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‘नर्क’ तक जाएंगे टाइटन पनडुब्बी बनाने वाली कंपनी के को-फाउंडर:664 फीट गहरी गुफा है डीन ब्लूहोल, यह 15 हजार साल पहले बनी

टाइटैनिक जहाज का मलबा दिखाने गई टाइटन पनडुब्बी को बनाने वाली कंपनी ओशनगेट के को-फाउंडर समुद्र में एक नई यात्रा पर जाने वाले हैं। गुइलर्मो सोनलाइन एक पनडुब्बी के जरिए बहामास के डीन्स ब्लू होल की स्टडी के लिए जाएंगे। यह समुद्र में मौजूद दुनिया की तीसरी सबसे गहरी गुफा है, जिस पर अब तक कोई रिसर्च नहीं हुई है। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, बहामास के लोग इसे नर्क का दरवाजा भी कहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हर साल यहां कई लोगों की जान जाती है। डीन ब्लूहोल पानी के अंदर बनी 664 फीट गहरी गुफा है, जो बहामास के एक द्वीप के पास है। यह 15 हजार साल पहले बनी थी। बेहद गहरी होने की वजह से इस पर आज तक कोई खास रिसर्च नहीं हो पाई है। समुद्र की तुलना में ब्लू होल में 20 गुना ज्यादा दबाव
गुइलर्मो के साथ वैज्ञानिक केनी ब्रॉड और नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री स्कॉट पैराजिनस्की भी इस यात्रा पर जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लू होल के सतह पर समुद्र की सतह की तुलना में 20 गुना ज्यादा प्रेशर होगा​​​​​। गुइलर्मो ने साल 2009 में स्टॉकटन रश के साथ मिलकर ओशनगेट कंपनी स्थापित की थी। हालांकि बाद में उन्होंने यह कंपनी छोड़कर ब्लू मार्बेल कंपनी की स्थापना की। वहीं स्टॉकटन रश पिछले साल समुद्र में टाइटन पनडुब्बी के हादसे में मारे गए थे। गुइलर्मो ब्लू होल की यात्रा पर कब जाएंगे, इसकी तारीख फिलहाल सामने नहीं आई है। क्या होता है ब्लू होल?
ब्लू होल एक तरह की गुफा होती है, जो समुद्र के अंदर रहती है। इसे ब्लू होल कहा जाता है क्योंकि इसका पानी अक्सर गहरी नीले रंग का होता है। यहां बड़ी तादाद में समुद्री जीव होते हैं। ब्लू होल में ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम होती है। इसमें हाइड्रोजन सल्फाइड गैस होती है, जो एक जहरीली गैस है। इससे पहले पिछले साल 18 जून को टाइटन सबमरीन अटलांटिक महासागर में 12 हजार फीट नीचे गई थी। इसके ठीक बाद यह लापता हो गई थी। 4 दिन की मशक्कत के बाद 22 जून को इसका मलबा टाइटैनिक जहाज से 1600 मीटर दूर मिला था। इसमें 4 टूरिस्ट और एक पायलट सवार था। अब टाइटन पनडुब्बी के बारे में जानिए… यात्रा पर निकलने के 1:45 घंटे बाद लापता हुई थी टाइटन सबमरीन
टाइटन पनडुब्बी 18 जून की शाम करीब 5:30 बजे (भारतीय समयानुसार) अटलांटिक महासागर में छोड़ी गई थी। ये 1:45 घंटे बाद लापता हो गई थी। अनुमान लगाया गया था कि पनडुब्बी में विस्फोट हुआ था। अमेरिकी नेवी के एक अफसर के मुताबिक, टाइटन पनडुब्बी की आखिरी लोकेशन टाइटैनिक जहाज के पास से ही रिकॉर्ड की गई थी। लापता होने के कुछ देर बाद रडार पर विस्फोट से जुडे़ कुछ सिग्नल भी मिले थे। पनडुब्बी ओशन गेट कंपनी की टाइटन सबमर्सिबल थी। इसकी साइज एक ट्रक के बराबर थी। ये 22 फीट लंबी और 9.2 फीट चौड़ी थी। पनडुब्बी कार्बन फाइबर से बनी थी​​​​​​। टाइटैनिक का मलबा देखने जाने के लिए प्रति व्यक्ति 2 करोड़ रुपए फीस ली गई थी। ये सबमरीन समुद्र में रिसर्च और सर्वे के भी काम आती थी।

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