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पन्नू की हत्या की साजिश केस:अमेरिका ने भारत से जांच समिति की रिपोर्ट मांगी, कहा- वॉशिंगटन मामले में जवाबदेही चाहता है

अमेरिका ने बुधवार को खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ कथित हत्या की साजिश को लेकर भारत से जवाबदेही मांगी है। अमेरिकी सरकार के उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल ने कहा कि भारत सरकार के सामने इस मुद्दे को सीधे उठाया गया है। साथ ही जांच समिति की रिपोर्ट मांगी गई है। वॉशिंगटन इस मामले में जवाबदेही चाहता है। दरअसल, पन्नू की हत्या की साजिश रचने के आरोप में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को 30 जून 2023 को चेक रिपब्लिक पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 14 जून 2024 को निखिल को अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया था। पिछले साल अमेरिका ने आरोप लगाया था कि न्यूयॉर्क में पन्नू पर जानलेवा हमले की साजिश रची गई थी। इसमें भारत का हाथ था। इस साजिश को नाकाम कर दिया गया। अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक, यह प्लानिंग PM मोदी के अमेरिका दौरे के वक्त की गई थी। हालांकि, इसकी जानकारी 22 नवंबर को दी गई थी। पन्नू की हत्या की साजिश रचने के मामले में 29 नवंबर 2023 को न्यूयॉर्क पुलिस की चार्जशीट सामने आई थी। पन्नू को मारने के लिए दिए गए थे 83 लाख रुपए
चार्जशीट में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता पर पन्नू की हत्या की साजिश का आरोप है। इसमें लिखा है- भारत के एक पूर्व CRPF अफसर ने उसे पन्नू की हत्या की प्लानिंग करने को कहा था। निखिल ने एक व्यक्ति के साथ काम के बदले 83 लाख रुपए देने की डील की थी। इसके बाद इस साल अप्रैल में अमेरिकी मीडिया वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि पन्नू की हत्या की साजिश के पीछे RAW का हाथ था। रिपोर्ट के मुताबिक, पन्नू की हत्या की पूरी प्लानिंग RAW के एक सीनियर अधिकारी विक्रम यादव ने की थी। उसने एक हिट टीम को काम पर रखा था। यादव ने पन्नू के बारे में भारतीय एजेंट निखिल गुप्ता को जानकारी भेजी, जिसमें उसके न्यूयॉर्क में होने के बारे में पता चला था। इसके बाद निखिल गुप्ता ने पन्नू को मारने के लिए एक एजेंट से संपर्क किया। हालांकि प्लानिंग सफल होने से पहले ही निखिल गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया गया था। पन्नू मामले में कब, क्या हुआ, चार्जशीट के मुताबिक पूरी टाइमलाइन… कौन है गुरपतवंत सिंह पन्नू? ये मामला सरकारों के बीच कैसे आया?
इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार मामला एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की साजिश का था। हत्या की साजिश का आरोप भारत में बैठे अधिकारी पर था। इस कारण अमेरिकी अफसरों ने ये बात अपने आला अफसरों को बताई। भारत के सामने पहली बार ये मामला 5-6 अगस्त को सऊदी अरब के जेद्दा में उठा था। जब रूस-यूक्रेन मामले बैठक हो रही थी। उस समय अमेरिकी NSA जैक सुलिवन ने भारत के NSA अजित डोभाल से अलग से इस हत्या की साजिश पर बात की थी। डोभाल ने सुलिवन से दो टूक कहा था कि ऐसे बात नहीं बनेगी। भारत इस पर तभी जांच कर सकता है, जब कोई सबूत और डिटेल हो। अगर ये सब नहीं है तो ये सब बकवास है। इसके एक सप्ताह बाद जब भारत आजादी की सालगिरह मना रहा था। CIA निदेशक विलियन जे बर्न्स भारत आए। बर्न्स ने NSA डोभाल, रॉ प्रमुख रवि सिन्हा सहित कई आला अफसरों से बात की और उनके पास जो सबूत थे वो शेयर किए। भारत की ओर से फिर यही जवाब दिया गया कि ये बहुत सेंसटिव मामला है ऑफिशियल एक्शन से पहले इस पर और ठोस सबूत होना चाहिए। इस बीच खालिस्तान अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में लगातार कनाडा के ऑफिशियल भारत के संपर्क में थे, लेकिन भारत उन्हें एंटरटेन नहीं कर रहा था। इसके बाद इसी साल अक्टूबर में अमेरिकी इंटेलिजेंस के चीफ एवरिल हेन्स ठोस सबूतों के साथ भारत आए और भारतीय अफसरों को बताया कि वो अभियोग तैयार कर रहे हैं। इसके बाद अमेरिका ने इस मामले को सार्वजनिक कर दिया। जब भारत को वो दस्तावेज मिले तो भारत ने इस पर गंभीरता से जांच करने का फैसला किया। 18 नवंबर को भारत ने हाई लेवल इन्वेस्टिगेशन पैनल बनाया।

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