ नाम दिया था। LTTE प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण ने नवंबर 1990 में राजीव की हत्या की योजना बनाई। राजीव गांधी की हत्या करने वाली LTTE की आत्मघाती हमलावर धनु नाम की महिला थी। 21 मई 1991 को रात के करीब 10 बजे राजीव गांधी तमिलनाडु की राजधानी मद्रास (अब चेन्नई) से 40 किलोमीटर दूर स्थित श्रीपेरंबदूर में एक रैली को संबोधित करने पहुंचे थे। धनु राजीव के पास पहुंची, उन्हें चंदन की माला पहनाई और उनके पैर छूने के लिए झुकी। इसी दौरान उसने अपने कपड़ों के अंदर पहनी हुई बम वाली बेल्ट का बटन दबा दिया। धमाका इतना जबर्दस्त था कि कई लोगों के चिथड़े उड़ गए। राजीव और हमलावर धनु समेत 16 लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि 45 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

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