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इराक की अल-नूरी मस्जिद में मिले 5 बम:इनका वजन 1.5 किलो, इराक से जंग के वक्त आतंकी संगठन ISIL ने दीवार में गाड़े थे

इराक के उत्तरी शहर मोसुल की अल-नूरी मस्जिद में 5 बड़े बम बरामद हुए हैं। आतंकी संगठन ISIL (ISIS की शाखा) ने ये बम दीवार में गाड़ रखे थे। अलजजीरा के मुताबिक, इन बमों का वजन 1.5 किलोग्राम है। इनमें से एक को दीवार से निकाल दिया गया है, जबकि बाकी बमों को हटाने की कोशिश की जा रही है। 2017 में तबाह हुई मस्जिद को दोबारा बनाने में जुटे UNESCO ने बताया कि बम बाद में बनाई गई एक दीवार में लगाए गए थे। इनकी जानकारी मिलते ही इराक के अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। बम हटाए जाने तक सभी लोगों को मस्जिद के परिसर से हटा दिया गया है। अल-बगदादी ने मस्जिद पर किया था कब्जा
दरअसल, जुलाई 2014 में इस्लामिक स्टेट के चीफ अबु बक्र अल-बगदादी ने अल-नूरी मस्जिद पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद आतंकी संगठन ने इराक और सीरिया के बड़े हिस्से को अपने कंट्रोल में ले लिया था। अनुमान लगाया गया है कि उसी दौरान ISIL (ISIS की शाखा) ने मस्जिद में बम लगाए होंगे, जिसे बाद में डेटोनेट कर दिया गया। 2017 में इराक ने अमेरिका के साथ मिलकर ISIL को मिटाने के लिए अभियान चलाया था। इसी जंग के दौरान अल-नूरी मस्जिद तबाह हुई थी। साल 2020 में ISIL के खात्मे के बाद इराक की सेना ने पूरे देश में सर्च ऑपरेशन चलाया था। हालांकि, दीवार में गड़े होने के कारण ये बम तब नहीं मिले थे। 12वीं सदी में बनी थी अल-नूरी मस्जिद
UNESCO को पांचों बम 25 जुलाई को मिले थे, लेकिन इनकी जानकारी शनिवार को दी गई है। 12वीं सदी में बनी यह मस्जिद अपनी झुकी हुई मीनार के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती थी। इस मस्जिद का नाम नूरेदीन अल-जिंकी के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने सीरिया का एकीकरण किया था। उन्होंने ने ही साल 1172 में इस मस्जिद को बनाने का आदेश दिया था। बाद में कई जंगों के बीच यह मस्जिद कई बार निशाने पर आई। इसका ज्यादातर मूल ढांचा तबाह हो गया था। हालांकि, इसकी मीनार फिर भी खड़ी रही। बाद में मस्जिद के मलबे से 45 हजार ईंटों को निकालकर इसे दोबारा बनाया गया था। इसे ISIL ने 2017 में दोबारा तबाह कर दिया था। मस्जिद को दोबारा बनवाने के लिए UAE कर रहा फंडिंग
2020 में ISIL का कब्जा हटने के बाद से UNESCO इसे फिर से बनाने का काम कर रही है। इसकी फंडिंग UAE कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, मस्जिद को फिर से बनाने का काम इस साल दिसंबर तक पूरा हो सकता है।

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