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आडवाणी 7 दिन में दूसरी बार अस्पताल में भर्ती:दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं, हालत स्थिर

देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को 7 दिन में दूसरी बार अस्पताल में भर्ती किया गया है। स्वास्थ्य को लेकर कुछ दिक्कत महसूस होने के कारण उन्हें बुधवार रात 9 बजे दिल्ली के अपोलो अस्पताल लाया गया। वे फिलहाल डॉ. विनीत सुरी के ऑब्जर्वेशन में हैं। उनकी तबीयत स्थिर है। इससे पहले 26 जून को भी उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती किया गया था। इस दौरान उन्हें यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉक्टर्स की निगरानी में रखा गया था। डॉक्टरों ने बताया था आडवाणी का एक छोटा-सा ऑपरेशन हुआ है। इसके बाद अगले दिन उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था। 31 मार्च को लालकृष्ण आडवाणी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके घर जाकर भारत रत्न से सम्मानित किया था। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने 3 फरवरी को उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा की थी। इससे पहले 2015 में आडवाणी को देश के दूसरे सबसे नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। NDA की जीत के बाद आडवाणी से मिलने पहुंचे थे मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 जून को लोकसभा चुनाव में NDA की जीत के बाद लाल कृष्ण आडवाणी से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्‍होंने आडवाणी को गुलदस्‍ता भेंट किया। भाजपा के फाउंडर मेंबर्स, 7वें उपप्रधानमंत्री रहे
आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची में हुआ था। 2002 से 2004 के बीच अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में 7वें उपप्रधानमंत्री रहे। इससे पहले 1998 से 2004 के बीच NDA सरकार में गृहमंत्री रहे। वे भाजपा के फाउंडर मेंबर्स में शामिल हैं। आडवाणी का राजनीतिक सफर आडवाणी की रथ यात्रा, कमान मोदी को मिली थी राम मंदिर आंदोलन के लिए लालकृष्ण आडवाणी ने 63 साल की उम्र में गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। 25 सितंबर 1990 से शुरू हुई इस यात्रा की कमान मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भाजपा के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन से संभाली थी। यह आडवाणी की रथ यात्रा का ही कमाल था कि 1984 में दो सीट जीतने वाली भाजपा को 1991 में 120 सीटें मिली। इतना ही नहीं आडवाणी ने पूरे देश में एक हिन्दूवादी नेता के तौर पर पहचान बनाई। इसके अलावा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार जैसे राज्यों में भाजपा को नई पहचान मिली। इस यात्रा के बाद आडवाणी पूरे देश में हिंदूवादी नेता के तौर पर स्थापित हुए थे, लेकिन वह अपनी यात्रा पूरी नहीं कर पाए थे। उन्हें बिहार के समस्तीपुर में 23 अक्टूबर 1990 को अरेस्ट कर लिया गया था। कट्‌टर हिंदुत्व का चेहरा रहे आडवाणी 1. मंडल की काट में मंदिर मुद्दा लाए
आडवाणी राम जन्मभूमि आंदोलन में भाजपा का चेहरा बने। 80 के दशक में विश्व हिंदू परिषद ने ‘राम मंदिर’ निर्माण आंदोलन शुरू किया। 1991 का चुनाव देश की सियासत का टर्निंग पॉइंट रहा। भाजपा मंडल कमीशन की काट के रूप में मंदिर मुद्दा लेकर आई और रामरथ पर सवार होकर देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में उभरी। 2. आधा दर्जन यात्राएं निकालीं
आडवाणी ने 1990 में सोमनाथ से अयोध्या तक ‘रथ यात्रा’ की। उनके सियासी जीवन में राम रथ यात्रा, जनादेश यात्रा, स्वर्ण जयंती रथ यात्रा, भारत उदय यात्रा, भारत सुरक्षा यात्रा, जनचेतना यात्रा शामिल हैं। 3. युवा नेताओं की फौज तैयार की
जनसंघ को भाजपा बनाने की यात्रा में सर्वाधिक योगदान लालकृष्ण आडवाणी का रहा। भाजपा की मौजूदा पीढ़ी के 90% से ज्यादा नेता आडवाणी ने ही तैयार किए हैं। 4. जब सबको हैरत में डाल दिया था
आडवाणी ने 1995 में अटल बिहारी वाजपेयी को PM पद का दावेदार बताकर सबको हैरत में डाल दिया। आडवाणी हमेशा वाजपेयी के नंबर दो बने रहे। 5. आरोप लगे तो इस्तीफा दे दिया
आडवाणी का 50 साल से ज्यादा का सियासी जीवन बेदाग रहा। 1996 में आडवाणी सहित विपक्ष के बड़े नेताओं का हवाला कांड में नाम आया। तब आडवाणी ने इस्तीफा देकर कहा कि वे इसमें बेदाग निकलने के बाद ही चुनाव लड़ेंगे। 1996 में वे बेदाग साबित हुए। ये खबर भी पढ़ें … आडवाणी ने लिखा- मंदिर निर्माण, एक दिव्य स्वप्न की पूर्ति: यह नियति ने तय किया, इसके लिए PM मोदी को चुना नियति ने तय किया था कि अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनाया जाएगा और उसने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुना। राम मंदिर आंदोलन में सबसे आगे रहे भाजपा के दिग्गज भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने राष्ट्र धर्म पत्रिका के विशेष संस्करण में लिखे अपने लेख में ये बातें कहीं। पूरी खबर पढ़ें …

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