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PM बोले- इमरजेंसी लगाने वाले संविधान पर प्यार न जताएं:चिदंबरम बोले- इस बार दूसरी इमरजेंसी से बचने के लिए जनता ने वोट किया

इमरजेंसी की आज 49वीं बरसी है। इससे एक दिन पहले 18वीं लोकसभा के पहले सत्र में विपक्षी सांसदों ने संविधान की कॉपी लेकर शपथ ली थी। इसे लेकर प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने X पर एक पोस्ट में लिखा कि इमरजेंसी लगाने वालों को संविधान पर प्यार जताने का अधिकार नहीं है। PM मोदी ने एक के बाद एक X पर चार पोस्ट किए। उन्होंने कहा जिस मानसिकता की वजह से इमरजेंसी लगाई गई, वह आज भी इसी पार्टी में जिंदा है। इसके जवाब में कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि देश को दूसरी इमरजेंसी से बचाने के लिए जनता से इस बार वोट किया है। हमारे संविधान ने ही जनता को आने वाली एक और इमरजेंसी रोकने की याद दिलाई है। चिदंबरम ने कहा कि जनता ने इस लोकसभा चुनाव में भाजपा के मंसूबों को कम करने के लिए वोट किया है। जनता ने इस तरह का मतदान कर कहा है कि कोई भी शासक संविधान के मूल ढांचे को नहीं बदल सकता है। भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश बना रहेगा। कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने कहा कि इंदिरा गांधी में साहस था। उन्होंने घोषित आपातकाल लगाया था, लेकिन देश में 10 साल अघोषित आपातकाल लगा हुआ है। किसान शहीद हो रहे हैं, मीडिया को दबा दिया गया है। विपक्ष के लोग अगर सवाल करते हैं तो उन्हें जेल भेज दिया जाता है। इमरजेंसी पर भाजपा नेताओं ने क्या-क्या कहा? 1. PM मोदी: इमरजेंसी के समय जो भी कांग्रेस से असहमति जताता था उसे प्रताड़ित किया जाता था। सामाजिक रूप से इस तरह की नीतियां लागू की गईं, जिससे सबसे कमजोर वर्गों को निशाना बनाया जा सके। ये वही लोग हैं, जिन्होंने अनगिनत मौकों पर अनुच्छेद 356 लागू किया। इन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म करने के लिए विधेयक लाया था। इन्होंने संविधान के हर पहलू का उल्लंघन किया था। लेकिन जनता की हरकतें समझ गई हैं। इसलिए बार-बार इन्हें चुनाव में हार मिलती है। कि आज का दिन उन महान लोगों को श्रद्धांजलि देने का दिन है, जिन्होंने इमरजेंसी का विरोध किया था। इमरजेंसी की बरसी हमें याद दिलाती है कि कैसे कांग्रेस ने उस वक्त आजादी को खत्म कर दिया था और संविधान को कुचल दिया था। 2. अमित शाह: देश में लोकतंत्र की हत्या और उस पर बार-बार आघात करने का कांग्रेस का लंबा इतिहास रहा है। साल 1975 में आज के ही दिन कांग्रेस के द्वारा लगाया गया आपातकाल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इमरजेंसी के दौरान उन्होंने मीडिया पर सेंसरशिप लगा दी थी, संविधान में बदलाव किए और न्यायालय तक के हाथ बांध दिए थे। आपातकाल के खिलाफ संसद से सड़क तक आंदोलन करने वाले असंख्य सत्याग्रहियों, किसानों, युवाओं व महिलाओं के संघर्ष को नमन करता हूं। 3. जेपी नड्डा: 25 जून 1975… यह वो दिन है जब कांग्रेस पार्टी के आपातकाल लगाने के राजनीतिक रूप से प्रेरित फैसले ने हमारे लोकतंत्र के स्तंभों को हिला दिया था और डॉ. अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान को कुचलने की कोशिश की थी। इस दौरान जो लोग आज भारतीय लोकतंत्र के संरक्षक होने का दावा करते हैं, उन्होंने संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में उठने वाली आवाजों को दबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज हम अपने महान नायकों द्वारा किए गए बलिदानों को याद करते हैं जो इमरजेंसी के दौरान बहादुरी से लोकतंत्र के संरक्षक के रूप में खड़े रहे। मुझे गर्व है कि हमारी पार्टी उस परंपरा से जुड़ी है जिसने आपातकाल का डटकर विरोध किया और लोकतंत्र की रक्षा के लिए काम किया। 4. राजनाथ सिंह: आज से ठीक 49 साल पहले भारत में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा आपातकाल लगाया गया था। आपातकाल हमारे देश के लोकतंत्र के इतिहास का वह काला अध्याय है, जिसे चाह कर भी भुलाया नहीं जा सकता। सत्ता के दुरुपयोग और तानाशाही का जिस तरह खुला खेल उस दौरान खेला गया, वह कई राजनीतिक दलों की लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता पर बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। भारत की आने वाली पीढ़ियां उनके संघर्ष और लोकतंत्र की रक्षा में उनके योगदान को याद रखेंगीं। 5. योगी आदित्यनाथ: कांग्रेस में चेहरे बदले होंगे, लेकिन उसका चरित्र और उसके हावभाव आज भी वही है, जो 1975 में थे। उस समय कांग्रेस का एक बर्बर चेहरा हम सभी को देखने को मिला था। कैसे उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में संशोधन करके उसकी आत्मा को नष्ट करने का प्रयास किया था। कैसे कांग्रेस ने उस समय देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था। आज भी कांग्रेस पार्टी में भले ही नेतृत्व बदला हो, लेकिन उसका चरित्र वही है। 6. ज्योतिरादित्य सिंधिया: आज उस काले दिन को हमें मद्देनजर रखना चाहिए ताकि भविष्य में कभी भी ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो पाए। देश में प्रजातंत्र स्वस्थ्य, मजबूत रहे। देश का संविधान भाजपा, NDA सरकार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है PM ने कल भी इमरजेंसी का जिक्र किया था
सोमवार (24 जून) को संसद सत्र शुरू होने से आधे घंटे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरजेंसी का जिक्र किया। 25 जून न भूलने वाला दिन है। इसी दिन संविधान को पूरी तरह नकार दिया गया था। भारत को जेलखाना बना दिया गया था। लोकतंत्र को पूरी तरह दबोच दिया गया था। उन्होंने कहा कि भारत के लोकतंत्र और लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा करते हुए देशवासी संकल्प लेंगे कि भारत में फिर कभी कोई ऐसी हिम्मत नहीं करेगा, जो उस समय किया गया था। भारत की नई पीढ़ी ये कभी नहीं भूलेगी की संविधान को इमरजेंसी के दौरान पूरी तरह नकार दिया गया था। पूरी खबर पढ़ें… 21 महीने के लिए लगाई गई थी इमरजेंसी
25 जून 1975 को देश में 21 महीने के लिए इमरजेंसी लगाई गई थी। तत्कालीन PM इंदिरा गांधी के कहने पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इमरजेंसी के आदेश पर दस्तखत किए थे। इसके बाद इंदिरा ने रेडियो से आपातकाल का ऐलान किया। आपातकाल की जड़ें 1971 में हुए लोकसभा चुनाव से जुड़ी थीं, जब इंदिरा ने रायबरेली सीट पर एक लाख से भी ज्यादा वोट से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के राजनारायण को हराया था। लेकिन राजनारायण चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे। 12 जून 1975 को हाईकोर्ट ने इंदिरा का चुनाव निरस्त कर 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी। वे 23 जून 1975 को सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई और इंदिरा को प्रधानमंत्री बने रहने की इजाजत दे दी। इसके बाद इंदिरा ने देश में इमरजेंसी का ऐलान कर दिया।

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